गांधी ने हिन्दुओ को ठगा, उन्हें कमजोर बनाया फिर उनके पूर्वजों के देश को ही तुड़वा डाला
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भारत के हिन्दू मोहनदास गाँधी को बिलकुल नहीं समझ पाए, और चालक और धूर्त दिमाग से युक्त गाँधी ने हिन्दुओ को बुरी तरह ठग दिया, और हिन्दुओ के भविष्य को भी अंधकारमय बना दिया
मोहनदास गाँधी ने 1 काम बखूबी किया, और वो था अहिंसा का प्रचार, इसके तहत गाँधी ने नारा दिया की, अगर कोई 1 थप्पड़ मारे तो उसे दूसरा गाल भी दे दो
गाँधी ने दिल्ली में 6 अप्रैल 1946 को प्रार्थना सभा में ये तक कहा, की हिन्दुओ का अगर मुसलमान क़त्ल भी करते है तो भी हिन्दू उसका विरोध न करे, और मुसलमानो के  प्रति अपने दिल में नफरत न रखे
नौखली में बलात्कार पीड़ित हिन्दू महिला को गाँधी ने सलाह दी की, बलात्कार का विरोध मत करो, वो स्वयं बलात्कार करना बंद कर देंगे
गाँधी का उस ज़माने में अंग्रेजो ने ही प्रचार किया, गाँधी जब साउथ अफ्रीका में थे तभी से उनकी मित्रता अंग्रेजो के साथ साथ जर्मनों से भी थी, हरमन कालिनबेन्च तो गाँधी का पार्टनर तक बताया जाता है
जहाँ अन्य क्रांतिकारियों को अंग्रेजो ने क़त्ल किया, फांसी दे दी, काले पानी की सजा दी, वहीँ अंग्रेजो ने गाँधी को विशेष ट्रीटमेंट दिया और आम भारतीयों के मन में गाँधी  को बड़े नेता के रूप में स्थापित कर दिया
गाँधी के अहिंसा वाले ज्ञान को केवल हिन्दुओ ने ही माना, मुसलमान गाँधी की इस नीति से दूर ही रहे
गाँधी जगह जगह जाकर गीता को पकड़कर लोगों को अहिंसा का ज्ञान देता रहा, यहाँ आपको याद रखना चाहिए की ये वही गीता है जिसे सुनने के बाद अर्जुन मिटटी और धर्म के लिए युद्ध को तैयार हो गए थे
यहाँ 2 बातें निकल कर आती है की, या तो मोहनदास गाँधी ने गीता को समझने में गलती की
और उसका गलत अर्थ हिन्दुओ को बताया, या फिर जानबूझकर ही गाँधी ने एजेंडे के तहत हिन्दुओ को अहिंसा का पाठ पढ़ाकर पहले कमजोर बनाया और फिर उनके पूर्वजो के देश भारत के ही टुकड़े करवा दिए
नोट : गाँधी आंदोलनों के लिए जाना जाता था, तो देश न टूटे उसके लिए गाँधी ने कितने आंदोलन किये ?
और दूसरी चीज ये हिन्दुओ ने ही गाँधी को समझने में भूल कर दी, वो गाँधी के एजेंडे को नहीं समझ पाए
और इसी कारण उनके देश के टुकड़े टुकड़े हो गए
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