अंग्रेजो का सबसे बड़ा मुखबिर जवाहर लाल नेहरू ही था, इसने कई क्रांतिकारियों को मरवाया
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आप चंद्रशेखर आज़ाद को तो नहीं ही भूले होंगे
जिन्होंने भारत को आज़ाद करवाने के लिए अपनी आहुति तक दे दी, वो दिन था 27 फ़रवरी 1931
जब 2 बजे दोपहर में चंद्रशेखर आज़ाद ने स्वयं को गोली मार ली, क्योंकि उनके पास केवल 1 ही गोली बची हुई थी, और वो अंग्रेजों के हाथ में नहीं आना चाहते थे, आप ये तस्वीर देखिये
ये इलाहबाद का वही अल्फ्रेड पार्क है, जिसे आज आज़ाद पार्क के नाम से जाना जाता है, ये जो पेड़ दिख रहा है, यही पर चंद्रशेखर आज़ाद ने खुद की आहुति दी थी, उनके शहीद होने के ठीक बाद  की तस्वीर देखिये

अब आपको इस पूरी घटना की कुछ और जानकारियां हम दे देते है, जो शायद आपको नहीं पता होंगी
चंद्रशेखर आज़ाद को इलाहबाद के जिस अल्फ्रेड  पार्क में अंग्रेजी पुलिस ने घेरा था, वो पार्क आनंद भवन से कुछ ही दुरी पर था, और आनंद भवन यानि नेहरू का घर, आनंद भवन आज भी इलाहबाद में मौजूद है
27 फ़रवरी को चंद्रशेखर आज़ाद सुबह 11 बजे आनंद भवन में जवाहर लाल नेहरू से मिले थे, और उसके बाद ही वो अल्फ्रेड पार्क गए थे
चंद्रशेखर आज़ाद अल्फ्रेड पार्क में कुछ और क्रांतिकारियों से मिलने गए थे, ताकि आगे की गतिविधियों की प्लानिंग हो सके, जैसे ही चंद्रशेखर आज़ाद पार्क में घुसे, उन्हें पता चला की पार्क में तो पहले से
ही अंग्रेजी पुलिस छुपी हुई थी, और अंग्रेजी पुलिस ने उनको आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दे दी
चंद्रशेखर आज़ाद पेड़ के पीछे चुप गए, और आखिरी गोली तक अंग्रेजी पुलिस से लड़ते रहे, उनके पास जब 1 आखिरी गोली बच गयी, तो उन्होंने उस गोली से स्वयं को ही मार लिया, ताकि अंग्रेजो के हाथो में न आएं
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अब यहाँ आप अंदाजा लगाइये की पुलिस पहले से ही अल्फ्रेड पार्क में चंद्रशेखर आज़ाद का इंतज़ार कैसे कर रही थी, और चंद्रशेखर आज़ाद इस पार्क में नेहरू से मिलने के बाद ही पहुंचे थे
यहाँ आपको एक और चीज नोट करनी होगी की, ये वही नेहरू है जिसने ब्रिटिश सरकार को पत्र लिखा था की

सुभाष चंद्र बोस तो युद्ध अपराधी है, उसे ढूंढिए पकड़िये और फांसी की सजा दीजिये
ये समझना अधिक मुश्किल नहीं है की, जवाहर लाल नेहरू जो हमारे देश का पहला प्रधानमंत्री बिना चुनाव के ही बना, वो असल में अंग्रेजो का कितना बड़ा दलाल और मुखबिर था, इस जवाहर लाल नेहरू और गाँधी की क्रांतिकारियों के प्रति नफरत किसी से छुपी नहीं है
यहाँ नोट कीजिये की, गाँधी ने भगत सिंह को भी गलत बताया था, और उन्हें फांसी से बचाने की जरा भी कोशिश नहीं की थी, दोनों नेहरू और गाँधी ने कई क्रांतिकारियों को मरवाया है
पर आज भी भारत के लोग इन दोनों के बारे में ये सब चीजें नहीं जानते है, कांग्रेस तो अंग्रेज अफसर AO HUME की ही बनाई हुई है, और असल में ये राजनितिक पार्टी कम और अंग्रेजो की दलाल और मुखबिर अधिक रही है
ये तस्वीर देखिये
नेहरू तो रोजाना अंग्रेजो से मिला करता था, वो मुखबरी और दलाली नहीं करता था तो क्या करता था,
आप तस्वीरों को तो नहीं ही झुठला सकते
अंग्रेजो के साथ जवाहर लाल नेहरू के कैसे मधुर सम्बन्ध थे ये तो तस्वीरें स्वयं बोलती है
ये तो भारत की फूटी किस्मत रही की,  अंग्रेजो का एक मुखबिर एक दलाल भारत का
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प्रथम प्रधानमंत्री बन गया, और आज भारत की अधिकतर समस्या, चाहे वो कश्मीर हो, चीन हो
सारी इसी नेहरू की ही देन है
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