फिर वो ही रफ़्तार
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जला है मेरे खुदा इतना क्यों ? खफा इतना क्यों ?
अगर लेना ही है तो चुन चुन के ले सूखे के साथ लीला क्यों ?

तेरी कसौटी की कहानिया लिखवा के क्या करेगा ?
हमें भी शर्म आती है हाथ कापता है निर्दोशोके बारेमे लिखने से

फिर देख ये गिध समडी ,और वरु मंडराने लगेंगे नोच नोच के
खानेको वोही रफ़्तार दया ,धर्म और तेरे बहाने कई सूखे पदमे जान आएगी
===प्रहलादभाई प्रजापति

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