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मोदी जी देश के विकास के लिए चिंतित है, और विरोधी अपने विनाश से कुपित है

मोदी जी विकास के रथ के आगे अवरोध खड़े करने को ले कर व्यथित है, जबकि उनके विरोधी अपनी पार्टी की कब्र खोद कर उसे दफनाने के लिए आतुर है। चंद चापलुसों और पीटे हुए नेताओं का साथ पा कर वे गदगद है। संसद को ठप्प कर वे मान रहे हैं, उनकी जीत हो गर्इ, पर यह नहीं समझ पा रहे है कि ऐसा करने से जनता की निगाहों से बेपर्दा हो रहे हैं। थोड़ा बहुत अस्तित्व बचा है, वह भी मिट जायेगा। एतिहासिक पार्टी को दफनाने का काम पूरा हो जायेगा।

अपने वैचारिक दिवालियापन से जनता का विश्वास खोते जा रहे हैं। जानबूझ कर यह भ्रम पाले हुए है कि तथ्यहीन निरर्थक वक्तव्य से जनता प्रभावित हो जायेगी, किन्तु उन्हें अपने मन से इस भ्रांति को निकाल देना चाहिये कि भारत की जनता मूर्ख है। उसके पास विकेक और सोचने की क्षमता नहीं है। जनता ने अच्छी तरह से उनकी नीयत को भांप लिया है।

आज पूरा देश नरेन्द्र मोदी के साथ खड़ा है। वे कितने ही चीखे-चिल्लायें, शोर मचायें। बेमतलब के झूठे आरोप लगाये, भारत की जनता उनकी बातों में आने वाली नहीं है। सूरज की रोशनी में सब कुछ साफ-साफ दिखार्इ दे रहा है। क्या सच है और क्या झूठ है। क्या गलत है और क्या सही है, इसका विश्लेषण करने की क्षमता भारत की जनता के पास है। मोदी जी , उनकी हरकतों से विचलित हुए बिना पूर्ण मनायोग से देश के भविष्य की इबारत लिख रहे हैं। वे अपनी मालकिन के स्तुतिगान और उनकी आज्ञा को शिरोधार्य करने में लगे हैं। मोदी जी को भारत की जनता को दिये गये वादों को पूरा करना है और उन्हें मालकिन के निर्दशों के अनुसार नौटंकिया करनी है। मोदी जी का एक एक पल कीमती है, उनका हर एक पल फालतू हैं।

मोदी जी दिन रात देश सेवा में लगे हुए हैं और वे बैगारी में अपनी मालकिन की खिदमत में कसीदे पढ़ने में मशगूल हैं। उनका प्रत्येक दिन देश की जनता के लिए योजनाएं बनाने से प्रारम्भ होता है और समस्याओं पर निज़ात कैसे पाये, इस चिंतन के साथ समाप्त होता है। उनका प्रतिदिन मालकिन की आज्ञा से अपने विरोधियों की गलतियां ढूंढ़ने से प्रारम्भ होता है और दिन का अंत विरोधियों पर झूठे आरोप लगा कर होता हैं। ऐसा इसलिए करना जरुरी हैं, क्योंकि मालिकन का आदेश हैं- उनकी गलतियां ढूंढ़ो और आक्रामक प्रहार करते रहों। चाहे झूठ बोलों, मनगढंत तथ्य लाओं पर निरन्तर सक्रिय रहो।

उनके घोटालों पर से पर्दे उठ रहे हैं। जनता के सामने नंगे हो गये, फिर भी शर्म नहीं। शिथिल न्याय प्रक्रिया में थोड़ी गति आ जाय ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो जाय। वे आजकल उन घोटालों का जिक्र कर रहे हैं, जो हुए ही नहीं। जब उनके द्वारा घोषित एक घोटाला झूठा साबित होता है, तब दूसरे घोटाले की कथा सुनाने लगते हैं। टीवी चेनल भी बे सिर पेर की बातों को नमक मिर्च लगा कर उछालते रहते हैं। इन टीवी चेनलों की करतूतों की जांच करना चाहिये कि ये ऐसा क्यों करते हैं ? उन्हें एक चुनी हुर्इ सरकार का इस तरह विरोध करने का आखिर क्या प्रयोजन है ? वे उस पार्टी के नेताओं को क्यों इतना महत्व देते हैं, जो जमीन से जुड़े हुए नहीं है ? जिनकी पार्टी जनाधार खो चुकी है ?

मोदी जी विदेश यात्राएं जो देश के लिए की गर्इ है, उन पर उन्हें बहुत एतराज है। जबकि प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा के एक एक पल का हिसाब देश को दे दिया जाता है। परन्तु महाराजा कुमार अठावन दिन विदेश में रह कर लौटे थे। इसके बाद अठावन दिन देश में रुके नहीं और फिर विदेश क्यों भाग गये, इसका हिसाब देश से क्यों छुपाया जाता है ? क्या वे भारत अपने विरोधियों को गालियां देने आते हैं और गालियां दे कर फिर विदेश भाग जाते हैं ? जनता यह भी सवाल पूछना चाहती है कि आपके महाराज कुमार की मातृभूमि भारत है या कोर्इ अन्य देश ? क्या बार-बार भारत इसलिए आते हैं, ताकि किसी भी तरह इस देश पर फिर आधिपत्य जमा लिया जाय ?

अब उनको कौन समझाए कि जिस व्यक्ति का देश में मन लगता ही नहीं, बार-बार विदेश भाग जाता है। जो एक वर्ष में आधे से अधिक समय विदेश में रहता है, ऐसे बिगड़े नवाब पर जिम्मेदारी डालने से आखिर कांग्रेसी क्या पा लेंगे ? सभी जगह तो पार्टी का बंठा ढार हो ही चुका है। अब पार्टी को पूरी तरह मिटाने की ही ठान ली है तो कौन रोक सकता है ? अपने मालिकों की आज्ञा से रोज नये-नये शगूफे छोड़ने से न तो पार्टी मजबूत होगी और न ही प्रतिद्वंद्वी पार्टी कमज़ोर होगी। हां, पार्टी जनता का विश्वास पूरी तरह खो देगी।

परन्तु कांग्रेसी देश की धड़कन को सुनने वाले नहीं है। उनकी महारानी और महाराज कुमार, जिनकी देश भक्ति संदेह के घेरे में हैं, जिनका देश में मन नहीं लगता। जो देश की गरीबी और पिछड़ेपन को ले कर चिंतित नहीं है। दस वर्षों तक जिन्होंने सत्ता का खुल कर प्रयोग अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए किया। देश को आर्थिक दृष्टि से कंगाल कर दिया। ऐसी शख्सियतों के भीतर कांग्रेसी देवत्व ढूंढ रहे है। देश हित में ऐसे तत्व फिर देश की राजनीति में प्रभावी नहीं हो जाय, उन्हें रोकना हमारा नैतिक दायित्व हैं, क्योंकि जब तक भारत कांग्रेस मुक्त नहीं हो जाता, उसकी प्रगति में अवरोध आते रहेंगे। करोड़ो लोग की बेहतरी के लिए जो भी योजनाएं बनार्इ जायेगी उसके आगे ये अवरोध खड़े करते रहेंगे

लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष का फैंसला जनता करती है, कोर्इ व्यक्ति विशेष नहीं। जनता जिन्हें जनादेश देती है, उनके प्रति व्यक्तिगत द्वेष भाव रख कर उनकी नीतियों विरोध करना, जनादेश का अपमान करना है। जनता ने जिन्हें दस वर्ष तक सत्ता सौंपी वे अपना दायित्व सही ढंग से नहीं निभा पाये, इसीलिए उन्हें सत्ता से हटाया है। यदि विपक्ष में रह कर भी जो अपना दायित्व सही ढंग से नहीं निभा पाये, तो जनता उन्हें फिर सत्ता में बिठाने की गलती नहीं करेगी। हां, जनता विपक्ष में बैठने का भी अधिकार छीन कर उन्हें राजनीति से भी बाहर कर देगी।

यह देश का सौभाग्य ही है कि उसे एक परिवार की दासता से मुक्ति मिल गर्इ। पर यह परिवार अब भी सियासी षड़यंत्राके के जरिये सत्ता में वापसी चाहता है। यदि भारत की जनता आने वाले चुनावों में उन सभी पार्टियों को ठुकरा देगी, जो परिवार पार्टी के अलोकतंत्री कार्यों में सहयोग कर रहे हैं, तो निश्चित रुप से भारतीय लोकतंत्र जीत जायेगा एक भ्रष्ट, अलोकतंत्री और भारत विरोधी परिवार हार जायेगा।

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