Archive for એપ્રિલ, 2017


एक अल्लाह की बात करने वाले मुसलमानो का इस्लाम खुद 73 टुकड़ो मे बंटा हुआ है ,जरूर पढ़ें ।

मुसलमानों की सामाजिक सरंचना धर्म और कुरआन के निर्देशों पर आधारित है, इस्लाम जाति व्यवस्था को स्वीकार नहीं करता और यह बतलाता है की जन्म, वंश और स्थान के आधार पर सभी मुसलमान बराबर हैं |

मुसलमानों में हिन्दुओ जैसी कोई जाति व्यवस्था नहीं है । पर यह एक सैद्धांतिक बात है | परन्तु जब हम मुसलमानों को व्यवहार की द्रष्टि से देखते हैं तो पता चलता है कि किसी न किसी रूप में मुस्लिम समाज में भी इस्लाम शिक्षा के विरुद्ध जाति व्यवस्था की जड़ें बहुत गहरे तक जाती हैं और सभी मुसलमान खुद को एक नहीं मानते हैं।

इस्लाम धर्म से संबद्ध विभिन्न वर्गों व समुदायों के उलेमाओं से अक्सर यह सुनने को मिलता है कि इस्लाम धर्म में विभिन्न आस्थाओं, विश्वासों व अंकीदों से जुड़े हुए 73 अलग-अलग वर्ग या फिरके हैं । मुसलमान होने के बावजूद इस प्रकार से वर्ग, समुदाय या फिरकों के रूप में इस्लाम धर्म को मानने वालों का विभिन्न वर्गों में विभाजित होना स्वयं अपने-आप में इस बात का प्रमाण है कि इन अलग-अलग वर्गों में कहीं न कहीं धार्मिक, ऐतिहासिक अथवा विश्वास संबंधी कोई न कोई मतभेद अवश्य है ।

केवल इतना ही नहीं, विवाह इत्यादि में भी ये एक-दूसरे से सम्बन्ध स्थापित करने में कुछ सामजिक और जातीय नियमों का अलग–अलग तरह से पालन करते हैं। कुछ ऐसा प्रतीत होता है कि भूगोलिक प्रजातीय, जनजातीय और राजनैतिक विभेदों के कारण मुस्लिम समाज में भी सामाजिक व्यवस्था अलग–अलग है। भारतीय मुसलमानों पर अरब/ तुर्की और फारस के मुसलमानों का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव दिखता है ।

परंतु इन सब मतभेदों के बावजूद सभी वर्ग बड़े ही गर्व के साथ स्वयं को मुसलमान व इस्लाम धर्म का मानने वाला कहते आ रहे हैं, एक निराकार अल्लाह पर सभी विश्वास करते हैं, हजरत मोहम्‍मद को लगभग सभी वर्गों के लोग अपना आंखिरी पैंगंबर या आंखिरी नबी मानते हैं और सभी अपने धर्मग्रंथ “कुरान शरीफ” को अल्लाह की पवित्र किताब के रूप में स्वीकार करते हैं।

इस तरह विश्व में इस्लाम के सभी अनुयायी ख़ुद को मुसलमान कहते हैं लेकिन इस्लामिक क़ानून (फ़िक़ह) और इस्लामिक इतिहास को अपनी-अपनी समझ के आधार पर कई पंथों में बंटे रखे हैं | बड़े पैमाने पर या संप्रदाय के आधार पर देखा जाए तो मुसलमानों को दो हिस्सों-सुन्नी और शिया में बांटा जा सकता है और शिया और सुन्नी भी कई फ़िरक़ों या पंथों में बंटे हुए हैं |

बात अगर शिया-सुन्नी की करें तो दोनों ही इस बात पर सहमत हैं कि अल्लाह एक है, मोहम्मद साहब उनके दूत हैं और क़ुरान आसमानी किताब यानी अल्लाह की भेजी हुई किताब है |लेकिन दोनों समुदाय में विश्वासों और पैग़म्बर मोहम्मद की मौत के बाद उनके उत्तराधिकारी के मुद्दे पर गंभीर मतभेद हैं | इन दोनों के इस्लामिक क़ानून भी अलग-अलग हैं

सुन्नी

सुन्नी या सुन्नत का मतलब उस तौर तरीक़े को अपनाना है जिस पर पैग़म्बर मोहम्मद (570-632 ईसवी) ने ख़ुद अमल किया हो और इसी हिसाब से वे सुन्नी कहलाते हैं | एक अनुमान के मुताबिक़, दुनिया के लगभग 80-85 प्रतिशत मुसलमान सुन्नी हैं जबकि 15 से 20 प्रतिशत के बीच शिया हैं

सुन्नी मुसलमानों का मानना है कि पैग़म्बर मोहम्मद के बाद उनके ससुर हज़रत अबु-बकर (632-634 ईसवी) मुसलमानों के नए नेता बने, जिन्हें ख़लीफ़ा कहा गया | इस तरह से अबु-बकर के बाद हज़रत उमर (634-644 ईसवी), हज़रत उस्मान (644-656 ईसवी) और हज़रत अली (656-661 ईसवी) मुसलमानों के नेता बने | इन चारों को ख़ुलफ़ा-ए-राशिदीन यानी सही दिशा में चलने वाला कहा जाता है | इसके बाद से जो लोग आए, वो राजनीतिक रूप से तो मुसलमानों के नेता कहलाए लेकिन धार्मिक एतबार से उनकी अहमियत कोई ख़ास नहीं थी

जहां तक इस्लामिक क़ानून की व्याख्या का सवाल है सुन्नी मुसलमान मुख्य रूप से चार समूह में बंटे हैं | हालांकि पांचवां समूह भी है जो इन चारों से ख़ुद को अलग कहता है

इन पांचों के विश्वास और आस्था में बहुत अंतर नहीं है, लेकिन इनका मानना है कि उनके इमाम या धार्मिक नेता ने इस्लाम की सही व्याख्या की है | दरअसल सुन्नी इस्लाम में इस्लामी क़ानून के चार प्रमुख आधार हैं

आठवीं और नवीं सदी में लगभग 150 साल के अंदर चार प्रमुख धार्मिक नेता पैदा हुए | उन्होंने इस्लामिक क़ानून की व्याख्या की और फिर आगे चलकर उनके मानने वाले उस फ़िरक़े के समर्थक बन गए

ये चार इमाम थे-

इमाम अबू हनीफ़ा (699-767 ईसवी)

इमाम शाफ़ई (767-820 ईसवी)

इमाम हंबल (780-855 ईसवी)

इमाम मालिक (711-795 ईसवी)

हनफ़ी

इमाम अबू हनीफ़ा के मानने वाले हनफ़ी कहलाते हैं | इस फ़िक़ह या इस्लामिक क़ानून के मानने वाले मुसलमान भी दो गुटों में बंटे हुए हैं | एक देवबंदी हैं तो दूसरे अपने आप को बरेलवी कहते हैं

देवबंदी और बरेलवी

दोनों ही नाम उत्तर प्रदेश के दो ज़िलों, देवबंद और बरेली के नाम पर है

दरअसल 20वीं सदी के शुरू में दो धार्मिक नेता मौलाना अशरफ़ अली थानवी (1863-1943) और अहमद रज़ा ख़ां बरेलवी (1856-1921) ने इस्लामिक क़ानून की अलग-अलग व्याख्या की |अशरफ़ अली थानवी का संबंध दारुल-उलूम देवबंद मदरसा से था, जबकि आला हज़रत अहमद रज़ा ख़ां बरेलवी का संबंध बरेली से था

मौलाना अब्दुल रशीद गंगोही और मौलाना क़ासिम ननोतवी ने 1866 में देवबंद मदरसे की बुनियाद रखी थी | देवबंदी विचारधारा को परवान चढ़ाने में मौलाना अब्दुल रशीद गंगोही, मौलाना क़ासिम ननोतवी और मौलाना अशरफ़ अली थानवी की अहम भूमिका रही है | उपमहाद्वीप यानी भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफ़ग़ानिस्तान में रहने वाले अधिकांश मुसलमानों का संबंध इन्हीं दो पंथों से है

देवबंदी और बरेलवी विचारधारा के मानने वालों का दावा है कि क़ुरान और हदीस ही उनकी शरियत का मूल स्रोत है लेकिन इस पर अमल करने के लिए इमाम का अनुसरण करना ज़रूरी है | इसलिए शरीयत के तमाम क़ानून इमाम अबू हनीफ़ा के फ़िक़ह के अनुसार हैं

वहीं बरेलवी विचारधारा के लोग आला हज़रत रज़ा ख़ान बरेलवी के बताए हुए तरीक़े को ज़्यादा सही मानते हैं | बरेली में आला हज़रत रज़ा ख़ान की मज़ार है जो बरेलवी विचारधारा के मानने वालों के लिए एक बड़ा केंद्र है

दोनों में कुछ ज़्यादा फ़र्क़ नहीं लेकिन कुछ चीज़ों में मतभेद हैं | जैसे बरेलवी इस बात को मानते हैं कि पैग़म्बर मोहम्मद सब कुछ जानते हैं, जो दिखता है वो भी और जो नहीं दिखता है वो भी | वह हर जगह मौजूद हैं और सब कुछ देख रहे हैं

वहीं देवबंदी इसमें विश्वास नहीं रखते | देवबंदी अल्लाह के बाद नबी को दूसरे स्थान पर रखते हैं लेकिन उन्हें इंसान मानते हैं | बरेलवी सूफ़ी इस्लाम के अनुयायी हैं और उनके यहां सूफ़ी मज़ारों को काफ़ी महत्व प्राप्त है जबकि देवबंदियों के पास इन मज़ारों की बहुत अहमियत नहीं है, बल्कि वो इसका विरोध करते हैं

मालिकी

इमाम अबू हनीफ़ा के बाद सुन्नियों के दूसरे इमाम, इमाम मालिक हैं जिनके मानने वाले एशिया में कम हैं | उनकी एक महत्वपूर्ण किताब ‘इमाम मोत्ता’ के नाम से प्रसिद्ध है

उनके अनुयायी उनके बताए नियमों को ही मानते हैं | ये समुदाय आमतौर पर मध्य पूर्व एशिया और उत्तरी अफ्रीका में पाए जाते हैं

शाफ़ई

शाफ़ई इमाम मालिक के शिष्य हैं और सुन्नियों के तीसरे प्रमुख इमाम हैं | मुसलमानों का एक बड़ा तबक़ा उनके बताए रास्तों पर अमल करता है, जो ज़्यादातर मध्य पूर्व एशिया और अफ्रीकी देशों में रहता है

आस्था के मामले में यह दूसरों से बहुत अलग नहीं है लेकिन इस्लामी तौर-तरीक़ों के आधार पर यह हनफ़ी फ़िक़ह से अलग है | उनके अनुयायी भी इस बात में विश्वास रखते हैं कि इमाम का अनुसरण करना ज़रूरी है

हंबली

सऊदी अरब, क़तर, कुवैत, मध्य पूर्व और कई अफ्रीकी देशों में भी मुसलमान इमाम हंबल के फ़िक़ह पर ज़्यादा अमल करते हैं और वे अपने आपको हंबली कहते हैं | सऊदी अरब की सरकारी शरीयत इमाम हंबल के धार्मिक क़ानूनों पर आधारित है | उनके अनुयायियों का कहना है कि उनका बताया हुआ तरीक़ा हदीसों के अधिक करीब है

इन चारों इमामों को मानने वाले मुसलमानों का यह मानना है कि शरीयत का पालन करने के लिए अपने अपने इमाम का अनुसरण करना ज़रूरी है | सल्फ़ी, वहाबी और अहले हदीससुन्नियों में एक समूह ऐसा भी है जो किसी एक ख़ास इमाम के अनुसरण की बात नहीं मानता और उसका कहना है कि शरीयत को समझने और उसका सही ढंग से पालन करने के लिए सीधे क़ुरान और हदीस (पैग़म्बर मोहम्मद के कहे हुए शब्द) का अध्ययन करना चाहिए इसी समुदाय को सल्फ़ी और अहले-हदीस और वहाबी आदि के नाम से जाना जाता है | यह संप्रदाय चारों इमामों के ज्ञान, उनके शोध अध्ययन और उनके साहित्य की क़द्र करता है

लेकिन उसका कहना है कि इन इमामों में से किसी एक का अनुसरण अनिवार्य नहीं है | उनकी जो बातें क़ुरान और हदीस के अनुसार हैं उस पर अमल तो सही है लेकिन किसी भी विवादास्पद चीज़ में अंतिम फ़ैसला क़ुरान और हदीस का मानना चाहिए

सल्फ़ी समूह का कहना है कि वह ऐसे इस्लाम का प्रचार चाहता है जो पैग़म्बर मोहम्मद के समय में था | इस सोच को परवान चढ़ाने का सेहरा इब्ने तैमिया(1263-1328) और मोहम्मद बिन अब्दुल वहाब(1703-1792) के सिर पर बांधा जाता है और अब्दुल वहाब के नाम पर ही यह समुदाय वहाबी नाम से भी जाना जाता है

मध्य पूर्व के अधिकांश इस्लामिक विद्वान उनकी विचारधारा से ज़्यादा प्रभावित हैं | इस समूह के बारे में एक बात बड़ी मशहूर है कि यह सांप्रदायिक तौर पर बेहद कट्टरपंथी और धार्मिक मामलों में बहुत कट्टर है | सऊदी अरब के मौजूदा शासक इसी विचारधारा को मानते हैं

अल-क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन भी सल्फ़ी विचाराधारा के समर्थक थे

सुन्नी बोहरा

गुजरात, महाराष्ट्र और पाकिस्तान के सिंध प्रांत में मुसलमानों के कारोबारी समुदाय के एक समूह को बोहरा के नाम से जाना जाता है | बोहरा, शिया और सुन्नी दोनों होते हैं

सुन्नी बोहरा हनफ़ी इस्लामिक क़ानून पर अमल करते हैं जबकि सांस्कृतिक तौर पर दाऊदी बोहरा यानी शिया समुदाय के क़रीब हैं

अहमदिया

हनफ़ी इस्लामिक क़ानून का पालन करने वाले मुसलमानों का एक समुदाय अपने आप को अहमदिया कहता है | इस समुदाय की स्थापना भारतीय पंजाब के क़ादियान में मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद ने की थी | इस पंथ के अनुयायियों का मानना है कि मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद ख़ुद नबी का ही एक अवतार थे

उनके मुताबिक़ वे खुद कोई नई शरीयत नहीं लाए बल्कि पैग़म्बर मोहम्मद की शरीयत का ही पालन कर रहे हैं लेकिन वे नबी का दर्जा रखते हैं | मुसलमानों के लगभग सभी संप्रदाय इस बात पर सहमत हैं कि मोहम्मद साहब के बाद अल्लाह की तरफ़ से दुनिया में भेजे गए दूतों का सिलसिला ख़त्म हो गया है

लेकिन अहमदियों का मानना है कि मिर्ज़ा ग़ुलाम अहमद ऐसे धर्म सुधारक थे जो नबी का दर्जा रखते हैं

बस इसी बात पर मतभेद इतने गंभीर हैं कि मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग अहमदियों को मुसलमान ही नहीं मानता | हालांकि भारत, पाकिस्तान और ब्रिटेन में अहमदियों की अच्छी ख़ासी संख्या है | पाकिस्तान में तो आधिकारिक तौर पर अहमदियों को इस्लाम से ख़ारिज कर दिया गया है

शिया

शिया मुसलमानों की धार्मिक आस्था और इस्लामिक क़ानून सुन्नियों से काफ़ी अलग हैं | वह पैग़म्बर मोहम्मद के बाद ख़लीफ़ा नहीं बल्कि इमाम नियुक्त किए जाने के समर्थक हैं उनका मानना है कि पैग़म्बर मोहम्मद की मौत के बाद उनके असल उत्तारधिकारी उनके दामाद हज़रत अली थे | उनके अनुसार पैग़म्बर मोहम्मद भी अली को ही अपना वारिस घोषित कर चुके थे लेकिन धोखे से उनकी जगह हज़रत अबू-बकर को नेता चुन लिया गया शिया मुसलमान मोहम्मद के बाद बने पहले तीन ख़लीफ़ा को अपना नेता नहीं मानते बल्कि उन्हें ग़ासिब कहते हैं | ग़ासिब अरबी का शब्द है जिसका अर्थ हड़पने वाला होता है

उनका विश्वास है कि जिस तरह अल्लाह ने मोहम्मद साहब को अपना पैग़म्बर बनाकर भेजा था उसी तरह से उनके दामाद अली को भी अल्लाह ने ही इमाम या नबी नियुक्त किया था और फिर इस तरह से उन्हीं की संतानों से इमाम होते रहे

आगे चलकर शिया भी कई हिस्सों में बंट गए

इस्ना अशरी

सुन्नियों की तरह शियाओं में भी कई संप्रदाय हैं लेकिन सबसे बड़ा समूह इस्ना अशरी यानी बारह इमामों को मानने वाला समूह है | दुनिया के लगभग 75 प्रतिशत शिया इसी समूह से संबंध रखते हैं | इस्ना अशरी समुदाय का कलमा सुन्नियों के कलमे से भी अलग है

उनके पहले इमाम हज़रत अली हैं और अंतिम यानी बारहवें इमाम ज़माना यानी इमाम महदी हैं | वो अल्लाह, क़ुरान और हदीस को मानते हैं, लेकिन केवल उन्हीं हदीसों को सही मानते हैं जो उनके इमामों के माध्यम से आए हैं

क़ुरान के बाद अली के उपदेश पर आधारित किताब नहजुल बलाग़ा और अलकाफ़ि भी उनकी महत्वपूर्ण धार्मिक पुस्तक हैं | यह संप्रदाय इस्लामिक धार्मिक क़ानून के मुताबिक़ जाफ़रिया में विश्वास रखता है | ईरान, इराक़, भारत और पाकिस्तान सहित दुनिया के अधिकांश देशों में इस्ना अशरी शिया समुदाय का दबदबा है

ज़ैदिया

शियाओं का दूसरा बड़ा सांप्रदायिक समूह ज़ैदिया है, जो बारह के बजाय केवल पांच इमामों में ही विश्वास रखता है | इसके चार पहले इमाम तो इस्ना अशरी शियों के ही हैं लेकिन पांचवें और अंतिम इमाम हुसैन (हज़रत अली के बेटे) के पोते ज़ैद बिन अली हैं जिसकी वजह से वह ज़ैदिया कहलाते हैं

उनके इस्लामिक़ क़ानून ज़ैद बिन अली की एक किताब ‘मजमऊल फ़िक़ह’ से लिए गए हैं | मध्य पूर्व के यमन में रहने वाले हौसी ज़ैदिया समुदाय के मुसलमान हैं

इस्माइली शिया

शियों का यह समुदाय केवल सात इमामों को मानता है और उनके अंतिम इमाम मोहम्मद बिन इस्माइल हैं और इसी वजह से उन्हें इस्माइली कहा जाता है | इस्ना अशरी शियों से इनका विवाद इस बात पर हुआ कि इमाम जाफ़र सादिक़ के बाद उनके बड़े बेटे इस्माईल बिन जाफ़र इमाम होंगे या फिर दूसरे बेटे

इस्ना अशरी समूह ने उनके दूसरे बेटे मूसा काज़िम को इमाम माना और यहीं से दो समूह बन गए | इस तरह इस्माइलियों ने अपना सातवां इमाम इस्माइल बिन जाफ़र को माना | उनकी फ़िक़ह और कुछ मान्यताएं भी इस्ना अशरी शियों से कुछ अलग है

दाऊदी बोहरा

बोहरा का एक समूह, जो दाऊदी बोहरा कहलाता है, इस्माइली शिया फ़िक़ह को मानता है और इसी विश्वास पर क़ायम है | अंतर यह है कि दाऊदी बोहरा 21 इमामों को मानते हैं

उनके अंतिम इमाम तैयब अबुल क़ासिम थे जिसके बाद आध्यात्मिक गुरुओं की परंपरा है | इन्हें दाई कहा जाता है और इस तुलना से 52वें दाई सैय्यदना बुरहानुद्दीन रब्बानी थे | 2014 में रब्बानी के निधन के बाद से उनके दो बेटों में उत्तराधिकार का झगड़ा हो गया और अब मामला अदालत में है

बोहरा भारत के पश्चिमी क्षेत्र ख़ासकर गुजरात और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं जबकि पाकिस्तान और यमन में भी ये मौजूद हैं | यह एक सफल व्यापारी समुदाय है जिसका एक धड़ा सुन्नी भी है

खोजा

खोजा गुजरात का एक व्यापारी समुदाय है जिसने कुछ सदी पहले इस्लाम स्वीकार किया था | इस समुदाय के लोग शिया और सुन्नी दोनों इस्लाम मानते हैं

ज़्यादातर खोजा इस्माइली शिया के धार्मिक क़ानून का पालन करते हैं लेकिन एक बड़ी संख्या में खोजा इस्ना अशरी शियों की भी है | लेकिन कुछ खोजे सुन्नी इस्लाम को भी मानते हैं | इस समुदाय का बड़ा वर्ग गुजरात और महाराष्ट्र में पाया जाता है | पूर्वी अफ्रीकी देशों में भी ये बसे हुए हैं

नुसैरी

शियों का यह संप्रदाय सीरिया और मध्य पूर्व के विभिन्न क्षेत्रों में पाया जाता है | इसे अलावी के नाम से भी जाना जाता है | सीरिया में इसे मानने वाले ज़्यादातर शिया हैं और देश के राष्ट्रपति बशर अल असद का संबंध इसी समुदाय से है

इस समुदाय का मानना है कि अली वास्तव में भगवान के अवतार के रूप में दुनिया में आए थे | उनकी फ़िक़ह इस्ना अशरी में है लेकिन विश्वासों में मतभेद है | नुसैरी पुर्नजन्म में भी विश्वास रखते हैं और कुछ ईसाइयों की रस्में भी उनके धर्म का हिस्सा हैं

इन सबके अलावा भी इस्लाम में कई छोटे छोटे पंथ पाए जाते हैं | विश्व विजय का स्वप्न देखने वाले पहले इस्लाम के सही स्वरूप की एक मत से व्याख्या करें तो शायद ज्यादा अच्छा होगा

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અટ્ક્ળોના આશીર્વાદ
============
જખ્મોનો જ્યા  બને છે  કારભાર
ત્યાં સહાનુભુતિ રળે છે આવકાર

ખરું છે  જે  છોડી જાય છે દુનિયા
અતીત મ્હાલે છે  રાખી દરકાર

રાહમાં મળે અટક્ળોના આશીર્વાદ
વિશાદ જયાં ધારે ન થવાના પડકાર

આમ હોય તો નિરાશા ત્યજી દે  ઘર
પણ જરૂરી હશે આશાનો કારભાર

અટકળે આશીર્વાદ  હોય જ્યા છે શંકા
ત્યાં પડેછે  બે વિચારો વચ્ચે  તકરાર
=== પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 29 / 4 / 2017

મોરનિન્ગ વોક

મોરનિન્ગ વોક
==========
ગળતી ઉમરના ધસારા સામે દોડે લેવા ટક્કર
કુત્રીમ યુવાનીઓ જજુમતી સવાર રેસે ચાલકો

નિદ્રા દ્વાર ઉગાડે રાતનો આરોગી પાછલો પહોર
સડકો સજાવે નિરમળ હવાએ જનાર વીર ચાલકો

ઉગાડે માથે તો કોઇ ખુલ્લા પગે ને બન્ધ મુઠીએ
ધારદાર ચાલ સાથે ઊંડા શ્વાસ લૈ દોડે સૌ ચાલકો

ડાયાબીટીસનાં લક્ષણે શરીર મપાયછે રોગનાં દર્દે
કરવા સર સ્વાસ્થને દોડે સૌ મધુ પ્રમયો લૈ ચાલકો

વહેલા પહોરની ગુન્જે આરતી,ભજન ઘન્ટનાદે થાળ
પરોઢ મળસ્કે દોડે સ્વપનો સ્વાસ્થ્યનાં સમય ચાલકે

ઘંટીઓ દળવું ભૂલી લોટ નેતરાં ભૂલ્યા હાથ વલોણે ‘ ઘી ‘
‘પાણિયારાં ભૂલ્યા બેડાં વણ પાણીએ નળે બંધાયાં  નીર

બપોરી ખાણે બ્રેક ફાસ્ટ ઉઠે નારીઓ માથે ચડે જયાં દિ
સ્થૂળકાય શરીરે જીવાય જંકફૂડ મધરાતી ખાણાં ખવાય
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 27 /4 / 2017

जवाब जरूर दीजिए
============
ये कौन सा खुदा है जिसको अपनी बेटी अपनी बहु लगती है
ये कौनसा धर्म है जिसमे मासूम बेटियों को हवसके लिए मारी जाती है
ये कौनसे इंसान है जो इंसानियतके हर लब्ज को ख़तम करते है
ये कौनसे लोग है जो नारी को अपना खेत समझते है और बच्चे पैदा करनेकी फैक्ट्री समझते है
ये कौनसी जाती है नारी को गुलाम और अपनी ऐयासीके लिए अपनी रखैल बनाके रखते है
ये कौनसा दानवोका झुंड है जो पहले दूसरोंसे बादमे आपसमे एक दुसरेके खुनके प्यासे है
ये कौनसी जाती है जो नारीको अपने पैर की जूती समझते है
ये कौनसी जाती के लोग है जो आपसमे जन्मसे सगे भाई  बहन होते है जहा लड़कियों बचपनमे
अपने भाईको भाईजान और जैसे जवान होते है तो सगे भाईको अपना [ पति ] यानी अपना
शोहर बनाते है
ये कौनसा ना लायक खुदा है जो ये सब अवैध काम इन्सानसे करवाता है
इस जहाँमे जानवर जैसी अबोला प्रजाति भी कुछ नियमोंका पालन करती है ये कौनसी जाती है जो  लोग जानवरसे भी गई है ,उनसे तो जानवर भी अच्छी प्रजाति है
===प्रहलादभाई प्रजापति

આનંદે નક્સલીઓ ગદ્દારીઓ
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દેશમાં વિદેશી નાણાંની રેલમછેલ નેતાએ નક્સલીએ
જવાન શહિદ સીમાએ રક્ત રંજિત આનંદે ગદ્દારીઓ
==પ્રહલાદભાઈ પ્રજાપતિ

સબન્ધો

સબન્ધો
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બપોરે કોલુએ શેરડી જેમ પિસાય છે મીઠા સબન્ધો
હરાયા ઢોરે ખેતર ભેળી ધણ ચારી ખાય સીધા સબંધો
સીમા લાધી ત્યાં ઓળખાયા નજીકના વેરી સબન્ધો
સ્વાર્થના સિંહાસને છડી પોકારી રાજવટું ઘેરે સબન્ધો
કડવાશના ગ્રહણે તૂટે  મારા પણું લૂંટે ઘરના સબન્ધો
શીતળતા થકી બંધાયા  ઝેરના પારખે તૂટયા સબન્ધે
આ શુ કે પેલુ શુ નાં વિચારે ધોળાયા સહિયારા સબન્ધો
બે કાંઠા જોડતી કડીમાં સળંગ દૂરના બન્ધાયા સબન્ધો
સ્વપ્નોની યાદીમાં પૂરાય હકીકતે હંમેશા નંદવાય સંબંધો
આયખે પડેલી ગાંઠે વંચાય તકલીફે ઓળખાય  સબન્ધો
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 24 /4 /2017
પ્રેમ પાંખાય વૃદ્ધાશ્રમે
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શરમ ને દુર્દશા સાથે હોય છે સંબંધ એવા
જે  આયને અંધાપા આવે સંસારમાં કહેવા
દેખાવમાં આંધળા પ્રેમ સેવાનો હોય પૂજારી
તર્પણનાં હાથ ભરમાવે અંચળો સૌ  સજાવી
સાથ સેવાળ-પાણીએ  રૂપ જુદા જગે દેખાડી
અભરખા,આશીકી,તમન્ના,ગૈ,વેદના સૌ ગુજરી
જીવતા ચહેરાઓ આધાર,વીણ,આવાસો થકી
નિરાધાર વ્રુધત્વ, વ્રુધ્ધાશ્રમે ગણે દિવસો બાકી
ખબર અન્તરે વહાલાં કોક દી ખુદના જણ્યાના
સંબંધે મા-બાપના- વ્રુધ્ધાશ્રમે રહે થૈ અજાણ્યા
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 22 /4/ 2017
આઈ ટી યુગનું ધુણતું ડોટ. કોમ
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જાતાં આવતા સ્વાસમાં ડોટ કોમેં ઘર બાંધ્યાં
દોટ.કોમેં વિન્ડો વસાવી વિશ્વને હાથમાં લીધું
નેટ પર સૌ ડોટ.કોમ ડોટ.કોમેં નામી કરણ કીધું
મોઉસી કંટ્રોલ ડોટકોમ સ્ક્રીને કળસી કરણ કીધું
દિમાગી સદી જગે સ્વીકારી આંગળીએ આવકારી
સીડી ફ્લોપીમાં વિશ્વે પેપરનું ખસીકરણ સ્વીકારી
ડોટકોમ વિશ્વંમાં દોડે સ્ક્રીન પર ભૂગોળ ભણાવે
ડોટકોમને વાયરસી કાટ હેકિંગ કાગારોળ કરાવે
ફ્લોપી સીડી પ્રિન્ટ નૈસર્ગીક એક્ટમાં શૂટઅપ
હિસ્ટ્રી અતીતની હયાતી સ્ક્રીન અરીસે લોડઅપ
કોમ્પુટર હેલ્ડ-અપ વર્જન જમાનતે ડાઉન લોડ
ધુણે સોફ્ટ્વેર I.T.યુગે ડોટ.કોમી વેબ સાઈટે દોટ
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 21 /4 /2017

 જનારા એક સરખા

જનારા એક સરખા
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એકડા ઘુટ્યા, યાદ રાખવા ગણિતના
શૂન્ય થી સો સુધી બેઠા પછી મૂલવવા
એક ના બે, બેના ચાર,ચાર ના આઠમાં
સરવાળે ષેશની ખુમારી માણતા  ગયા
પાટી પેન લઈ જે સ્કૂલે નથી ગયા
એ ભણતરની પેઢીઓ ખોલી ગયા
પડેલાં પગલે ઉઝરડા રહયા શોભતા
પગલાં ની ભાતમાં પગલાં ભરતા ગયા
અર્થો ના દરબારમાં અર્થો મૂલવતા
કથાઓ યુગની ભૂત ભાવીની લીલા
સફરની રાહમાં સફરના સથવારા
માંચડે જણાયા એકસરખા જનારા
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 19 /4/2017
અરજદાર ;- પ્રજાપતિ પ્રહલાદભાઈ  પુર્ષોત્તમદાસ
એ /1  સુગમ્ય   એપાર્ટમેન્ટ
સુભાષ સર્કલ પાસે
અમદાવાદ
તારીખ 19 /1/2017
મોં। . 9327005315
શ્રીમાન શ્રી
રાષ્ટ્રીય અદક્ષય જી
શ્રી અમિત શાહ સર
ભારતીય જનતા  પક્ષ
  વિષય ;- પ્રવીણા બહેન સુતરીયા  ડેપ્યુટી મેયર અમદાવાદ શહેર  વિરુદ્ધ
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 આપ સસાહેબને  નમ્ર  અરજ  કર્વાનીકે અમો ઉપરોક્ત સરનામે છેલ્લા 25 – 30 વર્ષથી
અમારો  ધંધો  કરીએ છીએ , અમોએ સંવિધાનિક રીતે મળતા સરકારી બધી જ પરમિશનો
લઇ અને મ્યુનીસી પાલીટી માં પણ શરૂઆત થીજ  વેપારી /કોમર્શિયલ  પરવાનોલાઈ તેનું
ટેક્ષ ભરી એ છીએ ,અને વીજ બિલ પણ કોમર્શિયલ ભરીએ છીએ ,અમારો એપાર્ટમેન્ટ
ગ્રાઉન્ડ ફ્લોર , અને 100′ ફુટ ના રોડ પર આવેલ છે અમો આ એપાર્ટમેન્ટ ના ફાઉન્ડર મેમ્બર
છીએ અને જ્યારે અમોને કબજા આપેલા ત્યારે અમારી પાછળ અને સાઈડમાં માર્જિન ની
જગ્યા ના વધારાના પેમેન્ટ કરેલા છે જેની પાવતી પણ આપેલી છે ,અમોએ આ વધારાની
જગ્યા પર શેડ બાંધી તેની ઇપેક્ટ ફી ભરી ને કાયદેસરની પરવાનગી લીધેલ છે અને ત્યાં અમો
અમારી  ઓફિસ કરેલી છે અને  અમારા ફર્નિચરનો શોરૂમ કરેલો છે,સોફા તથા ચેર વગેરેનો
આ ફ્લેટ પર સાઈડની બાજુએ ત્રણ શટરો મુક્યા છે જે રોડ સાઇડે પડે છે અને બાકીના ત્રણ
શટરો  અમારી હદમાં આગળની બાજુએ આવેલા છે।
અહીં  આ એપાર્ટમેન્ટમાં   એ અને  બી બ્લોક  આગળ પાછળ આવેલા છે ,આ એપાર્ટમેન્ટ
ના રહીશો એ અમારી વિરુદ્ધ દિવવાની કોર્ટમમાં , સને  1990/91  અને  2011 માં દાવા કરેલા
જ્યા તેઓએ અમારી વિરુદ્ધ મનાઈ હુકમ મેળવેલા પરંતુ તેઓ તેમાં હારી ગયે લા છે અને
 બંનેમાં તેઓ  વિરુદ્ધ  ચુકાદા આવેલા છે  અને અમારી  તરફેણ માં ચુકાદા આવેલા છે
અહીંના રહીશો અમારી બાજુના શટરો  આગળ તેમના ઘરના રસોઈના ગન્દવાડ  તથા કચરો
નાખી અમોને પરેશાન કરે છે  જેની અમોએ પોલીસમાં ફરિયાદ ફોટાઓ સાથે અવાર નવાર
કરેલી છે  છેલા  6-7  માસમાં એઓએ ઘણીએ ફરિયાદો કરેલી છે , પોલીસે આ લોકોને
બોલાવીને  સમજાવીને આવું ન કરવાનું સમજાવેલ છે છતો  આ સભ્યોએ તેમની આ પ્રવૃત્તિઓ
ચાલુ રાખેલી ,પછી અમોએ અમારી હદમાં લોખન્ડ ની જાળી  મુકેલ જે  અમોએ  અમારો
પ્રવેશ પણ અલગ કરેલ જે  કોર્ટ કમિશનરે નકશામાં દર્શાવ્યા મુજબ હતો અને આ દાવામાં
તેઓ કોર્ટે અમારી તરફેણ માં તેમની મનાઈ અરજી રદ કરેલી અને અમારો આ પ્રવેશ માન્ય
રાખેલ અને રોડ  સાઈડ ની 3′ ફુટ ની જમીન થી ઊંચાઈ વળી રૅલીગ માન્ય  રાખેલી જે  અમારી
ઓફિસ /શોરૂમ ને રોડ  સાઈડનું ઓપન એલિવેશન બિલ્ડરે આપેલું તે મુજબનું કોર્ટે   કાયમી
માન્ય રાખેલ જેનો  મેપ આસાથે મૂકેલછે અને કોર્ટનો હુકમ પણ મુકેલ છે આપણી જાણ માટે
અહીં  આસ્થળ પર પ્રવીણા બહેન આવેલા અને સભ્યોને ઉશ્કેરીને આ જાળી તોડી નાખી
રોડ સાઇડે  મોટી દીવાલ બનાવી અને અમારા શટરો આગળ દીવાલ બનાવી ,વચ્ચે નાનકડી
20′ ક્સ 10′ ની માર્જિન ની જગ્યામાં મંદિર બનાવવા નું સૂચન કરી ગયેલા  જે મુજબ આ
ઉપરોક્ત મેમ્બરોએ લેડીઝ મેમ્બરો સાથે ભેગા મળી હુમલો કરી અમારી જાળી ,બોર્ડ ,તથા
ફર્નિચરને  નુકશાન કરીને ફેંકી દીધેલ જેની અમારા સીસી ટીવી કેમેરામાં કેદ થેયેલી તસવીરો છે
અને અમોએ આ વિષે પોલીસ સ્ટેશને વિગતવાર ફરિયાદ પણ કરેલી છે ,પરંતુ પોલીસને આ
પ્રવીણા બહેન નું પોલિટિકલી મોઉખિક દબાણ હોવાથી કાયદેશરની કાર્ય વહીમાં અવરોધ
કરાવે છે  અને અમોને ઈન ડાયરેક્ટ મેન્ટલી પરેશાન  કરી કરાવી અમારા બાળકો વિરુદ્ધ
અને અમારી વિરુદ્ધ એટ્રો સિટીની ફરિયાદની ધમકીઓ  આ મેમ્બરો દ્વારા અપાવે છે
અહીં સમાજના ગુંડા તત્વો દ્વારા અને અસામાજિક તત્વો દ્વારા ભય નું વાતાવરણ પેદા
કરાવ્યું છે। તેઓ તેમના સટાફ સાથે અમર ઉપરોક્ત સરનામે આવેલા જેના ફોટોગ્રાફ  આ
સાથે  મુકેલ છે  અને સભ્યોના અહીં કરેલ ટોડ ફોડ ના ફોટોગ્રાફ અને  વિડિઓ રેકોર્ડી  ની
સીડી આ સાથે મૂકેલછે જે આપણે તેની સચ્ચાઈ ની ખાતરી થઇ શકે
આ કેસમાં સોસાયટીના ચેરમેન અને સેક્રેટરી  દિલીપ મારું ,નટવtyaathi ,ગોપાલ ભ્રહ્મભટ
ડીડી  ગોહિલ ,દશરથ બેન્કર [વણકર ]  નરેન્દ્ર પાવસ્કર ,ભરતભાઈ  ડ્રાઈવર ,અને દિપક મારુ
જેઓની વિરુદ્ધ  પોલીસમાં ફરિયાદ પણ કરેલી છે જેની  કોપી પોલીસ કમિશ્નર ,અમદાવાદ
શહેર ,ડેપ્યુટી કમિશ્નર ઝોને -2 ,અને રાણીપ પોલીસ સ્ટેશન માં આપેલ છે
આપ સાહેબને  નમ્ર અરજ  કર્વાનીકે હું બીજેપીનો પાયાનો કાર્યકર છું અને રોજ ના 8-10
કલાક નેટ પર  પાર્ટીનું કામ કરું છું ,સોશ્યલ મીડિયામાં હું ,ફેસબુક ,જીમેલ ,ટિવટર પર પાર્ટી
નું  અને  નમો સાહેબનું કામ કરુંછું , મારું ફેસ બુક પર ‘praheladbhai  prajapati
ane  ‘ DESH    BHAKT ‘ નું આઈડી થી છેલા પાંચ વર્ષથી સતત કામ કરું છે અને
મારો બ્લોગ , http://www.praheladprajapati.wordpress.com  ના નામે છે જેમાં મારા 3500
આર્ટીકલો ,ગીતો ગઝલો ,કવિતાઓ મળીને લખેલા છે ,અહીં એ જણાવુકે આર્ટીકલો દેશ
ભક્તિના અને આપણા પાર્ટીને લાગતા અને નમો સાહેબને લગતા અને વિરોધીઓના પણ
કઈ કેટલાયે લખેલા છે  જેમાં  વર્લ્ડની  900 થી 1000 કોમેન્ટો પણ મળેલી છે  હું બીજેપી  અને
મોદી સાહેબનો ચુસ્ત ફોલોઅર છું , મોદી  સાહેબ મારા રોડ મેપ  છે  જે આપ  માર સોશ્યલ
સાઈટના કામ પરથી જોઈ શકો છો   મારું એક પુસ્તક ”પ્રભાવ ” જે નેશન પ્રેસ મદ્રાસ દ્વારા
પ્રકાશિત થયું છે જેની એક નકલ અપને  આપું છું
આપ સાહેબ ને નમ્ર અરજ  કર્વાનીકે  આ પ્રવીણા બહેન સુતરીયા  જે  અમદાવાદના ડેપ્યુટી
મેયર ના હોદાનો દુરુપયોગ કરીને પાર્ટીને નુકશાન પહોંચાડી રહયા છે ,અને તેમનો વ્યક્તિગત
સ્વાર્થ સાધી પક્ષનું ઘોર અપમાન કરી રહયા છે ,તેઓ જેઓની પાછળ કામ કરી રહયા છે તે બધાજ
પાકા કોંગ્રેસી   ફોલોઅર છે અને બીજેપીનો પાકા દુશમ્નો વિરોધીઓ છે આમ આ
બહેન  મારી વિરુદ્ધ ષડ્યંત્ર રચી મને ન સહેવાય  તેવું નુકશાન કરી રહેલ છે ,હું  આપણા બીજેપી ની
સેવા નું તથા મોદીજી નું સોશ્યિલ મીડિયા પર દરરોજ 8-10 કલાક કામ કરુંછું ,હું એક સિનિયર સિટીજન છું
અને દેશ ની સેવા કરવાની ભાવના ધરાઉં , હું મારા પાછલા જીવના વર્ષો દેશ ની સેવા કરવામાં ગાળવા માગું છું
અને જે હું છેલ્લા 5-6 વર્ષ થી સતત કરી રહ્યો છું , આપ મને મદદ કરી પ્રોત્સાહિત  કરશો જી
,સમાજ માં આવા તત્વો જે દેશ ને નુકશાન કરી રહયા છે  પછાત જાતિનો લાભ લઇ સમાજનું અહિત કરી રહયા છે ,
અને આવા  લોકોને ઉપસાવી રહયા છે જે સમાજ અને  દેશની એકતાને તોડવાનું કામ કરી રહ્યા છે
આ બહેન સત્તાનો દુરુપયોગ કરી તેમની મન માની કરી રહયા છે
આપ સાહેબ ને
નમ્ર અરજ કે મને આપણા પક્ષ વિષે બહુજ માન છે અને હું નાસી પાસ ન થાઉં તે માટે મને મદદ કરવા મહેરબાની
આપનો વિશ્વાસુ
પ્રહલાદભાઈ પ્રજાપતિ