हिन्दू धर्म में सवर्ण-दलित में भेदभाव एक षड्यंत्र है, अपनी संस्कृति को समझे और इस षड्यंत्र से बचे

 August 1, 2016 News Team  0 Comment प्रखर हिन्दू, वेद क्या कहते हैं शूद्रों के बारे में, सवर्ण-दलित में भेदभाव एक षड्यंत्र

प्रखर हिन्दू : दोस्तों आप सभी जानते हैं की भारत की प्राचीन सामाजिक व्यवस्था कर्मो पर ही आधारित थी (वेद क्या कहते हैं शूद्रों के बारे में —-
शूद्रो ब्राह्मणतामेति ब्राह्मणश्चैति शूद्रताम्।
क्षत्रियाज्जातमेवं तु विद्या द्वैश्यात्तथैव च।—-
अर्थात श्रेष्ठ -अश्रेष्ठ कर्मो के अनुसार शूद्र ब्राह्मण और ब्राह्मण शूद्र हो जाता है। जो ब्राह्मण ,क्षत्रिय वैश्य और शूद्र के गुणों वाला हो वह उसी वर्ण का हो जाता है।) और सनातन धर्म को कमजोर करने के उदेश्य से ही मुगलों ने हिन्दू लोगो को आपस में तोडना सुरु कर दिया था याद रहे दलित एक योधा जाती थी जिसने मुगलों को भारत में परवेश करने के लिए बहुत टक्कर दी थ,आज भी इसी प्रकार हिन्दू एकता को देख बहुत से राजनितिक दल डर चुके हैं और अब वह हिन्दू वोट को तोड़ने के लिए उन्हें आपस में जाती के नाम पर लडवाना सुरु कर दिए हैं भाइयो हमें इस षड्यंत्र को समझना होगा और जो भी लोग सवर्ण एवं दलित समुदाय में भेदभाव पैदा कर रहे हैं उनसे सावधान रहना होगा ।

आज कल सवर्ण एवं दलित समुदाय कुछ लोग रामचरितमानस की किसी चौपाई का गलत अर्थ,या किसी वेद,पुराण के श्लोक का गलत अर्थ निकाल कर हिंदुओं को आपस में लड़ा रहे हैं, ये सब ये दिखाने में लगें हैं की पूर्व के युगों में दलितों के साथ कैसा व्यवहार होता था जबकि उसी युग में एक मछुआरन की संतान वेदव्यास ने महाभारत लिखी थी, और त्रेता युग में दलित वाल्मीकि ने रामायण लिखी थी।

हिडम्बा 1 दलित थी आज उसी हिडम्बा के पोते खांटू श्याम को भगवान की तरह पूजा जाता है । श्री राम जी ने एक दलित के झूटे बैर खायें थे, प्रभु श्री राम जी ने एक दलित को गले लगाया था ।

ध्यान रहें…
न्याय – अन्याय हर युग में होते हैं और होते रहेंगे, अहंकार भी टकराएंगे… कभी इनका तो कभी उनका ,यह घटनायें दुर्भाग्यपूर्ण होती हैं पर उससे भी दुर्भाग्यपूर्ण होता है इनको जातिगत रंग देकर उस पर विभाजन की राजनीति करके राष्ट्र को कमजोर करना।
यदि किसी ने भीमराव अंबेड़कर का अपमान किया तो किसी सवर्ण ने ही उनको पढाया भी । किसी एक घटना को अपने स्वार्थ के लिए बार -बार उछालना और बाकी घटनाओ पर मिट्टी डालना कौन सा चिंतन है, यह दलित चिंतन नहीं बल्कि विश्व में अल्पसंख्यक हिन्दू समाज को खत्म करने के अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र के तहत केवल विधर्म प्रेरित राष्ट्रद्रोहियों द्वारा थोपा हुआ दोगला चिंतन है। क्योंकि सदियों की गुलामी अत्याचार के बाद भी हिन्दू न मिट पाए न धर्मांतरित हो पाए।अतः इससे बच कर दलित-सवर्ण (हिन्दुओं) में षड्यंत्रकारियों द्वारा उपजाए जा रहे भेदभाव को नष्ट करके हिन्दू धर्म की महानता की रक्षा करने का प्रण करें और एक बने रहें। इसलिए भईया सब हिंदु भाई सावधान हो जाओं वरना पक्षताने के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा।

आप सभी से निवेदन है की राजनितिक पार्टियों व स्वार्थी व्यक्तियों के बहकावे में न आएं हिंदुत्व को एकजुट करें

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