भारतीय सेना में “मुस्लिम रेजिमेंट” क्यों नहीं है, ऐसा क्या किया था मुसलमानो ने ? आज जान लीजिये
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भारतीय सेना में “मुस्लिम रेजिमेंट” क्यों नहीं है, ऐसा क्या किया था मुसलमानो ने ?
आज तक भारतीय सेना में मुस्लिम समुदाय का नेतृतव करने वाली कोई भी रेजिमेंट नहीं बनी ? क्या ये सच है ?
Why is there no “Muslim regiment” in the Indian Army, what did Muslims do?
To date, there was no regiment to lead the Muslim community in the Indian Army? Is it true ?
पंजाब रेजिमेंट, मद्रास रेजिमेंट, मराठा रेजिमेंट, राजपूत रेजिमेंट, जट रेजिमेंट, सिख रेजिमेंट, असाम रेजिमेंट, नागा रेजिमेंट इत्यादि तो मौजूद हैं मगर मुस्लिम रेजिमेंट नहीं है?
Punjab Regiment, Madras Regiment, Maratha Regiment, Rajput Regiment, Jat Regiment, Sikh Regiment, Assam Regiment, Naga Regiment etc. are present but there is no Muslim regiment?
आजादी के बाद से लेकर आज तक कोई भी ऐसी रेजिमेंट ही नहीं बनी? जिससे मुस्लिम समुदाय की पहचान अथवा नेतृतव दिखाई देता हो? ऐसा क्यूँ है? क्या भारतीय मुस्लिम देश के प्रति अपनी जान देने का जज्बा नहीं रखते? या वह भरोसे के लायक ही नहीं हैं? आज हम बताएँगे क्यूँ नहीं है “मुस्लिम रेजिमेंट” और क्या किया था ऐसा इस रेजिमेंट ने .

Since independence, till now no such regiment has been created? Which shows the identity or leadership of the Muslim community? Why is it so? Does not the Indian Muslims have the desire to give their life to the country? Or is he not worth the trust? Today we will tell why the regiment did not have such a “Muslim Regiment” and what it did.

मुस्लिम रेजिमेंट या मुस्लिम राईफल्स नाम क्यूँ नहीं है????
Why do not the names of Muslim regiment or Muslim rifles ????

तो ऐसा नहीं है मित्रों

मुस्लिम रेजिमेंट आज नहीं है अलग बात है मगर सन 65 तक होता था, मगर जब सन 65 में भारत- पाकिस्तान की पहली जंग हुई थी तो इस रेजिमेंट ने पाकिस्तान के खिलाफ जंग लड़ने से साफ़ इंकार कर दिया, (बताने की जरुरत नहीं है क्यों?) लगभग बीस हज़ार मुस्लिम सेना ने पाकिस्तान के सामने अपने हथियार डाल दिए थे जिस वजह से उस वक्त भारत को काफि मुश्किलों सामना करना पड़ा था, क्यूंकि मुस्लिम राईफल्स और मुस्लिम रेजिमेंट के ऊपर बहुत ज्यादा यकीन कर के इनको भेजा गया था. इस वजह से इनकी पूरी की पूरी रेजिमेंट पर ही बैन लगा दिया गया,
The Muslim regiment is not different today but it was till 65, but when the first India-Pakistan war was fought in 65, the regiment refused to fight against Pakistan, but refused to tell (why it is not necessary to tell ?) Nearly twenty thousand Muslim forces had put their weapons in front of Pakistan, due to which India had to face difficulties at that time because the Muslim Rifles and Muslim regiments Was sent to them to make sure too much up. For this reason, the entire regiment was banned on their whole,

और पूरे रेजिमेंट को ही खत्म कर दिया गया, क्योंकि भारत की असली जंग तो हमेशा ही पाकिस्तान के साथ होती है, और फिर यदि जंग के अहम मौके पर आकर कोई रेजिमेंट जंग लड़ने से मना कर देगी फिर पाकिस्तान से जंग कैसे जीती जाएगी ?

And the entire regiment was destroyed, because India’s real war is always with Pakistan, and if it comes at a crucial juncture, then a regiment will refuse to fight and then how will it win the battle against Pakistan?
अगर आपको इस बात पर विश्वास ना हुआ हो तो यदि आपके घर में कोई बड़े- बुजुर्ग हों जो 65 के आस- पास सेना में रहें हों या सन 65 की जंग में भाग लिया हो, तो आप उनसे पूछ सकते हैं .. यकीन मानिए ये जानकार हमें भी बहुत बड़ा धक्का लगा था, कि ऐसे भी हमारी कोई रेजिमेंट कर सकती है क्या ? पर वो किसी ने कहा है ना कि “दुनिया में नामुकिन जैसी कोई चीज़ नहीं है”If you do not believe in this, if there are any elderly people in your house who have lived in the army around 65 or participated in the war of 65, then you can ask them. Believe it Knowledge was also a huge blow to us, that even our regiment could do such a thing? But he is someone said it is “no such thing as Namukin in the world”
1971 में पाकिस्तान के साथ फिर युद्ध हुआ उस वक्त सेना में एक भी मुस्लिम नहीं था उस वक्त भारत ने पाकिस्तान के नब्बे हज़ार सेना के हथियार डलवा कर उनको बंदी बना लिया था और लिखित तौर पर आत्मसमर्पण करवाया था!
After the war with Pakistan in 1971, when there was not even one Muslim in the army, at that time, India had seized nine hundred thousand weapons of Pakistan and took them captive and had to surrender in writing!
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