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कृपया आर्टिकल खुद तक न रखे इसे आगे बढ़ाएं,देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है,ये आर्टिकल आपकी सोच न बदल दें ध्यान से पढ़ें
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भारत और इस्लाम “इतिहास, वर्तमान और भविष्य”

पिछले सप्ताह मेरे आर्टिकल “भारतीय मीडिया में बढ़ती अश्लीलता ‘कारण परिणाम और उपाय” पर लोगो की काफी अच्छी प्रतिक्रिया और समर्थन मिला। मै प्रधान संपादक रवि जी का धन्यवाद करना चाहूँगा जो मेरे लेख को दैनिक भारत में जगह दी।

इस सप्ताह का लेख लिखने के लिए काफी महीने पहले से अध्ययन करना सुरु किया था। एक सेक्युलर समाचार चैनल है उसपर चर्चा चल रही थी आगरा में जो बजरंग दल ने घर वापसी करवाई थी उसपर तो बिच में एंकर (रविस कुमार Ndtv)ने बोल दिया क्या हो जाएगा मुस्लिम जनसँख्या बढ़ जाये तो। यह क्या बचकानी बात बोली उस मुर्ख ने, चलिए देखते है भारत में इस्लाम के अतीत वर्तमान और भविष्य के बारे में।

सातवी सदी में कुछ इस्लामिक व्यापारी मालाबार और कोंकण के तट पर व्यापर के लिए पहुचे, उनका मकसद व्यापर के साथ साथ इस्लाम का प्रचार करना भी था। वे सीधा इस्लाम का प्रचार नहीं कर सकते थे इसलिए उन्होंने व्यापर का इस्तेमाल किया।
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यहाँ आकर उन्होंने संपत्ति बनानी सुरु की जिसका नतीजा भारत की पहली मस्जिद चेरामन जमा मस्जिद केरल में 629 में मलिक इब्न दीनार ने बनायीं और अपना साम्राज्य फैलाना सुरु किया। व्यापारी तो व्यापर करते हैं और चले जाते है पर वे अरब और पर्शिया से आए और गुजरात के तटीय क्षेत्रो में बस गए वहां के लोगो को भगा कर।
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इसके बाद धर्म परिवर्तन और क्रूरता का खेल सुरु हुआ। मालाबार में मपिला पहली जाती थी जिनको इस्लाम में धर्मान्तरित किया गया। यहाँ प्रश्न यह उठता है किसी का धर्म परिवर्तन करने की क्या जरुरत है आप तो यहाँ व्यापर करने आये थे। पर उनकी मंशा कुछ और रही होगी। इसमें कितने लोगो का कत्लेआम हुआ उसका आंकड़ा नहीं है।

आठवी सदी में मुस्लिम आक्रांता मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध प्रान्त में कत्लेआम किया। निर्दोष हिंदुओं की हत्या की और उनका धर्म परिवर्तन कराया तलवार के दम पर। इस तरह सिंध में इस्लाम का साम्राज्य फैलता गया। हर तरफ अराजकता खून खराबा और मातम का माहौल रहा होगा।

दसवीं सदी की सुरुवात में महमूद ग़ज़नी ने भारत में 17 बार आक्रमण किया, हिन्दुओ का कत्लेआम किया, मंदिरों को धवस्त किया जिसमे गुजरात का सोमनाथ मंदिर भी था। यहाँ महमूद ग़ज़नी के बारे में कुछ रोचक जानकारियां भी है जो इतिहास में चर्चा के विषय बने रहे होंगे। ग़जनी खुद को कहीँ का बाद्शाह बतलाता था पर इसको अपने दास मालिक अयाज़ की दासता भी स्वीकार करनी पड़ी थी क्योंकि महमूद ग़ज़नी समलैंगिक था और अपने दास मालिक अयाज़ पर हद से ज्यादा मोहित था। खैर एक आक्रांता का चरित्र ऐसा ही हो सकता है।
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ग्यारहवी सदी में ग़ाज़ी सैयद सलार मसूद ने धर्मान्तरण का काम किया वह तलवार के दम पर हिन्दुओ का धर्म परिवर्तन करता जो मना करता उसका कत्लेआम करता।

यह सब तो सुरुवात थी। इसके बाद मुहम्मद गौरी आया, दिल्ली सल्तनत बानी फिर गुजरात सल्तनत, मुग़ल साम्राज्य, द्वकन सल्तनत और अनेक मुस्लिम आक्रांता आये और भारत वर्ष पर खुनी खेल अराजकता का माहोल बना रहा।
कही भारत के नागरिको का क़त्ल, कही मंदिर तोड़ कर मस्जिद निर्माण जिसके अनेको उदहारण है। किस तरह हमारे पूर्वजो पर जुल्म हुए उसके जख्म आज भी ताजा हो जाते है जब हम कशी मथुरा और अयोध्या की तरफ देखते है।
हमारा देश इन अक्रान्ताओ की वजह से खंड खंड बँट गया, अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश ये सब भारत वर्ष के अंग थे पर आज हिन्दू भूमि पर मुस्लिम मुल्क बने हुए है।
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हिन्दू धर्म के महान् ज्ञानी श्री सुब्रमण्यम स्वामी जी को कई बार सुना की भारत पर इतने आक्रमण हुए मुस्लिम अक्रान्ताओ द्वारा फिर भी यहाँ हिन्दू धर्म बना हुआ है, पर मै उनसे सहमत नहीं हूँ, अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान बांग्लादेश सब हिन्दू राष्ट्र थे हिन्दू समाज रहता था पर अब ये इस्लामी मुल्क है। क्या वह दिन दूर नहीं जब भारत भी इस्लामी मुल्क बन जाये।
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आइये जाने इस्लामी मुल्क बन जाये तो क्या होगा-

एक छोटा सा देश है मलेशिया जो दक्षिण पूर्व एशिया में है जहाँ की जनशंख्य 2.83 करोड़ है और मुस्लिम 61.3% है 20% बुद्ध 9.2% ईसाई और 6.3% हिन्दू। यहाँ मुस्लिम लोगो की जनशंख्या बढ़ी और ये इस्लामी मुल्क बन गया पर 12वी सदी से पहले यहाँ इस्लाम को कोई जानता भी नहीं था।

अब इस देश में कुछ ऐसे कानून है वो अमानवीय है जैसे –

1- कोई मुस्लिम अपना धर्म बदल कर दूसरा धर्म नहीं अपना सकते पर दूसरे धर्म वालो को मुस्लिम बनाते है।
2- किसी को मुस्लिम लड़की से शादी करनी है तो उसको मुस्लिम धर्म में आना पड़ेगा।
3- सुक्रवार को सभी कुछ बंद हो जाता है 2 घंटे के लिए मस्जिद में सजदा के लिए। पर दूसरे धर्म को ऐसा कुछ रियायत नहीं।
4- शिया मुस्लिम पर प्रतिबन्ध है।
5- योग पर प्रतिबन्ध है।
6- वहा के नागरिको को मलय बोला जाता है। और मलय सिर्फ मुस्लिम लोगो को बोलते है। इसका अर्थ क्या दूसरे धर्म वाले उस देश के नागरिक नहीं?

2010 में एक महिला ने वहा की अदालत में अर्जी डाली की 7 साल में उसका धर्म परिवर्तन करके मुसलमान बनाया गया था इसलिए अब वो वापस हिन्दू धर्म में आना चाहती है पर उसकी अर्जी रद्द कर दी गयी।
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यह तो एक देश का उदहारण है दुनिया में 57 मुस्लिम बहुल मुल्क है। हर जगह ऐसे ही कानून चलते है। तो क्या गारंटी है जिस दिन भारत में इस्लाम 50 प्रतिशत से ज्यादा हुआ उस दिन ऐसे कानून भारत में ना बन जाये जो पाकिस्तान बांग्लादेश अफ़ग़ानिस्तान और बाकि इस्लामी मुल्को में है।

हिन्दू समाज की स्तिथि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में –
भारत:
सन् 1951 में – 84.10%
सन् 1971 में – 83.30%
सन् 2011 में- 79.40 %

बांग्लादेश:
सन् 1951 में 22% हिन्दू
सन् 1971 में 14%
और 2011 में सिर्फ 8.20%

पाकिस्तान में 1951 में करीब 12 % हिन्दू जनशंख्या थी जो 2005 में 2% से भी कम हो गयी है।
यह डेटा साफ़ दिखा रहा है किस तरह हिन्दू समाज घट रहा है। कई जगह से ख़त्म हो गया है।

मुस्लिम समाज की स्तिथि भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश में-

भारत: 1951 में 9%, 1971 में 11.21%, 2011 में 14.88%।

पाकिस्तान: 1951 में 80%, 1971 में 88% और 2011 में 96%

बांग्लादेश: 1951 में 75%. 1971 में 82% और 2011 में 90%।

इस तरह इस्लाम हर जगह बढ़ रहा है। जो गंभीर विषय है।

भारत में जिस तरह हिन्दू समाज घट रहा है वह समय दूर नहीं जब भारत में हिन्दू समाज अल्पशंख्यक हो जाएगा तब भारत में भी मलेशिया की तरह कानून बन जाये तो कोई इत्तेफाक नहीं होगा।

अब स्तिथि यह है की हिन्दू समाज जागरूक बने नहीं तो कश्मीर आसाम बंगाल केरल उत्तर परदेश में जो हो रहा है वो भारत के अन्य राज्यो में भी हो सकता है।
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हम सरकार से अनुरोध करते है की जल्दी सामान नागरिक संहिता लाये जिससे मुस्लमान 4 की जगह एक ही शादी करे और जनशंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाये की कोई 2 से जयादा बच्चे ना करे।
पर सरकार की मंशा ऐसी नहीं लगती। इसलिए हिन्दू समाज एकजुट हो। हमें जातिवाद से ऊपर उठ कर वोट करना होगा। अगर हम संकल्प कर ले की सिर्फ हिन्दू वादी नेता को ही अपना वोट करेंगे तो आज जितने सेकुलरिज्म का राग लापते है वह भी जय श्री राम जय हनुमान बोलेंगे।
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वो कहते है ना लम्हों में खता की शदियों तक सजा हुई। हमारे पूर्वजो ने जो गलतिया की उससे ऊपर उठने की जरुरत है। अंत में इतनी ही विनती है नागरिको से जातिवाद से ऊपर उठे हिन्दू बने। नहीं तो अभी 79% हैं पर 50% होते देर नहीं लगेगी।
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अब शायद समझ आये की क्या हो जाएगा मुस्लिम संख्या बढ़ जाये तो। सुझाव आमंत्रित है। भाषा की मर्यादा बनाये रखे।।
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