न खादी गांधी के बाप की थी … न चरखे का आविष्कार गांधी ने किया !
कांग्रेस की नजरों से देखें तो, देश में सूरज की पहली किरण भी जवाहर लाल लेके आए थे, वरना उससे पहले पूरा हिन्दुस्तान अँधेरे में चमगादड़ों की तरह जीता था |
पर सच्चाई यह है कि भारत सूती कपडे का निर्यात तब से करता आ रहा है जब अरबी भेड़ें ऊँट की लीद उठाना भी नहीं जानती थीं और यूरोप जानवरों की भांति जीता था |
कांग्रेस ने गांधी को खादी कैलेंडर से निकाल बाहर फेंका था सन 1996, 2003,2005, 2008,2011, 2013 के खादी कैलेंडर से , तब विचारधारा घास करने चली गयी थी ।

60 साल के कांग्रेस राज में खादी विभाग कई करोड़ों रूपये के वार्षिक घाटे से 2015 से आज 34 % मुनाफे में चल रहा है, मोदी जी ने हमेशा खादी के कपड़े पहने और 2014 से खादी बुनकरों के खादी उद्योग प्रोत्साहन से ही खादी आज तरक्की पर है और खादी विभाग ने अपने माइ बाप की फोटो डाली तो क्या बुरी बात है भाई ।

गांधी ने तो कभी खादी नही पहनी, नग्न शरीर घुमते रहे ।

तुमने कितना गांधी विचार धारा का पालन किया, क्या कभी सच बोला, क्या कभी राम का नाम लिया, क्या हमेशा अहिंसा का पालन किया ??

ढोंगी पाखंडियों को ऐसे राष्ट्रीयता के मुद्दे पर अपनी जबान बन्द रखनी चाहिए ।

इतिहास गवाह है कि किस प्रकार भारत के हथकरघा बस्त्र निर्माण को बर्बाद करके जबरदस्ती मशीन निर्मित कपड़ों को भारत में बेंचा गया | कारीगरों के हाथ काट दिए गए और जो बचे उन पर जबरदस्त टैक्स लगाकर उनको बाजार से बाहर कर दिया गया ..

इसलिए सूती वस्त्र किसी के ब्रांड या नाम का मोहताज नहीं है | सूती बस्त्र भारत की पहचान था , है और रहेगा …

पप्पू और पप्पू के चमचों ..पहले ऐ बतावो कि तुम गाँधी किस बात के हो ? हिम्मत है तो अपना असली नाम राहुल खान या राहुल गयासुद्दीन गाजी लिखकर चुनाव लड़ो |

सदी का सबसे बड़ा छल – गयासुद्दीन गाजी की औलादों को ब्राह्मण नेहरु के नाम से स्थापित करना

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