आज की मीडिया अगर अर्जुनके मत्स्य वेद के वक्त होती तो क्या होता
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अगर आजकी मीडिया उस वक्त होती तो अर्जुनको ऐसे ऐसे सवालोंके जेरेमी रखती और उसको अपने ध्यानसे ,अपने लक्ष्य दूर कर देती  जैसे की उसको बार बार नए नए सवाल करती रहती ,की अर्जुन आपके तराजू किसके और बने हुए है ,और किसने बनाये है ये तराजूका वजन कितना है
ये तराजू  क्या आपका वजन जेल पायेगा ,ये तराजू पानिमे क्यों रखे है ,अगर पानीमे रखे है तो
पानी हिलनसे उसके वेव से आपको मत्स्य कैसे दिखाई देगा ?  आप बिच पानिमे क्या तैर के जायेगे या कोई हादिका इस्तेमाल करेगे ? आप एक साथ दो तराजू पर अपने पेअर कैसे जमाएंगे ? फिर अपना धनुष्य को साथमे लेके जायेगे या कोली देने को आएगा ? धनुष्य के साथ
तीर होयेगे ?  या फिर उसको भी कोई देने को आएगा ? अगर नहीं तो अपने भाते के साथ साथ
धनुष्य को लेके आप तराजू पर कैसे सवार होंगे ? आपको मत्स्य करनेको कितना वक्त लगेगा ?
अगर मत्स्य वेध नहीं हुवा तो क्या आप अपनी हार कबूलेंगे ? अर्जुन को मत्स्य वेद करनेमे अड़ंगा डालके उसको मन भ्रमित करते और अर्जुनको असफल बना देते आजकी मीडिया का ये ही रोल है
समाजमे लोगोको कैसे भी घुमराह करनेका और लोगोका ध्यान भटकानेका किसी भी सफल
व्यक्तिको असफल करनेको और उनको निरुत्साह करनेका धंधा है लोगोको अपने मकसद से दूर हटानेका और अपनी रोटियां शेकनेका
===प्रहलादभाई प्रजापति
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