सबसे प्राचीन सनातन धर्म
इब्राहीमी धर्म उन धर्मों को कहते हैं जो हज़रत इब्राहीम (इब्राहिम अथवा अब्राहम) के पूजित ईश्वर को मानते हैं । इनमें ईसाई धर्म, इस्लाम धर्म और यहूदी धर्म शामिल हैं , और ये अपने आप को बाइबिल में वर्णित नबी इब्राहीम का वंशज मानते हैं । ये तीनों धर्म मध्य पूर्व के रेगिस्तान में पनपे थे और बिलकुल एकेश्वरवादी हैं ।

600 ईसा पूर्व ईस्वी से पूर्व इस्लाम से पहले अरब में तीन परंपरा प्रचलन में थी। एक अरब का पुराना धर्म जिसे दीने इब्राहीमी कहा जाता था। यह इब्राहीमी धर्म ही बिगाड़ का शिकार होकर मुशरिकों का धर्म बन चुका था। दूसरा यहूदी धर्म और तीसरा ईसाई धर्म। मुशरिकों में से कुछ मुसलमान बन गए और कुछ जंग में मारे गए। इस्लाम की लड़ाई जहां मुशरिकों से थे वहीं यहूदी और ईसाइयों से भी थी। इस कशमकश में इस्लाम जीतता गया।
मुशरिक अपने पूर्वजों और योद्धाओं की कब्रों की पूजा करते थे और उनसे आशीर्वाद मांगते थे। मुशरिक काबा को अपना इबादतगाह मानते थे। काबा में 300 से ज्यादा मूर्तियां रखी थीं और उसके आसपास कब्रें थीं। यहूदी भी यहीं पूजा करते थे।

मुशरिक बहुदेववादी और मूर्तिपूजक थे। बहुत से विद्वान मानते हैं कि ये सभी हिंदू थे व इनका समाज मुशरिक था, लेकिन हिंदू विद्वान इस बात से इत्तेफाक रखते हैं। इस पर विवाद हैं। मुशरिक का अर्थ होता है ईश्वर को छोड़कर या ईश्वर के अतिरिक्त अन्य को पूजने वाला बहुदेववादी। हिंदू तो एकेश्वरवादी धर्म है।

इराक और सीरिया में सुबी नाम से एक जाति है यही साबिईन है। इन साबिईन को अरब के लोग हिंदू मानते थे। साबिईन अर्थात नूह की कौम। भारतीय मूल के लोग बहुत बड़ी संख्या में यमन में आबाद थे, जहां आज भी श्याम और हिंद नामक किले मौजूद हैं।

इस्लाम ने जब अरब से बाहर कदम रखा तो उनका पहला सामना पारसी धर्म के लोगों से हुआ। उन्होंने पारसी धर्म के लोगों को ईरान से खदेड़ दिया उसी तरह जिस तरह की अफगानिस्तान और पाकिस्तान से हिंदू और बौद्धों को खदेड़ दिया।

जब हम इतिहास की बात करते हैं तो वेदों की रचना किसी एक काल में नहीं हुई। विद्वानों ने वेदों के रचनाकाल की शुरुआत 4500 ई.पू. से मानी है अर्थात ये धीरे-धीरे रचे गए और अंतत: कृष्ण के समय में वेदव्यास द्वारा पूरी तरह से वेद को चार भागों में विभाजित कर दिया गया। इस मान से लिखित रूप में आज से 6508 वर्ष पूर्व पुराने हैं वेद। यह भी तथ्‍य नहीं नकारा जा सकता कि कृष्ण के आज से 5500 वर्ष पूर्व होने के तथ्‍य ढूंढ लिए गए।

हिंदू और जैन धर्म की उत्पत्ति पूर्व आर्यों की अवधारणा में है, जो 4500 ई.पू. (आज से 6500 वर्ष पूर्व) मध्य एशिया से हिमालय तक फैले थे। कहते हैं कि आर्यों की ही एक शाखा ने पारसी धर्म की स्थापना भी की। इसके बाद क्रमश: यहूदी धर्म 2 हजार ई.पू., बौद्ध धर्म 500 ई.पू., ईसाई धर्म सिर्फ 2000 वर्ष पूर्व, इस्लाम धर्म 1400 साल पहले हुए।

लेकिन धार्मिक साहित्य अनुसार हिंदू धर्म की कुछ और धारणाएं भी हैं। मान्यता यह भी है कि 90 हजार वर्ष पूर्व इसकी शुरुआत हुई थी। जवाहरलाल नेहरू कि ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ और रामशरण उपाध्याय की किताब ‘बृहत्तर भारत’ में हिंदू धर्म और भारत के इतिहास के बारे में विस्तार से मिल सकता है।

अनिल शर्मा's photo.
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