'(English translation is below)
कुछ बड़ी शक्तिया हैं, जो की भारत को तोड़ने का काम कर रहीं हैं ! और हमें इसेके लिए एक साथ मिलने की और एक साथ अपनी कमर कसने की जरूरत है! भारत को वैचारिक तौर पर तोड़ने के लिए देसी और विदेशी ताकते काम कर रहीं है (आप राजीव मल्होत्रा जी की पुस्तक "ब्रेकिंग इंडिया" पढ़ें) !
ऐसा नहीं है की अतीत में बड़े देश टूटे नहीं है, रूस, एक बड़ी ताकत था, बड़ा देश था, लेकिन वोह १६  देशो में टूट गया ! यूगोस्लाविया एक बड़ा मुल्क था, विश्व की ६ सबसे बड़ी सैन्य शक्ति था, लेकिन वोह भी ५ देशो में टूट गया !
सबसे बड़ा उधाहरण तोह, हमारा अखंड भारत ही है, जिसके बहोत सारे टुकड़े हो चुके हैं ! बर्मा, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्थान, बांग्लादेश, तिब्बत, इंडोनेशिया यह सब अखंड भारत के ही हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन धीरे धीरे हमसे अलग कर दिए गए!

रूस और यूगोस्लाविया , दोनो देश ही कोमुनिस्ट (वामपंथी) और सोशलिस्ट (समाजवादी) देश हुआ करते थे !
इन देशों में ये वामपंथी विचारधाराएं ,"एक राष्ट्र(One Nation)" की अवधारणा को नष्ट "deconstruct" के लिए काम करती थीं! वे social fault-lines को बनाना और निर्मित करना, और उसे पोषित करते रहने का काम , सांस्कृतिक सामंजस्य और इतिहास विकृत (History distortion) का काम करती रहती थीं ! मार्क्सवादियों के इन सामाजिक इंजीनियरिंग (Social Engineering) के तरीकों से समुदायों के बीच नफरत फैलाने में करने की दिशा में काम किया! जो इन साम्यवादी देशों में अंतता फाइनल  ब्रेकअप (Final Break-up) के रूप में उभर कर आया !

हिंदुओं को भारत की अपनी सभ्यता सच इतिहास के लिए हर भारतीय को जोड़ता है जो एक भारतीय राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए एक सामूहिक हिंदू मानसिकता की जरूरत है.
जो विरोधी बल सहयोग में काम कर रहे हैं उनके हर पहलू को सार्वजनिक क्षेत्र में चर्चा और बहस करने की जरूरत है!
हमें चर्चा वामपंथी-पश्चिमी-Abrahmic लेंस (नजरिये) की तुलना में नहीं , बल्कि भारत के और अपने प्राचीन इतिहास और सभ्यता के नजरिये और माध्यम से करनी पड़ेगी! यह नजरिये को हमें बदलने की अत्यंत जरूरत है !

महाभारत युद्ध के पहले का भ्रम और दुर्बलता(मानसिक) के इस "अर्जुन सिंड्रोम" को दूर और स्पष्ट करने हेतु, अब एक विराट भारत राष्ट्र निर्माण किया जाना चाहिए !
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English Translation:
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There are forces working to break India, and we need to get our acts together to prevent it. It is not like, that the bigger countries have not been broken. It had happened in the past as well, like Russia broke in 16 countries, Yugoslavia broke in 5 different countries on the religio-ethnic lines.
Both of these countries were happened to be Socialist-Communist countries, who worked to "deconstruct" the concept of one Nation. They manufactured faultlines, nurtured it, distorted cultural cohesiveness and history. These social engineering methods of Marxists worked towards in spreading hatred among communities, which resulted in the final break-up of these communist nations.

Hindus need a collective Hindu mindset to build an Indian National Identity, which connects every Indian to its civilizational true history of India.
Every aspect of inimical forces forces, which are working in collaboration, need to be discussed and debated in the public sphere, without any fear, through the lenses of India and its ancient history and Civilization, rather than Left wing-Western-Abrahmic lenses.
This "Arjuna Syndrome" of confusion and debilitation must be removed and clarified, for the sake of Nation building.
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@[107229389416718:274:Subramanian Swamy]'
Dr Subramanian Swamy talks on Reservation & “Breaking India”
10:19

(English translation is below)
कुछ बड़ी शक्तिया हैं, जो की भारत को तोड़ने का काम कर रहीं हैं ! और हमें इसेके लिए एक साथ मिलने की और एक साथ अपनी कमर कसने की जरूरत है! भारत को वैचारिक तौर पर तोड़ने के लिए देसी और विदेशी ताकते काम कर रहीं है (आप राजीव मल्होत्रा जी की पुस्तक “ब्रेकिंग इंडिया” पढ़ें) !
ऐसा नहीं है की अतीत में बड़े देश टूटे नहीं है, रूस, एक बड़ी ताकत था, बड़ा देश था, लेकिन वोह १६ देशो में टूट गया ! यूगोस्लाविया एक बड़ा मुल्क था, विश्व की ६ सबसे बड़ी सैन्य शक्ति था, लेकिन वोह भी ५ देशो में टूट गया !
सबसे बड़ा उधाहरण तोह, हमारा अखंड भारत ही है, जिसके बहोत सारे टुकड़े हो चुके हैं ! बर्मा, अफ़ग़ानिस्तान, पाकिस्थान, बांग्लादेश, तिब्बत, इंडोनेशिया यह सब अखंड भारत के ही हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन धीरे धीरे हमसे अलग कर दिए गए!

रूस और यूगोस्लाविया , दोनो देश ही कोमुनिस्ट (वामपंथी) और सोशलिस्ट (समाजवादी) देश हुआ करते थे !
इन देशों में ये वामपंथी विचारधाराएं ,”एक राष्ट्र(One Nation)” की अवधारणा को नष्ट “deconstruct” के लिए काम करती थीं! वे social fault-lines को बनाना और निर्मित करना, और उसे पोषित करते रहने का काम , सांस्कृतिक सामंजस्य और इतिहास विकृत (History distortion) का काम करती रहती थीं ! मार्क्सवादियों के इन सामाजिक इंजीनियरिंग (Social Engineering) के तरीकों से समुदायों के बीच नफरत फैलाने में करने की दिशा में काम किया! जो इन साम्यवादी देशों में अंतता फाइनल ब्रेकअप (Final Break-up) के रूप में उभर कर आया !

हिंदुओं को भारत की अपनी सभ्यता सच इतिहास के लिए हर भारतीय को जोड़ता है जो एक भारतीय राष्ट्रीय पहचान बनाने के लिए एक सामूहिक हिंदू मानसिकता की जरूरत है.
जो विरोधी बल सहयोग में काम कर रहे हैं उनके हर पहलू को सार्वजनिक क्षेत्र में चर्चा और बहस करने की जरूरत है!
हमें चर्चा वामपंथी-पश्चिमी-Abrahmic लेंस (नजरिये) की तुलना में नहीं , बल्कि भारत के और अपने प्राचीन इतिहास और सभ्यता के नजरिये और माध्यम से करनी पड़ेगी! यह नजरिये को हमें बदलने की अत्यंत जरूरत है !

महाभारत युद्ध के पहले का भ्रम और दुर्बलता(मानसिक) के इस “अर्जुन सिंड्रोम” को दूर और स्पष्ट करने हेतु, अब एक विराट भारत राष्ट्र निर्माण किया जाना चाहिए !
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English Translation:
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There are forces working to break India, and we need to get our acts together to prevent it. It is not like, that the bigger countries have not been broken. It had happened in the past as well, like Russia broke in 16 countries, Yugoslavia broke in 5 different countries on the religio-ethnic lines.
Both of these countries were happened to be Socialist-Communist countries, who worked to “deconstruct” the concept of one Nation. They manufactured faultlines, nurtured it, distorted cultural cohesiveness and history. These social engineering methods of Marxists worked towards in spreading hatred among communities, which resulted in the final break-up of these communist nations.

Hindus need a collective Hindu mindset to build an Indian National Identity, which connects every Indian to its civilizational true history of India.
Every aspect of inimical forces forces, which are working in collaboration, need to be discussed and debated in the public sphere, without any fear, through the lenses of India and its ancient history and Civilization, rather than Left wing-Western-Abrahmic lenses.
This “Arjuna Syndrome” of confusion and debilitation must be removed and clarified, for the sake of Nation building.
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Subramanian Swamy

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