बिना अग्नि  धुवा उठ नहीं शकता
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स्तर कविताका  इतना निचे उत्तर आया
श्वास में  जो   ये   बकवास घुस गया गया

सरस्वितोको माँ बोलके दूर व्यवहार  दे  गया
स्वासमें  विस्वास  का  अधह पतन  छा  गया

खाने को न मिला कुछ तो खुदका घर  खा गया
खुद का  इलज़ाम पडोसी को  दालनेको  गया

सरस्वती का स्वास  निर्वस्त्र समझने लगा
स्वासको बकवासका घर अब उजाड़ने लगा

हकीकत छुप नहीं शक्ति चाहे कितना करे बकवास
सनातन सत्य बिना अग्नि  धुवा उठ नहीं शकता
===प्रहलाद प्रजापति

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