मैकोले का पत्र
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भारत के कोने कोने मे घूमा हूँ मुझे एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं दिखाई दिया जो भिखारी हो चोर हो !इस देश में मैंने इतनी धन दोलत देखी है इतने ऊंचे चारित्रिक आदर्श गुणवान मनुष्य देखे हैं की मैं नहीं समझता हम इस देश को जीत पाएंगे , जब तक इसकी रीड की हड्डी को नहीं तोड़ देते !
जो है इसकी आध्यात्मिक संस्कृति और इसकी विरासत !

अपना देश सोनेकी चिडिया थि तभी तो ये सब लुटेरे आए थे और लूट लूट के ले गए अभी भी वक्त है उसको बचानेका नहेरु खानदान , जयचंदोसे और ये लुटेरी खोंग्रेस से देश को बचाइए जो लोग सेक्युलर होने का ढोंग करते है वाही तो लुटेरे गद्दार और जयचन्द है

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