माँ बहन राष्ट्र की बोली चौराहे लगाई
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सनातनी राष्ट्रवादमे इतनी घुस गई है बदिया
ज्यादातर अपनी अपनी रोटियामें रखे इस्लामियां
कईयोने ज़ुन्ड बनाया डक़ैतोंका नाम दिया हिंदुस्तानी
भोले भाले लोगोको उलजाया दो वक्त की रोटीमे
उनका मूल अस्तित्वको भुलानेमे पीछे लगाईं गरिबीको
उनको क्या राम क्या रहीम भूख में मिलाई धर्मान्त्रीको
बहुमत की खेती नारिसे फल उगानेकी आश बढ़ाई
नार्यास्तु  हननते रमन्ते तंत्र देवता अनीति अपनाई
असुरोंका दल बनाके अबतो पूरी दुनियामे फैलाई
नीति मत्ताकी सिकुड़ती गलीमे छा गई हैवानी
एक ही मकसद  शाम दाम दंड भेदसे लूट मचाई
सत्ता पानेमें  माँ बहन राष्ट्र की बोली चौराहे लगाई
===प्रहलादभाई  प्रजापति
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