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कुरान के विज्ञान में छाती में होता है दीमाग!
प्रस्तुति: फरहाना ताज
एक महान कुराणिक ने लिखा है कि कुरान शुद्ध विज्ञान है, इसमें पांचन तंत्र की विस्तृत व्याख्या दी गई है। कुरान 11:5 और 22:46 पांचन तंत्र और मस्तिष्क की जो व्याख्या की है, यदि कोई समझदार उसे पढ ले और समझ ले तो उसे डाक्टरी पढने की जरूरत नहीं है, वह हकीम लुकमान जैसा बुद्धिमान बन जाता है।
अबे घोंचू मुस्लिम विद्वानों की व्याख्या ही पहले सुन लें। देखिए
” देखो यह लोग अपने सीनों को मोड़ लेते हैं.ताकि ऐसा करने से छिप जाएँ,लेकिन जान लो कि जब भी यह लोग इस तरह से खुद को अपने कपड़ों में छुपा लेते हैं, तो अल्लाह वह सब कुछ देख लेता है, जो यह लोग छिपा लेते हैं .और अल्लाह तो उनके सीनों अन्दर की चीज भी देख लेता है ” अब यह जाकिर मिया अल्लाह सबकुछ देख लेता है, उसे ही पाचन क्रिया बताते हैं, लेकिन मूल में पाचन क्रिया का जिक्र कहां है?

“أَلَا إِنَّهُمْ يَثْنُونَ صُدُورَهُمْ لِيَسْتَخْفُوا مِنْهُ أَلَا حِينَ يَسْتَغْشُونَ ثِيَابَهُمْ يَعْلَمُ مَا يُسِرُّونَ وَمَا يُعْلِنُونَ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ ”
सूरा -हूद 11 :5
कुरान के हिंदी अनुवाद में इस आयत की तफ़सीर (व्याख्या ) में इस का खुलासा करते हुए टिपण्णी में लिखा है “मक्का के लोग रसूल की बातें सुनने से कतराते थे .और उनको देखते ही या तो मुंह मोड़ कर चल देते थे ,या अपने सीनों को मोड़ कर (झुक कर ) खुद को कपड़ों में छिपा लेते थे ( कुरान मजीद-कुरान का हिंदी अनुवाद पेज -415 ,अनुवादक फारूख खान ,मकतबा अल हसनात,रामपुर .)
जाकिर मिया फरमाते हैं आदमी का दीमाग सिर में नहीं छाती में होता है और वहीं रूह भी बसती है।
चचाजान आर्यो का दीमाग तो सिर में ही होता है, लेकिन मुस्लिमो का छाती में नहीं, पैरों में होता है। समझें।
चचाजान विज्ञान की दृष्टि से पाचन क्रिया के बारे में ये बातें बच्चा-बच्चा भी जानता है कि मानव के पाचन तंत्र में एक आहार-नाल और सहयोगी ग्रंथियाँ (यकृत, अग्न्याशय आदि) होती हैं।
आहार-नाल, मुखगुहा, ग्रसनी, ग्रसिका, आमाशय, छोटी आंत, बड़ी आंत, मलाशय और मलद्वार से बनी होती है। सहायक पाचन ग्रंथियों में लार ग्रंथि, यकृत, पित्ताशय और अग्नाशय हैं।

 

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