ये हैं श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में 15 बेहद अद्भुत तथ्य, शायद ही कोई हिन्दू जानता हो, जरूर शेयर करें…
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श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagavad Gita)  हिंदुओं का सबसे पवित्र ग्रंथ है, इस ग्रंथ में भगवान कृष्ण और उनके सखा के बीच महाभारत के युद्ध के समय का वार्तालाप है। यह वार्तालाप बहुत ही अनमोल और ज्ञान से प्रेरित है इसमें भगवान कृष्ण अपने सखा अर्जुन को कर्म, धर्म, सन्यास और बहुत से बिंदुओं पर ज्ञान देते हैं। गीता हिन्दुओं के सभी घर में होती है और हर कोई रोज उसका पाठ करता है 700 श्लोक में वर्णित यह ग्रंथ सभी का सार है। इस ग्रन्थ में जीवन का पूरा सार दिया गया है। आज हम आपको गीता के बारे में जानकारी देगे उम्मीद है आपके काम आए।
1. गीता महाभारत में छन्दों का सबसे महत्वपूर्ण संग्रह है।
2. पूरी दुनिया में हिंदू भगवद् गीता से परिचित हैं और हम सबने हमारी पीढ़ियों से इसकी महानता के बारे में सुना है।
3. गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा युद्ध और जीवन के अर्थ को समझाने के लिए अर्जुन को दिए गए उपदेश की एक श्रृंखला है।
4. यह पांडव राजकुमार अर्जुन और उसके सारथी बने भगवान श्री कृष्ण के बीच एक महाकाव्य संवाद है।
5. महाभारत इस बात की पुष्टि करता है कि भगवान कृष्ण ने 3137 ई.पू. कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था विशेष ज्योतिषीय संदर्भों के अनुसार, 35 साल की लड़ाई के बाद वर्ष 3102 ई.पू. में कलियुग की शुरुआत हुई।
६. भगवद् गीता में 18 अध्याय हैं जिसमे कुल 700 छंद हैं और यह तीन हिस्सों में विभाजित है जिसमे प्रत्येक हिस्से में 6-6 अध्याय हैं।
7. यह देखा जा सकता है कि नंबर अठारह महाभारत में कई जगह प्रयोग हुआ है नम्बर अठारह का मतलब संस्कृत में “जया” होता है जिसका शाब्दिक अर्थ बलिदान से हैं 18 त्योहार, गीता में 18 अध्याय अक्षौहिणी अथार्त 18 जरासंध का 18 बार आक्रमण और कहा जाता है कि पांडवों के पास 11 अक्षौहिणी सेना थी और कौरवों के पास 7 अक्षौहिणी तो कुल मिला कर हुई 18 इस प्रकार 18 अंक का महाभारत में बहुत महत्व है।