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केजरीवाल पत्रकारों पर लूटा रहे हैं सरकारी खजाना
तानाशाह की तरह अरविंद केजरीवाल अपने आपको दुनियां का सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति समझते है। वह मानते है कि मैं ही सर्वोच्च हूं। मैं जो कहुंगा और करुंगा वही सही होगा। मैं किसी की बात को सुनुंगा नहीं। किसी की बात समझुंगा नहीं। दुनिया झूठी, मैं सच्चा। सारे चोर और बेर्इमान, मैं र्इमानदार। मैं किसी भी व्यक्ति के बारें में कुछ भी कह सकता हूं, यह मेरा अधिकार है, किन्तु कोर्इ मेरे बारें में कुछ कहेगा, वह मुझे स्वीकार नहीं है। मैं किसी को भी गाली दे सकता हूं। सरे आम उसकी इज्जत पर लांछण लगा सकता हूं, परन्तु कोर्इ ऐसा मेरा साथ करेगा, मैं उसको ठिकाने लगाने में देरी नहीं करुंगा।
जब मालूम हो की एक दिन के बादशाह हैं, तो “चमड़े का सिक्का” तो “निज़ाम सक़्क़ा “ने भी चला दिया था , और दिल्ली को दौलताबाद ले जाने वाले, सोने के सिक्के की जगह ताम्बे के सिक्के चला कर बर्बाद करने वाला बेवकूफ मोहम्मद बिन तुगलक भी दिल्ली में ही हुआ हैं।
48 घंटे में फ्री पानी, हफ्ते भर में सस्ती बिजली और 15 दिन में लोकपाल। कुछ ऐसे ही वायदे किये थे पिछली बार भी। लोकपाल में तो मान लिया की भ्रष्ट राजनीतिक दलों ने ईमानदार का साथ नहीं दिया था। लेकिन फ्री पानी और सस्ती बिजली ???? ये सब देने के लिए बजट में प्रावधान करना होता है और फिर बजट सदन में पास करवाना होता है। क्या आप लोगों को केजरीवाल ने यह बताया कि 49 दिनों की सरकार में न तो उन्होंने कोई सब्सिडी का बजट में प्रावधान किया और प्रधानमंत्री बनाने की जल्दबाजी में, इस्तीफा दिया और निकल लिए। सदन में बजट पास ही नहीं करवाया और ठीकरा फोड़ रहे हैं विपक्ष पर। ये चूक बड़े बड़े दिग्गज न पकड़ पाते ,अगर “राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी” ने सब्सिडी वाले बिल पर यह आपत्ति लगा कर बिल वापिस न किया होता, की इनका तो बजट में में प्रावधान ही नहीं है। केजरीवाल ईमानदार ही नहीं बहुत सीधे सादे इंसान हैं ,जिन्हे सरकार के यह छोटे छोटे कायदे कानून एक तो मालूम नहीं हैं और दूसरे वे यह मानना भी नहीं चाहते, और वैसे भी अपने मुंह से अपनी गलती कौन कबूल करता है।
केजरीवाल ने आखिर लूटा लिया दिल्ली का खजाना, आम जनता को न बिजली मिला न पानी और WiFi का सपना तो सुनहरा सपना ही रहा…!!!

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