पापी पटका सवाल है जो  अपना ईमान भी बेच देता है.……  [जैसे की अरुण शौरी ]
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अरुण शौरी इतने लालची ? जो खुद्की सेवा करनेके निकला है या देश की ? जो इंसान ऑंखे बांध करके बोलता है क्या इतना अंधा हो गया है सत्ताके लिए
उसकी सत्तामे भाग बटाई मांगता है ,खुदके स्वार्थ के लिए अंधा और पागल हो गया है ,क्या उसको कोई अछि चीज दिखती ही नहीं ? हे राम क्या करे इस
पापी पेटके लिए ,सत्य को भी जूठ बताने निकले है ,इस पापी पटका सवाल है जो अपने ईमान को भी बेच देता है
===प्रहलादभाई प्रजापति

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