नहेरु घराना [ यानी मुगल घराना ] हिन्दुओ का और हिन्दू धर्म का पक्का दुश्मन उसका पक्का प्रमाण
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किसी बुजुर्ग कांग्रेसी को इमरजैसी की बात क्यों नहीं पच रही ? कारण यह है कि वो साजिश आज भी लागू बनी हुई है! हां चौदह सुत्री कार्यक्रम मे सबसे लंबा निशाना नसबंदी वाला लगाया था इन्दिरा गांधी ने ! देखने में तो सीधा है पर दूरगामी परीणाम बड़ा घातक होने वाला है !
कहते है उस समय केवल पुरूष नसबंदी की तकनीक विकसित थी तो एक सरकारी कर्मचारी को आठ सिविल हिन्दु की नसबंदी करानी कंम्पलसरी थी !
अब सोच लो भाईयों कैसा प्लान बनाया था कि बस किसी की जरूरत नही !
जयपुर के भूतपूर्व राजघराने की राजमाता ने भांप लिया था कि कुछ बुरा हो रहा है तो बस महारानी गायत्री देवी को इंदिरा गांधी का विरोध करने पर जेल जाना पड़ा था।

दरअसल 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का महारानी गायत्री देवी ने विरोध किया था। इसके बाद इंदिरा ने आयकर विभाग से राजघराने की आय और संपत्ति की जांच का आदेश दिया था। सेना की मदद से आयकर विभाग ने राजस्थान में उनके पैलेस में खुदाई की ताकि छुपा खजाना मिल जाए। तीन महीने बाद ये कार्य रोका गया। इसके लिए गायत्री देवी को तिहाड़ जेल भी जाना पड़ा था उस नैतिक विरोध की वजह से ! वे करीब 6 महीन जेल में रही थीं। इस बात का जिक्र गायत्री देवी ने अपनी आत्मकथा “अ प्रिंसेस रिमेंबर्स’ में किया था।
इस घटना को उस वक्त नैशनल ही नहीं इंटरनैशनल मीडिया ने भी कवर किया था।

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इंदिरा गांधी और महारानी गायत्री देवी बचपन में एक ही स्कूल में पढ़ीं थीं और वे दोनों कुछ वक्त के लिए रविंद्र नाथ टैगोर के पथा भवन की स्टूडेंट भी रहीं। गायत्री देवी की शादी जयपुर के महाराजा सवाई मानसिंह (द्वितीय) से हुआ। वे मानसिंह की तीसरी पत्नी थीं। महारानी गायत्री देवी को बाद में राजमाता की उपाधि दी गई।

अलग था गायत्री देवी का लाइफस्टाइल
-उनके शौक लड़कों की तरह थे। गायत्री देवी को कार चलाने का बड़ा शौक था। वे उस जमाने मे वैग मैगेजिन के अनुसार दुनीयां की दस खुबसुरत महिलाऔ मे सुमार थी !

-उनका ड्रैसिंग सैंस सबसे अलग और खास था। शिकार की शौकीन गायत्री देवी को इसके अलावा पोलो, बैडमिंटन, टेबल टेनिस आदि खेलों में भी विशेष रूचि थी।

-फैशनेबल बेलबॉट्म्स, फ्रेंच शिफॉन की साड़ी गायत्री ने फैशन और ट्रैंड बनाया, साथ ही गायत्री देवी स्लैक्स पहनकर घुड़सवारी करती थीं।

1962 में वे जयपुर लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में उतरीं और कुल दो लाख 46 हजार 516 वोटों में से एक लाख 92 हजार 909 वोट हासिल कर एक रिकॉर्ड कायम किया। गायत्री देवी का जयपुर में 29 जुलाई 2009 को जयपुर में निधन हुआ !

उन्होंने वो खतरा भांप लिया था जो आज आंकड़ो से पता चल जाता है ! हम उनको कदापि नहीं भुलें यही सच्ची श्रधांजली होगी !
साभार: प्रताप सिंह

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