वाह तेरी  गरीबी
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कोई तवे पे ,कोई चूल्हे पे ,तो कोई शगदीपे
यहाँ  सब अपनी रोटियाँ  पका रहे है लोग

सबका एक ही मकसद है भूख मिटानेको
और पेट पालनेको आपसमे लड़ रहे है लोग

ये भूख कोई गरीब की नहीं है जो पसिनेसे जुड़ी है
सपत्ति और सत्ताकी भूख जो गरीबको खा रहे है

गरीब के नामसे गरीब के बहाने गरीबको लुटाते है
गरीब और गरीबीको ज़िंदा रखनेको लड़ते है लोग
===प्रहलाद प्रजापति

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