सुभाष चन्द्र बोस को ब्रिटेन को सौपने के लिए हस्ताक्षर करने वालो में नेहरू के साथ गाँधी क्यों शामिल हुए, जरुर पढ़िए….

 

सुभाष चन्द्र बोस को ब्रिटेन को सौपने के लिए हस्ताक्षर करने वालो में नेहरू के साथ गाँधी क्यों शामिल हुए, जरुर पढ़िए…
==========================================१-नेहरू, जिन्ना, मौलाना आजाद और महात्मा गाँधी ने अंग्रेजी जजों से समझौता किया यदि सुभाष चन्द्र बोस मिलते है तो उनको दोषी बनाकर कोर्ट यानि अंग्रेजों को सौंप दिया जायेगा.

२- नेहरू को गाँधी किसी भी हालत में प्रधानमंत्री बनाना चाहते थे और नेहरू अन्दर ही अन्दर मुस्लिम पक्ष को मजबूत करते रहते थे और भारत में हिन्दुओ का वर्चस्व मिटाना चाहते थे. सुभाष चन्द्र बोस काफी हद तक हिंदुत्व का प्रतिनिधित्व भी थे और वह किसी भी हालत में भारत का विभाजन नहीं चाहते थे.

३-इसीलिये नेहरू ने माउंट बैटन को नेहरू पत्र लिखा था की -” सुभाष को भारत तब तक न आने दिया जाये जब तक की भारत का बँटवारा नहीं हो जाता है,” यानी नेहरू पी एम् नहीं बन जाते , इससे यह सिद्ध हो गया था की नेताजी पक्के तौर पर रूस में ही कैद थे, जिसके लिए केजीबी ने भारत के नेहरू वंश को कितना ब्लैक मेल किया होगा हम अंदाजा लगा सकते है.

४- इसी एक मुद्दे की वजह से भारत ने कभी भी अमेरिका से अच्छे सम्बन्ध नहीं बनाये जिसके लिए रूस जिम्मेदार है और भारत के नेता रूस के सामने दबते रहे क्योकि सुभाष जी इनके लिए कमजोरी बन चुके थे, कारण था सुभाष जी का असर भारत की जनता में बहुत गहरा था और उनके आने से न भारत बँटता और ना ही जिन्ना और नेहरू की कोई ख्वाइश पूरी होती |

५-नेहरू के लिए गाँधी राष्ट्रपिता कतई नहीं थे, वे एक मोहरा थे जिनको नेहरू इस्तेमाल करते थे, गाँधी अफ्रीका क्यों गए जब उन्हें पहले से मालूम था की भारत भी अंग्रेजो का गुलाम है. भारत की असली आज़ादी सुभाष और गरम दल की दें है , नेहरू को तो सिर्फ सत्ता का लालच था और उन्होंने सत्ता और अपने बीच आने वाले हर शख्स को दूर कर दिया. सुभाष जी सबसे बड़ा काँटा थे. नेहरू ने गाँधी को हर गलत काम में अगुआ बनाया जिससे की नेहरू के हर कदम को और लोगो भी समर्थन मिल जाय करे.

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