साठ सालके बाद चोरीका  पता चला जब चरखा के साथ बैठके पूछा
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डकैत लुटेरा गुसे  घरमे मुग़ल सालोसे राजा शाहीको भी की शर्मिदा
कैसे कैसे थोप दिए शर पर हवसखोरडकैत लुच्चे लफंगी बार बाला
साठ सालके बाद चोरीका  पता चला जब चरखा के साथ बैठके पूछा
सरनेम चुराके लगाके  देश को लुटा पता जब  चला साथ बैठके पूछा
खुद ही भारत रत्न ले लेते है दुसरोको हटाके तब कोई दर्द नहीं  होता
आवाज या आहट भी नहीं होती आधा  हिंदुस्तान अपनोके नाम होता
कातने बैठा दिलमे जलनसी हो गई की पेटेन्टका शील शिला लूट गया
नकली नामें देशकी आंखोमे धूल डालनेका तेरा जाने कारवाँ लूटगया
सियासत जूठको सत कहलानेकी आदतसे बर नहीं सेक्युलरी जमात
बर्बाद करनेकी ख्वाइश जमाती बनके चूहेकी फुकसे खानेकी आदत
डकैत लुटेरा गुसे  घरमे मुग़ल सालोसे राजा शाहीको भी की शर्मिदा
कैसे कैसे थोप दिए शर पर हवसखोरडकैत लुच्चे लफंगी बार बाला
===प्रहलादभाई प्रजापति
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