#‎AntiModiPropaganda‬

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संक्षिप्त झलक :- कहावत है कि “धूर्त दावा करते हैं और मूर्ख उसे मान लेते हैं”. भारत में ऐसा ही कुछ “सेक्यूलरिज्म” के नाम पर भी होता आया है. विश्व के अन्य देशों में सेक्यूलरिज्म का अर्थ है “धर्म को राजनीति से अलग रखना” और इस परिभाषा का उद्भव भी पश्चिम में ही हुआ. लेकिन जो मुस्लिम संगठन अरब देशों में सेक्यूलरिज़्म का “स” भी नहीं उच्चारते वे भारत में सेक्यूलरिज़्म की माला जपते हैं. यही हाल ईसाई संगठनों का है, पश्चिम में चर्च और वेटिकन प्रत्येक राजनैतिक मामले में अपनी पूरी दखल रखते हैं (यहाँ तक कि भारत में भी केरल, उड़ीसा में कई मामलों में चर्च ने खुद अपने “सेक्यूलर उम्मीदवार” तय किए हैं).

लेकिन यही ईसाई संगठन भारत में सेक्यूलरिज्म के पुरोधा बने फिरते हैं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि भारत में सेक्यूलरिज़्म की अवधारणा “हिन्दू विरोधी विचारधारा” के रूप में है. हिन्दू धर्म, हिंदुत्व, हिन्दू परम्पराओं, हिन्दू विश्वासों-अंधविश्वासों के खिलाफ जो भी अधिकाधिक जोरशोर से चिल्लाएगा, उसे भारत में सेक्यूलर माना जाएगा… परन्तु यह नियम विश्व के इस्लामी-ईसाई देशों में लागू नहीं होता. ज़ाहिर है कि कोई भी ईसाई अथवा मुस्लिम कभी सेक्यूलर हो ही नहीं सकता. इसलिए जब हम सेक्यूलर शब्द का उच्चारण करते हैं तो वह वास्तव में जन्मना हिन्दू के लिए ही होता है जिसके मन में भारतीय परम्पराओं एवं हिन्दू धर्म के प्रति संशय की भावना बलवती बना दी गई है. (इसी लेख का एक अंश…)

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शुभ संध्या मित्रों…
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Suresh Chiplunkar's photo.
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