जानिए धारा 370 क्या है ये नेहरू का षडयंत्र है !
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आप देशवासियों के लिये अपना पूरा जीवन लगा देने वाले भाई राजीव दीक्षित जी द्वारा। ….
हिन्दू मान्यता और पुराणों के अनुसार कैलाश (कश्मीर ) और काशी ( बनारस )को भगवान शंकर का निवास माना जाता है . और इनको इतना पवित्र माना गया है कि कुछ फारसी के मुस्लिम शायरों ने भी कश्मीर और बनारस को धरती का स्वर्ग भी कह दिया है , यहाँ तक कि बनारस को भारत का दूसरा काबा भी बता दिया है , जैसा कि इन पंक्तियों में कहा गया है
“अगर फ़िरदौस बर रूए ज़मीनस्त – हमींनस्तो ,हमींनस्तो हमींनस्त “
अर्थ -यदि पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है , तो वह यहीं है यहीं है और यहीं पर है .
“ता अल्लाह बनारस चश्मे बद्दूर ,इबादत खानये नाकूसियानस्त ,
बर रूए ज़मीं फ़िरदौस मामूर , हमाना काबाये हिन्दोस्तानस्त “
अर्थ – अल्लाह बनारस को बुरी नजर से बचाये , जो शंख बजाने वाले (हिन्दुओं ) का पवित्र नगर है , और पृथ्वी पर स्वर्ग की तरह प्रकाशमान है , यहाँ तक कि हिंदुस्तान का काबा है .
इन पंक्तियों से हम समझ सकते हैं कि भारतीय लोगों के दिलों में कश्मीर और काशी के प्रति कितना लगाव है , लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि हमारी उदासीनता के कारण बनारस और नेहरू के कारण कश्मीर प्रदूषित हो गया है , प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इन दोनो की सफाई का बीड़ा उठा लिया है . यह हमारे लिए सौभाग्य और हर्ष का विषय है
आज एक बार फिर से राजनीति गलियारे में धारा 370 को लेकर बहस छिड़ गयी है। कोई इसके पक्ष में है तो किसी के पास इसका विरोध करने के पर्याप्त आधार है। किसी को लगता है कि संविधान की इस धारा में संशोधन होना चाहिए तो किसी को यह बहस का मुद्दा लगता है। लेकिन हम से काफी लोगों को पता ही नहीं कि धारा 370 है क्या जो समय-समय पर लोगों की बहस और विरोध का कारण बन जाती है जिसके चलते धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर को लेकर लोगों के बीच झगड़े होने लगते हैं। आईये आपको बताते हैं कि धारा 370 है क्या? जो देश के विशेष राज्य कश्मीर में लागू है।
1-कश्मीर का मतलब क्या है ?
जहाँ तक हम कश्मीर की बात करते हैं ,तो उसका तात्पर्य सम्पूर्ण कश्मीर होता है ,जिसमे कश्मीर घाटी , जम्मू , पाक अधिकृत कश्मीर का भाग ( ) चीन अधिकृत सियाचिन का हिस्सा और लद्दाख भी शामिल है . भले ही हम ऐसे कश्मीर को भारत का अटूट अंग कहते रहें लेकिन नेहरू के दवाब में बनायीं गई संविधान की धारा 370 के प्रावधान के अनुसार कोई भी समझदार व्यक्ति कश्मीर को भारत का अंग नहीं मान सकता , इसलिए जब जब धारा 370 को हटाने की बात की जाती है तो कांग्रेसी और सेकुलर इसके खिलाफ खड़े हो जाते हैं ,उदहारण के लिए जब 27 मई 2014 मंगलवार को मोदी सरकार के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने धारा 370 को देश की एकता और अखंडता के लिए हानिकरक बताया तो तुरंत ही शेख अब्दुल्लाह के नाती उमर अब्दुलाह इतने भड़क गए कि यहाँ तक कह दिया ” यातो धारा 370 रहेगी या कश्मीर रहेगा ” उमर के इस कथन का रहस्य समझने के लिए हमें नेहरू और शेख अब्दुलाह के रिश्तों के बारे में जानकारी लेना जरुरी है .
वास्तव में नेहरू न तो कश्मीरी पंडित था और न हिन्दू था , इसके प्रमाण इस बातसे मिलते हैं की कश्मीरी पंडितों ने नेहरू गोत्र नहीं मिलता . और नेहरू ने जीवन भर कभी कश्मीरी भाषा या संस्कृत का एक वाक्य नहीं बोला , नेहरू सिर्फ उर्दू और अंगरेजी बोलता था . और और उसके हिन्दू विरोधी होनेका कारण यह है कि नेहरू एक मुसलमान गाजीउद्दीन का वंशज था . और शेख अब्दुलाह मोतीलाल की एक मुस्लिम रखैल की औलाद था . अर्थात जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुलाह सौतेले भाई थे . इसी लिए जब संविधान में कश्मीर के बारे में लिखा जा रहा था तो नेहरू ने शेख अब्दुलाह को तत्कालीन कानून मंत्री बाबा साहब अम्बेडकर के पास भेजा था
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2-धारा 370 क्या है ?

धारा 370 भारतीय संविधान का एक विशेष अनुच्छेद (धारा) है जिसे अंग्रेजी में आर्टिकल 370 कहा जाता है। इस धारा के कारण ही जम्मू एवं कश्मीर राज्य को सम्पूर्ण भारत में अन्य राज्यों के मुकाबले विशेष अधिकार अथवा (विशेष दर्ज़ा) प्राप्त है। देश को आज़ादी मिलने के बाद से लेकर अब तक यह धारा भारतीय राजनीति में बहुत विवादित रही है। भारतीय जनता पार्टी एवं कई राष्ट्रवादी दल इसे जम्मू एवं कश्मीर में व्याप्त अलगाववाद के लिये जिम्मेदार मानते हैं तथा इसे समाप्त करने की माँग करते रहे हैं। भारतीय संविधान में अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबन्ध सम्बन्धी भाग 21 का अनुच्छेद 370 जवाहरलाल नेहरू के विशेष हस्तक्षेप से तैयार किया गया था। स्वतन्त्र भारत के लिये कश्मीर का मुद्दा आज तक समस्या बना हुआ है
3-कश्मीर के मामले में संविधान भी लाचार
जो लोग संविधान को सर्वोपरि बताते हैं , और बात बात पर संविधान की दुहाई देते रहते हैं , उन्हें पता होना चाहिए की उसी संविधान की धारा 370 ने कश्मीर के मामले में संविधान को लचार और बेसहाय बना दिया है , उदाहरण के लिए ,
धारा 370 के प्रावधानों के अनुसार, संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित क़ानून को लागू करवाने के लिये केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिये। इसी विशेष दर्ज़े के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्ख़ास्त करने का अधिकार नहीं है। 1976 का शहरी भूमि क़ानून जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता। इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि ख़रीदने का अधिकार है। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में ज़मीन नहीं ख़रीद सकते।
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावध

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