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^ मणिपुर का तालिबानी कारण

हिन्दी फिल्में लगना बंद, भारतीय साहित्य जलाया, स्कूलों में राष्ट्रगान नहीं, छात्र-छात्राओं पर पाबंदी, परिवार नियोजन पर रोक

हिन्दी फिल्में लगना बंद, भारतीय साहित्य जलाया, स्कूलों में राष्ट्रगान नहीं, छात्र-छात्राओं पर पाबंदी, परिवार नियोजन पर रोक गोपाल शर्मा इम्फाल, 2 जनवरी। भारतीय मूल संस्कारों से ओत-प्रोत, राधा-कृष्ण भक्ति की समृद्ध विरासत और भारतीय स्वातंत्र्य समर में आजाद हिन्द फौज के साथ अनगिनत बलिदान देने वाले मणिपुर की त्रासदी यह है कि वह दिखावे भर के लिए भारत का हिस्सा है। उग्रवादियों की धमकी के कारण पिछले दस सालों से सिनेमा हॉलों में हिन्दी फिल्में लगना बंद हो चुकी हैं। हिन्दी-बंगला भाषा के विरोध के कारण न केवल वहां लगे होर्डिंग-बोर्ड हटवा दिए गए हैं बल्कि एक अभियान चलाकर ज्यादातर स्कूली पुस्तकालयों की किताबें ही जला दी गईं ताकि उनके अंश शेष नहीं रह जाएं। स्कूलों में अब राष्ट्रगान नहीं होता। इम्फाल के इस्कॉन मंदिर में हो रही रासलीला पर बम फेंककर बंद करवा दिया गया; उस घटना में कुछ श्रद्धालु मारे भी गए। मोरेंग में आजाद हिन्द फौज संग्रहालय पर लगी नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रतिमा पर बम फेंक दिया गया। चर्च के अत्यधिक प्रभाव के कारण यहां राष्ट्रीयता की जड़ें खोखली होती जा रही हैं। यहां सक्रिय तीन दर्जन उग्रवादी संगठन तालिबानी तौर-तरीके लागू किए हुए हैं।

कहने को वहां एक राष्ट्रीय दल कांग्रेस की सरकार है..लोग बातचीत में सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह का नाम लेते समय ‘हमारे भी लगाते हैं और आम आदमी तक नरेन्द्र मोदी का नाम जान रहा है और यह उम्मीद प्रकट करता हुआ मिल जाएगा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर हालात सुधरेंगे। लेकिन भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि लगता ही नहीं कि वहां कोई सरकार काम कर रही है और आश्चर्य नहीं कि इसी भ्रष्टाचार प्रेरित व्यवस्था ने राज्य को अराजकता की दिशा में धकेलने की भूमिका निभाई हो। टैक्सी, ऑटोरिक्शा और रिक्शा चलाने वाले मणिपुरी उच्च शिक्षा संपन्न मिल जाएंगे। स्नातकोत्तर और व्यावसायिक पाठ्यक्रम किए हुए भी कुछ ऐसे लोग मिले। लेकिन उनकी आम शिकायत है कि रिश्वत दिए बिना नौकरी नहीं मिलती और जितनी रिश्वत चलती है उतनी दे पाना उनके बूते की बात नहीं है।
आमतौर पर चर्चा है कि एक कांस्टेबल की भर्ती के बदले 12 से 15 लाख और उपनिरीक्षक की भर्ती के बदले 45 से 50 लाख रुपए लिए जाते हैं। इसी तरह हर विभाग में भर्ती की दर तय है। सरकारी ठेकों में भी उन लोगों को प्राथमिकता दी जाती है जो ज्यादा फर्जी बिल बना सकें और कम-से-कम काम करके अधिक से अधिक गबन करने में मदद कर सकें। पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए अन्य स्थानों पर लोग पेट्रोल पंपों पर जाते हैं लेकिन मणिपुर की कितनी ही दुकानों पर अवैध रूप से पेट्रोल-डीजल बिकता हुआ दिखता है। उसके भाव पेट्रोल पंप पर मिलने वाले तेल से ज्यादा हैं। ऐसा करने पर पुलिस की ओर से कोई रोक-टोक नहीं है..हर चीज के लिए रिश्वत तय है। इम्फाल में घूमता हुआ मैं गोविन्दजी के मंदिर पहुंचता हूं..जहां इस समय व्यापक जीर्णोद्धार का काम चल रहा है। यह लगभग आठ सौ वर्ष पुराना मंदिर है और पूर्वोत्तर में इसकी काफी ख्याति है।

लेकिन यहां भी अर्धसैनिक बल के जवान मिले..जिनके भरोसे मंदिर की सुरक्षा है। मंदिर शाम चार बजे ही बंद हो चुका था। पूछने पर बताया गया कि चार बजे अंधेरा होने लगता है इसलिए तभी शयन आरती कर दी जाती है। इस्कॉन वालों के बनाए भव्य कृष्ण मंदिर में भी शाम को 6 बजे शयन आरती होती मिली। भय के कारण शाम को कोई श्रद्धालु नहीं था। इसी परिसर में हो रही रासलीला पर उग्रवादियों ने बम फेंक दिया था। फिर रासलीला ही बंद हो गई। मणिपुर में राधा कृष्ण भक्ति का व्यापक प्रभाव है लेकिन यहां के उग्रवादी और कट्टरपंथी मूल निवासी अब हिन्दू आधारों से मणिपुर को जोडऩे का विरोध करते हैं। आश्चर्य की बात है कि उग्रपंथ के इस दौर में शराब की एक भी दुकान नहीं है। स्थानीय स्तर पर बनने वाली शराब चोरी-छिपे बिकती है। होटलों में भी शराब नहीं रख सकते। युवतियों और छात्राओं के लिए खुलेपन के प्रति पाबंदी लगा दी गई है। वे छोटे कपड़ों में बाहर नहीं निकलतीं। स्कूली छात्राओं के लिए पूरे हाथ-पैर ढंकने वाली ड्रेस पहनने की ही इजाजत है। यह आश्चर्यजनक लेकिन सच है कि शाम होने के बाद लड़कियां अकेले घर से नहीं निकलतीं। यदि कोई जरूरी काम है और वे अविवाहित हैं तो भाई या निकटतम परिजन के साथ ही बाहर निकल सकती हैं।

तथ्य यह भी है कि लड़कियों-युवतियों पर लगी हुई इस रोक को मणिपुर के आम समाज का व्यापक समर्थन प्राप्त है। वे कहते हैं कि इससे संस्कार मजबूत होते हैं। आमतौर पर लड़के-लड़कियों के मिलने पर भी ध्यान रखा जाता है। होटलों-क्लबों या नाइट लाइफ पर पूरा प्रतिबंध है। साल भर पहले ही रूट-39 नाम के डिस्कोथेक को बम से उड़ाकर बंद करवा दिया गया। अब वहां वैसा करने का कोई साहस ही नहीं कर रहा है। हाइवे पर कई जगह अवैध वसूली करने वाले उग्रपंथी युवक मिल जाएंगे। ये वाहनों की तलाशी भी लेते हैं। रात को सफर करना तो खैर मुमकिन ही नहीं। रात में केवल पुलिस-जवान ही दिखाई देंगे। उग्रपंथियों की गतिविधियां पुलिस जवानों की गश्त से प्रभावित नहीं होती। मैं इम्फाल (मणिपुर) से कोहिमा-दीमापुर (नागालैंड) जाते समय मणिपुर के सेनापति जिले से निकला। यह उग्रवाद से सर्वाधिक प्रभावित जिला है। मेरे देखते ही देखते वहां हाइवे पर बम विस्फोट हुआ..हालांकि उससे कोई जन-धन हानि नहीं हुई। वहां एक व्यक्ति से बात कर रहा था तभी पता चला कि सड़क बना रहे दो मजदूरों को उग्रवादी उठाकर ले गए।

मणिपुर के एक छात्र संगठन डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स अलायंस ने बारहवीं तक के छात्र-छात्राओं पर दोपहिया वाहनों के इस्तेमाल पर रोक लगा रखी है। उसका मानना है कि दोपहिया वाहनों के कारण छात्रों का कॅरियर प्रभावित हो रहा है और शिक्षण संस्थान रोमांस के अड्डे बन गए हैं। हिंदी फिल्मों पर रोक के मामले में मणिपुर के सभी उग्रवादी संगठन एकजुट हैं। मेडिकल की दुकानों पर ऐसी दवाओं की बिक्री पर रोक है जो नशा फैलाने के काम में आती हैं। शराब का सेवन करने पर भी उग्रपंथियों की ओर से पाबंदी लगाई हुई है। यहां तक कि पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ कांग्लीपाक ने गर्भ निरोधकों के उपयोग पर भी पाबंदी लगा रखी है। उसकी दलील है कि गर्भ निरोधकों के उपयोग से मणिपुर मूल के लोगों की आबादी कम हो जाएगी इसीलिए उसे जनसंख्या बढ़ानी चाहिए। उग्रवादी संगठनों के कारण उग्रवादियों की समानांतर सरकार काम कर रही है और यह कहना गलत नहीं होगा कि वह सरकार निर्वाचित सरकार से कहीं अधिक शक्तिशाली है। मणिपुर के मूल निवासी और यहां तक कि मणिपुर के आम जनप्रतिनिधि भी उग्रवादियों से सहमत दिखाई देते हैं। वहां के मूल मेतेई लोग इस बात को सहर्ष स्वीकार करते हैं कि उग्रवादी वही पाबंदियां लगा रहे हैं जो उनकी संस्कृति को मजबूत करने वाले हैं।

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