रिस्तो की तोड़ जोड़
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माँ की दुआ में ससुराल की याद
नदिया में दोनों किनारे बाढ़
रेल चलाने दो पटरी की मांग
फिर भी कही ज्यादा कही काम

एक जन्म का दूसरा शादीका अवाज
माँ को सवारनेमे दुसरा रहे नाराज
यही जीवनिमे गाज सहते रहे जनाब
कही धुप कही छाँव के जपे आलाप

कुछ ही नहीं छूटता यहाँ जो किया लिबास
मिलता लौटके आखिरी वक्त होके विलाप
बेटा बेटी निभाए किरदार ये जन्म के तास
एक पहिएकि गाडी टिकती खुल्ला आकाश ?
===प्रहलदभाई प्रजापति
१७/७/२०१६ किर्कलेंड वॉशिंगटन यु ऐसे ऐ

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