ले डूबी कलाकी सोच को सदमेकी सुनामी

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दिल जल रा है देश की दर्दनाक कहनियोसे
कही दादरी है तो कही कैराना की जुल्म खोरी

केरल यूपी बंगाल को एक नया कश्मीरी पहनावा
कविताए कैसे लिखू कलमकी शाहीमें अंगारकी बदबू

जलनकी आगमे कलाकी आहुति
जीवनी यज्ञ कुंडमें आतंकी दानवी बमबारी

ले डूबी कलाकी सोच को सदमेकी सुनामी
लगी बिमारी धर्मके नाम की दुहाई करे जुदाई

कई कलऐ डूबी अपने आपको सवारनेमें खुद्दारी गई भाडमे
जिसका जो होना वे हो सरस्वती को बेचे सत्ताकी चापलुसिमे
==प्रहलदभै प्रजापति
16/६/२०१६ , सीएटल वॉशिंगटन यु ऐसे ऐ ]

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