सनसनीखेज : तो क्या वाकई राजीव गाँधी की मौत में था सोनिया का हाथ?
प्लान के मुताबिक श्री पेरम्बदूर में शुभा और धनु सफल नहीं हो पाती है तो दिल्ली में सोनिया राजीव गाँधी पर हमला करती
By Aayushi Chaturvedi –
April 11, 2017
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दरअसल ये पूरी कहानी समाने आई है वरिष्ठ पत्रकार नीना गोपाल की किताब “दी असेसिनेशन ऑफ़ राजीव गांधी” से| नीना गोपाल वो आखिरी पत्रकार थीं जो हादसे से ठीक पहले प्रधानमंत्री राजीव गांधी की एम्बेसडर कार में मौजूद थी जिससे वह तमिलनाडु के एक रैली ग्राउंड में पहुंचे थे।
जुलाई 1987, 10 जनपथ देश के प्रधानमंत्री के घर बैठक चल रही थी| प्रधानमंत्री के सामने लिट्टे का सबसे बड़ा कमांडर प्रभाकरण मौजूद था| राजीव गांधी, रॉ और कई खुफिया एजेंसियों के दवाब में प्रभाकरण को शांति समझौते को समर्थन देना पड़ा था जिसके चलते वो अन्दर से तिलमिलाया हुआ था लेकिन उसने ये जाहिर नहीं होने दिया|
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राजीव गांधी को प्रभाकरण पर भरोसा था और उन्होंने जाते- जाते प्रभाकरण को तौहफा देने का फैसला किया था| अन्दर से राजीव गांधी की पर्सनल बुलट प्रूफ जैकिट मंगाई गई और इसको प्रभाकरण के कंधे पर राजीव के 17 साल के बेटे राहुल गांधी ने रखा| राजीव ने मुस्कुराते हुए कहा प्रभाकरण अपना ख्याल रखना|
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ठीक 4 साल बाद 21 मई 1991 के दिन लिट्टे के एक हमलावर दस्ते ने राजीव गांधी की हत्या कर दी| 12 मई 1991 को मद्रास से 40 किलो मीटर दूर तिरवलूर में एक चुनावी रैली थी| जिसे संबोधित करने पहुंचे राजीव गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री बीपी सिंह और साथ में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करुणानिधि भी थे| यहाँ पर एक लड़की ने बीपी सिंह के हाई सिक्योरिटी एरिया में पैर छुए| ये एक आम बात थी समर्थक अपने बड़े नेताओं के पैर छूते हैं|
लेकिन इसी लड़की ने 9 दिन बाद 21 मई 1991 को राजीव गांधी के भी पैर छुए और वो राजीव गांधी का आखिरी वक्त था लेकिन ये लड़की मानव बम धनु, बीपी सिंह की रैली में क्या कर रही थी? दरअसल लिट्टे के जिस दस्ते को राजिव गांधी की हत्या की जिम्मेदारी सौंपी गई थी उसके 5 सदस्य थे, मानव बम धनु, उसका बैकअप शुभा, लोजिस्टिक सपोर्ट मुहैया कराने वाली लड़की नन्ही तथा चौथा आदमी शिवरासन और पांचवा मुरगन|
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इन पांचो का दस्ता रिहर्सल के लिए बीपी सिंह की रैली में पहुंचा था| वो ये देखना चाहते थे कि मंच के बीच हाई सिक्योरिटी एरिया में सुरक्षा कितनी पक्की होती है और क्या मानव बम धनु के लिए ये मुमकिन होगा की वह अपने टार्गेट के पैर छुए और उस दौरान बम के रिमोट को ओंन कर सके|
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दरअसल ये प्लान लिट्टे की महिला विंग की कमांडर अकिला का था, उसने ही सोचा था की ज़िंदा इंसान को कैरिअर के तौर पर इस्तेमाल किया जाए| इसका पहला निशाना था प्रधानमंत्री राजीव गाँधी| इसके लिए 3 लड़कियों को चुना गया था| दो लडकियां तो घटना स्थल पर मोजूद थीं मगर ये तीसरी…
मगर ये तीसरी लड़की अकिराय जिसका नाम सोनिया था जो दिल्ली के मोतीबाग इलाके में थी। कहा जाता है कि तमिलनाडु के नेता वाईको की सिफारिश पर मोतीबाग का यह मकान लिट्टे के दस्ते को उपलब्ध कराया गया था| अकिराय यानी सोनिया यहाँ पर अपने बॉस पोट्टू अमन के सिग्नल का इन्तजार कर रही थी| पोट्टू अमन जो लिट्टे के कमांडर प्रभाकरण का दिमाग कहा जाता था| पोट्टू अमन का ये प्लान था की श्री पेरम्बदूर में शुभा और धनु सफल नहीं हो पाती है तो दिल्ली में अकिराय यानि सोनिया राजीव गाँधी पर हमला करेंगी लेकिन ओपरेशन वेडिंग सफल रहा और अकिराय को निर्देश मिला दिल्ली छोड़ने का|
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वो दिल्ली छोड़ने की तैयारी कर रही थी तभी आई.बी की एजेंसियों ने उसे दिल्ली के पास पुरानी दिल्ली के इलाके में एक होटल से गिरफ्तार कर लिया| पुलिस को लगा कि उन्होंने धनु की सहयोगी शुभा को गिरफ्तार किया है लेकिन यह सच नहीं था और पहचान बाद में सामने आई| हालांकि कुछ ही हफ्तों के बाद वैलूर के एक इलाके से शुभा भी मिल गई| लेकिन जिन्दा नहीं मुर्दा, क्योंकि पुलिस के पहुँचने से पहले ही उसने अपने साथियों के साथ सायनाईड चाट लिया था|
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राजीव गांधी के हत्यारों को सबसे पहले जिसने पहचाना वह थी तमिलनाडु पुलिस की दरोगा अनसुईया| वह श्री पेरम्बदूर की सुरक्षा टीम में मौजूद थी| उसका काम था सामने के डी एरिया की सुरक्षा का| वहां पर वीआईपी पास लिए कुछ लोग मौजूद थे उनमें एक लड़की भी थी  जो सलवार सूट पहने ढीले ढाले ढंग का बड़ा सा चश्मा लगाए हाथों में चन्दन की माला लिए थी| अनसुईया को उसका रंग-ढंग कुछ अजीब लगा और उन्होंने राजीव गांधी के आने से ठीक पहले उस लड़की को पीछे धकेल दिया|
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राजीव आये, एम्बेसडर से उतरे और रैली स्थल की और बढ़ने लगे| मंच पर उनके जिंदाबाद के नारे लग रहे थे| मंच पर जयंती नटराजन और कई तमिलनाडु के वरिष्ठ नेता मोजूद थे और उसी दौरान ये लड़की फिर से आगे बढ़ी| अनसुईया ने उसका हाथ पकड़ कर उसे पीछे जाने को कहा लेकिन तभी राजीव की आवाज सुनाई पड़ी| राजीव बोले प्लीज इस लड़की और आने दीजिये|
इसके बाद दरोगा अनसुईया की पकड़ ढीली हो गई और वो लड़की आगे बढ़ गई और कुछ ही मिनट बाद वहां सन्नाटा छा गया क्योंकि यह लड़की मानव बम धनु थी जिसने पहले तो राजीव गांधी को चन्दन की माला पहनाई और फिर पैर छूने के लिए झुकी और जैसे ही राजीव उसको झुककर ऊपर उठाने लगे ब्लास्ट हो गया|
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