देश द्रोही खोंग्रेस व् सेक्युलर.

देश द्रोही खोंग्रेस व् सेक्युलर
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ये नहेरु [मुगल ] वंशज विदेश थे विदेशी है और विदेशी रहेंगे , मुल्ल हिन्दुस्तानमे लूट करनेको थे और डकैती करनेको ही आये थे , जब पूरी दिनिया यानी की १९२ कंट्री योग का मिश्नको स्वीकार किया है तो जो लोग यहांके यानी हिन्दुस्तनके सहारे इतने पग भर हुए , देश को लटके , फिर भी उन्हें इस देश के
या हिन्दुस्तानके प्रति कोई हंम दरदी नहीं है , जब दुनियामे देश का नाम रोशन हो रहा है तो ये लोग विदेष भाग जाते है , इसका मतलब की इनको इस
देश के प्रति जरा भी मान नहीं है , उनको तो बस लुटनेकी नीति अख्तयार की है , क्या देश का मान बढ़ाने में उनको क्यों कोई रूचि नहीं है , क्या देश का
हित , दिनिया के प्रति बढ़ता है तो उनको क्यों जलन होती है , ये देश द्रोही का बड़ा सबूत प्रमाण है , अब इनको देश द्रोही कहनेमे क्या गलत है , सत्ता
पानेके लिए विधवा विलाप करनेको फिरसे देश में आ जायेगे। और भोले अपढ़ और अज्ञान लोगोको घुमराह करनेमे जुठे वादे देना शुरू करेंगे
=== प्रहलादभाई प्रजापति
about politics new india…..sone ka sher
हिन्दू को एक सूत्र में बांधने हेतु समाज के उन ठेकेदारों को अपनी सोच बदलनी होगी जो समाज खुद को धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील बताने वाले और वोट की
राजनीति से ऊपर न सोचने वाले आज ‘हिन्दू’ शब्द को अप्रतिष्ठित कर रहे है| सेकुलर दोगले विदेशी जयचंद।
अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसातथैव च:
अर्थात
अहिंसा परम धर्म है किंतु धर्म रक्षा हेतु हिंसा भी धर्म है।

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