कौन कहता है की न्याय की देवी की आँखो पे पट्टी लगी है ?
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न्याय की देवीकी आखोमे पट्टी क्यों है , वो तोल मोल और पट्टी पीछे रह कर न्यायकी तुलना शके , कौन उनके लाभार्थी है। या कौन उनके रिस्तेदारी वाले है , या तरफदारी करनी है वो सब कोई देख न ले , ये सब तय करनेको न्यायकी देवी के पट्टी के राज खुल जाय ,उसको छुपानेको पट्टी राखी जाती होगी , नहीतो , सद्वी प्रग्ना ,इसीतरह कैर बरसाते तड़पती न होती,और न आशाराम को बिना केस फ्राम हुए जेलमे रखे जाते, , और जिनको कानून ने दोषी
ठहराए है वो छूट न जाते ,ये सब पर्देके पीछे का खेल है ,हिंदुस्तान में न्याय बिकता है ,,या शुभाष बोज़ को ज़िंदा फसाया न जाता ,या शाश्त्री जिको ज़िंदा
भिज के मुर्दा लायागया न होत , न्याय को तोड़ मरोड़ने वाला चाहिए सब कुछ हिन्दुस्तानमे शक्य है इशरत जहा को अगर हेडलिने आतकवादी करार
दया न होता तो वो भी एक मासूम बच्ची या किसी की बेटी जाहिर होती ,और मोदीजीको क्या होता वो भगवान जाने , ये तो अमरीका की न्याय पालिका का न्याय मिला
न की हिन्दुस्तानकी न्याय पालिका का , ये न्याय पालिका भी अब शक के घेरेमे है
===प्रहलाद प्रजापति

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