आज ही के दिन। 1947 में ।।

दो महिमामण्डित महान* राजनेताओ ने अखण्ड भारत राष्ट्र का बंटवारा कर, अपने-अपने हिसाब-किताब से सत्ता-संपत्ति पर अपना अधिपत्य जमाया था। वो भी “धार्मिक आधार” पर “अपना-अपना हिस्सा” ले कर?
और
“भारत का अगर बँटवारा हुआ, तो ये मेरी लाश पर होगा”।
ये वचन देने वाला उनका विदूषक, उत्तम बुद्धिजीव गुरु। पुरे भारत राष्ट्र के विश्वास की ठगी करके, अपने दोनों परम् प्रिय शिष्यों को, सत्ता-संपत्ति, शक्ति का स्वामित्व अधिकारी बनते देख “मौन” हो चुपचाप, ये वीभत्स अनर्थ होने दिया।? सम्पूर्ण इतिहास, गौरव, सामर्थ्य, साम्प्रदायिक-समन्वय को कलंकित, दूषित होने दिया। अपने आँख, मुँह, कान बन्द किये। बुरे से बुरा/ सबसे बुरा होने दिया ।।।

जय हिन्द, वंदे मातरम्। 🇪🇬

(सरल)

Nityanand Sharma's photo.
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