घर फूटे घर जाय
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हाँ हम लोग इतने मुर्ख , चाटुकार स्वार्थी है और जयचंद  के विदेशियो को अपने घरमे बसाके उनकी गुलामी करते है और अपने ही देश को लुटवाते है हम लोग अपना ईमान धर्म स्वाभिमान  और इज्जत खो बैठे है हमारे लहुमे गुलामीका नशा चढ़ गया है इन लोगोने बहुरूपी बनके नामके वास्ते हमारे धर्म नीति रीती रिवाज और रहन सहन ,और यहाँ तक की व्यवहार भी अपनाके हमारे घरको लुटा है ये हम लोग नहीं समझते है इसकी वजहसे हमारे बच्चे भूखे मरते है गुलामी करते है कई लोग भीख मागते है ,जब की उनके बच्चे ऐश ,ऐयाशी ,करते है और संपत्ति इकठ्ठी करके विदेशोमे घूमते है उनके खुदके प्लेन है ,जाहो जलाली है ,और सत्ता पे काभजा किये है जो हमको गुलाम बनाके अपनी मन मानी करते है
हमारे चंद लोगोका सहारा लेके हमको ही लूटते है
===प्रहलादभाई  प्रजापति

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