भारत का नेहरु गांधी परिवार सियासी षड़ंयत्रों के जरिये किसी अन्य व्यक्ति को सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने नहीं देता और कोर्इ व्यक्ति यदि षड़यंत्रों को निष्फल कर पहुंच जाता है, तब उसे किस न किसी तरह फिर हटाने के लिए परिवार की सक्रियता बढ़ जाती है।.

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भारत का नेहरु गांधी परिवार सियासी षड़ंयत्रों के जरिये किसी अन्य व्यक्ति को सत्ता के शीर्ष पर पहुंचने नहीं देता और कोर्इ व्यक्ति यदि षड़यंत्रों को निष्फल कर पहुंच जाता है, तब उसे किस न किसी तरह फिर हटाने के लिए परिवार की सक्रियता बढ़ जाती है। दरअसल यह परिवार लोकतांत्रिक भारत को अपनी जागीरी समझता है और भारतीय जनता को अपनी गुलाम। शायद उनका यह भ्रम है कि भारत के नागरिक इतने भोले हैं कि उन्हें इतिहास की कोई जानकारी नहीं है। उन्हें जैसा समझाया जाता है, वे मान लेते हैं और उनके सारे गुनाहों को माफ कर पुरखों के नाम पर वोट दे देते हैं। पर अब ऐसा होने वाला नहीं है। भारत के नागरिक यह समझ गये हैं कि इस देश की बर्बादी और दुर्दशा का मूल कारण नेहरु परिवार हैं, जिसने हमें दिया कम छीना ज्यादा है। आज हमारी जो दयनीय हालत है, उसका जिम्मेदार यह परिवार ही है।

यदि भारत पर पंडित नेहरु का साया नहीं पड़ता तो यह देश विभाजित नहीं होता। ब्रिटिश साम्राज्य ने गंगा जमुनी तहजीब को रौंद कर हमे छल से बांटा, उस कुटिल चाल की सफलता में नेहरु अंग्रेज़ो के मुख्य मददगार थे। अंग्रेजों ने जिन्ना को अपना मोहरा और नेहरु को सहयोगी बनाया था। लाखों बेगुनाहों की हत्या और करोड़ो नागरिकों की तबाही के बाद भी विभाजन की पीड़ा का दंश इस महाद्वीप के करोड़ो नागरिकों को आज भी झेलना पड़ रहा है। हमारी गरीबी, पिछड़ापन का मूल कारण राष्ट्र विभाजन ही है, क्योंकि प्रति वर्ष दोनों देशो को गरीब नागरिकों का पेट काट कर खरबों रुपया रक्षा बजट पर खर्च करना पड़ता है। जबकि नागरिकों के स्वास्थय, शिक्षा और उनकी मूलभूत जरुरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन नहीं जुटा पाते हैं।

पाकिस्तान को 48 करोड रुपये की सहायता देने के लिए गांधी के हट का पटेल ने विरोध किया था और नेहरु ने समर्थन किया था। धन पा कर पाकिस्तान के कबाईलियों ने कश्मीर पर आक्रमण किया। हमारी सेनाओं ने उन्हें खदेड़ दिया, किन्तु पंडि़त जी ने युद्ध विराम करवा कर आधा कश्मीर पाकिस्तान को दे दिया। पाकिस्तान तब से पूरा कश्मीर मांग रहा है। अब तक वह इसके लिए तीन युद्ध लड़ चुका है। पिछले बीस वर्षों से न कभी खत्म होने वाला अघोषित आतंकी युद्ध लड़ रहा है। निकट भविष्य में कश्मीर समस्या का कोई हल निकलने वाला नहीं है। पाकिस्तान आतंक को फैलाने में और हम इसे रोकने में अपनी ताकत व धन खर्च करते रहेंगे और हमेशा पंडि़त जी को याद करते रहेंगे।

पंडि़त जी की अदूरदर्शी नीति से चीन हमारी हजारों एकड़ जमीन हड्डप गया और हमारी छाती पर आ कर बैठ गया। चीन आज भी यदकदा हमे धमकाता रहता है। चीन के हाथों हुई अपमानजक पराजय का बदला हम कभी नहीं ले पायें और न ही पाकिस्तान और चीन की जुगलबंदी को रोक पाये हैं। पंडि़त नेहरु की मिश्रित अर्थव्यवस्था और लाइसेंस परमिट राज ने भ्रष्टाचार को खूब पनपाया। राजनीति में भ्रष्ट तत्वों का प्रवेश पंडि़त जी के युग में हो गया था। आज भ्रष्ट व्यवस्था का जो हम विशाल वटवृक्ष देख रहे रहे हैं, उसका बिजारोहण पंडि़त जी ने ही किया था।

लालबहादूर शास्त्री के अल्प युग के बाद फिर नेहरु परिवार का युग आ गया। नेहरु की वारिस श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपनी निरंकुश व अभिामनी तेवर से कांग्रेस पार्टी को क्षत-विक्षत कर दिया। इंदिरा जी ने शक्तियों के केन्द्रीयकरण में विशेष ध्यान दिया और देश की ज्वलंत समस्याओं को सुलझाने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई। इस युग में भ्रष्टाचार खूब पनपा। कांग्रेस पार्टी चाटुकारों की पार्टी बन कर रह गयी। गरीबी बहुत बढ़ गयी और अंततः इंदिरा गांधी को चुनाव जीतने के लिए गरीबी हटाओं का नारा देना पड़ा।

हमारी सेनाओं के अदम्य शौर्य के कारण 19971 के भारत पाक युद्ध में पाकिस्तान घुटनों के बीच चलने लगा। उसकी सारी हैकड़ी काफूर हो गयी, किन्तु इंदिरा गांधी ने शिमला समझौता कर पाकिस्तान को फिर तन खड़ा कर दिया। जैसे ही वह सीधा खड़ा हुआ तब से आज तक वह हमे आंखें दिखा रहा है।

इंदिरा युग के भ्रष्टाचार और गरीबी के विरुद्ध जनजागृति के लिए वयोवृद्ध नेता जयप्रकाश नारायण को जन आंदोलन छेड़ना पड़ा। अपने विरुद्ध उबले प्रबल जन असंतोष से घबरा कर इंदिरा गांधी ने नाजियों की तर्ज पर 26 जून 1975 को आपातकाल लगा कर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कुचल दिया। 1977 के चुनावों में इंदिरा जी की पराजय हुई। परन्तु जनता पार्टी की कलह के कारण 1980 में वे फिर सत्ता में आ गयी। सत्ता में आने के बाद वे अपने आपको बहुत असुरक्षित मानने लगी। अपने आपको मजबूत करने के लिए पंजाब में हिन्दू कार्ड खेला। सिखों और हिन्दुओं को आपस में बांटने का घृणित खेल खेला, जिसकी अंतिम परिणित ब्लयू स्टार आॅपरेशन के रुप में हुई। स्वर्ण मंदिर ध्वस्त हो गया। सिख आहत हुऐ। इसी घटनाक्रम से उन्हें अपने प्राणों से हाथ धोना पड़ा।

राजीव गांधी का सता अवरोहरण सिखों के कत्लेआम से हुआ। उनकी एतिहासिक जीत पांच साल बाद भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी। विदेशी हथियारों के सौदागर और दलालों के प्रधानमंत्री आवास में स्वच्छन्द प्रवेश ने भ्रष्टाचार को नये आयाम दिये। राम जन्म भूमि के ताले खुलवाकर राजीव ने एक ठंड़ी आग को जानबूझ कर प्रज्जवलित किया। बाद में जो कुछ हुआ, वह इतिहास बन गया, किन्तु जिसने इस खेल को आरम्भ किया, वे अपनी संदीग्ध भूमिका के अपराध से पीछे नहीं हट सकते। राजीव देश को जोड़ने के लिए शहीद नहीं हुए, वरन तमिलों के संहार के लिए उन्होंने श्री लंका मे सेना भेजी थी, उस गलत निर्णय के कारण उन्हें अपने जीवन की कीमत चुकानी पड़ी थी।

एक लम्बे अंतराल के बाद 2004 में श्रीमती सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री पद का अवमूल्यन कर इस पद की सारी शक्तियां छीन लीं। 1975 के बाद भारत के संविधान की गरिमा को नष्ट करने का दूसरा प्रयास सफल रहा था, पर इस प्रयास से देश कंगाल हो गया। संवैधानिक संस्थाओं के पद पर बैठे देशभक्त लोकसेवकों ने बेलगाम निर्लज्ज लूट के जो तथ्य राष्ट्र के सामने रखें, तब पूरा देश भौचंका रह गया। विपक्ष और न्यायपालिका के कडे रुख के बाद भी अभिमानी महिला निःशब्द रही और अपने दरबारियों से शौर मचवाती रही। पाकृतिक संसाधनों की लूट वृहद आकार की है। सम्भवतः ढाई सौ वर्षों के अंग्रेजी शासन से भी बड़ी। इस लूट का पूरा सच तभी सामने आ पायेगा, जब कोई सशक्त सरकार केन्द्र में आरुढ होगीं। विदेशी आक्रांता तो भारत के कुछ भाग में लूटपाट कर के चले जाते थें, परन्तु ये लुटेरे देश की शासन व्यवस्था को नियंत्रित करने के बाद लूट मचाते रहें और बड़ी ही बेशर्मी से फिर सरकार बनाने का जनादेश मांग रहें हैं, ताकि लूट का क्रम जारी रख सकें।

भारत राष्ट्र के लिए नेहरु गांधी परिवार की छाया एक अभिशाप ही साबित हुई है। अनेकों बार भारत की जनता ने इस परिवार को सत्ता से बाहर किया है, किन्तु हमारी दुर्बलताओं का लाभ उठा कर फिर सत्ता में आता रहा। सन 2014 के लोकसभा चुनाव परिणाम से इस परिवार को गहरा धक्का लगा है, किन्तु परिणामों की परवाह किये बिना इन्हें इस बात का दम्भ है कि हम किसी को भी भारत पर शासन करने नहीं देंगे। सियासी षड़यंत्रों के जरिये हम फिर सत्ता छीन लेंगे, क्योंकि भारत राष्ट्र हमारी विरासत हैं। हम चाहें कैसे भी हों, हमने चाहे इस मुल्क को बर्बाद कर दिया हों, पर भारत पर शासन का अधिकार हम छोड़ेंगे नहीं

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