सच्चा इश्क कभी नहीं मरता
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परींदेने अपनी ओखातका जलवा दिखाया
खतरनाक  काली रातको अकेलेने डराया
हसींन चहेरेसे मोहोब्बतको बदनाम करते है
दिलकी साजिससे प्रेम की परिभाषा बदलते है
नादान लोग स्वछ सफ़ेद दूधमें दरार करते  है
सच्चा प्रेम अमर रहता  जुठे प्रेम सदा मरते है
हवस की ख्वाबमे अंधा हमेशा घर भूलता है
सच्चे प्रेमको सरहदे भी कभी रोक नहीं शक्ति
सिसोरी शक्ल लेके शिकारमे घूमती रहती है
एक नहीं तो दुसरा हमेशा घर बदलती रहती है
एक ही मिला है जो खुल्ला बदन की दूकान की है
नित नए दिवानेकी आड़मे इश्क को बदनाम करते है
===प्रहलादभाई प्रजापति
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