जातिवादी राज नीति  से देश टूटता है
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मायावटी  को खाने पिने में और जिनेमे भी चाहिए आरक्षण
फिर पहनावेमे जूते कपड़ेमे और रहन सहन में भी चाहिए आरक्षण
आगे जाके चलने बैठनेमे और बोलनेमे भी चाहिए आरक्षण
उसने कितना दिया है लाभ दलितोको की अभी तक सभी गरीब है
क्या सभी लाभ वो खुद ही खा बैठी है जो इतने बड़े  बड़े बोल बोल रही है
जातिका नाम और खड्का काम ,ये देश को लूट रही है दलितोके नाम पर
उसकी कितनी संम्पत्ति है ,कितने बंगले है कितनी जेवरात है  कितनी
मिलकते है कितनी उसकी फिक्स डिपॉज़िट है कितनी केश है उसके और उसके
रिस्तेदारोंके नाम पर कभी क्यों ब्योरा नहीं देती ,छुपाई हुई कितनी संपत्ति है
ये  देश को तोड़नेका काम कर रही है  द्रोही है और जयचंद है
==प्रहलादभाई प्रजापति

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