Archive for જુલાઇ, 2017


ન્યાયાલયોથી ન્યાય ઘણો દૂર
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કવિની કલ્પનાની આંટીગુટી થી મોટા ઘૂંચડે
ન્યાયની વિધિ જીવતાને મારે મરેલાને જીવાડે

 

બધુજ સારું હોવુ એવા ભાવની સમજણ ને
મર્યાદાની રેખાનું ગ્યાન યોજનો દૂર ભગાડે

 

હિત અહિતની જુગલબંધી માં ન્યાય દઝાડે
દુનિયાદારીના ખેલમાં ખેલન્દા સત્યને રંજાડે

 

સંસારની આંટીગૂટી ભજવનાર કર્મો આટે પાટે
મત મતાંતરના યુગમાં એક મત અજાણ્યા હાટે

 

હોય જ્યાં એક મત અનાયાસે તરી જાય વૈતરણી
સફરના કાફલે મતે મતે માંતીર્ભીન્દાની ઉજાણી

 

દુનિયાદારીના ખેલમાં ન્યાયાલયોથી ન્યાય ઘણો દૂર
ક્યોક હિમશીલાની ટોચ તો ક્યાંક સમતલે બજે નૂપુર

 

સંધાય કોઇ કારણ, ત્યો સંસાર મૂલવાતો દેખાય
શાન્તી માટે ક્યાંક કોમ્પ્રોમાઇજિ સમજુતી દેખાય

 

સંસાર પોત પોતાની હયાતીમાં ભજવાતો ભણાય
ન્યાયના પૂથ્થકરણમાં ઠોસ પૂરાવે અનીતિ અંકાય
=== પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 30 /7 /2017

વ્યક્તિગત સ્વાર્થ ની ખોંગ્રેસ ની નીતિ,[ ગુજરાતી પ્રજાને રેઢી મૂકી ભાગી ગયા ]
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જ્યારે ગુજરાત પૂર અને બાઢ માં તરબોળ થયુ છે ત્યારે ખોંગ્રેસના ધારા સભ્યો પુરમાં પીડાતી પ્રજાને
છોડી ભાગી ગયા ,અને હોટેલમાં અમન ચમન ઉડાવવા ગુજરાતની બહાર ભાગી ગયા ,જુઓ આ ખોંગ્રેસની નીતિ ,શું તેઓ એટલા બધા ના મર્દ હતા કે તેઓને પોતાના પર ભરોસો નહોતો કે પોતાના પર વિશ્વાસ નહોતો કે જેથી એક માણસને જીતાડવા તેઓને ભાગવાની શરણાગતિ સ્વીકારવી પડી ,અને પ્રજાને રડતી મૂકી અહીં પૂરની પરિસ્થિતિ એટલી નાજુક છે કે બાળકો
દલિતો ,ગરીબો ,ખેડૂતો ,વ્યાપારીઓ ઝુંપડા વાસીઓ આમ દરેક જન કપરી પરિસ્થિતિનો સામનો
કરી રહયા છે અને પ્રજાના ચૂંટાયેલા કહેવાતા સમાજ સેવકો ગુજરાત છોડી ભાગી ગયા ,વાહ
ખોંગ્રેસ અને નહેરુ ખાનદાન તારી નીતિ ,ઇતિયાસ ગવાહ છે કે દેશ ની સામે સમસ્યાઓ જ્યારે
જયારે આવી છે ત્યારે ત્યારે આ નહેરુ કુટુંબના નબીરાઓ દેશ છોડી ભાગી ગયાના પુરાવા છે
અને એજ નીતિનું આજે ગુજરાતમાં પુનરાવર્તન થયું છે દેશમાં એક પરિવાર માટે ખોંગ્રેસીઓ
મરી પરવારે છે તેમ ગુજરાતમાં એક વ્યક્તિને રાજ્ય સભામાં જીતાડવા આ ગુજરાતી ખોંગ્રેસી
સેવકોએ કરી બતાવ્યું છે પ્રજાને રેઢી મૂકી ગુજરાતની બહાર અમન ચમન ઉડાવવા ભાગી ગયા
=== પ્રહલાદભાઈ પ્રજાપતિ

हिन्दु जागो, हिन्दु जागो ,बड्डपन की गलत फेमि में न रहो
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विनय wrote: “देखो अब्दुल तुम राजवीर सिंह (क्षत्रिय) बन कर दलितों (शुद्रो) को नीच साबित करोगे.. वसीम तुम रमेश शर्मा (ब्राह्मण) बन कर दलितों को गालियां दोगे.. और अकरम तुम राकेश चमार (दलित) बन कर मनुवाद और ब्राह्मणों को दलितों और बाबा साहब का दुश्मन बता कर गालिया दोगे.. सलीम तुम मोहन सैनी (वैश्य) बन कर सब की हाँ में हाँ मिलाओगे और जरूरत पड़ने पर तुम मनुवाद को ही गरियाओगे.. समझ गए न तुम लोग..? अब्दुलाह अपने बेटो को समझाता हुआ बोल रहा था.. वसीम: अब्बु उस से होगा क्या..? अब्दुल्लाह: बेटा जैसा कहा है वैसा करो बाकि का काम तुम हिन्दुओं पर छोड़ दो..

નિત્ય ક્રમ

નિત્ય ક્રમ
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સવારથી કિરણો ધોધમાર ધસે યથાવત
રાત ભુક્કો થઇ દિવસમાં પીગળે યથાવત

 

સૂરજ નીકળ્યો ફરવા એમ યથાવત
અંધકાર ફીણ જેમ ઓગળે યથાવત

 

પથારી મૂકે એમ ઘરખુણે બેઠી યથાવત
સઘળો માહોલ,ધંધાની ધમાલે યથાવત

 

દહાડે શોરબકોર પડકારે શાંતિ યથાવત
નીત્યક્રમની સવારી ઉપડે રળવા યથાવત

 

સ્વાસની ખલેલ આવન જાવન યથાવત
જન્મ્યા પછીની આ દુનિયાદારી યથાવત

 

વેર વસુલાતે ઈર્શ્યા રહી ઈજાફે યથાવત
હૃદયે શાંતિ ન મળે સતત અશાંતિ યથાવત
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 28 / 7 /2017

आजादी के बाद का कांग्रेस का सबसे बड़ा घोटाला आया सामने, जानकर होश उड़ जाएंगे
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कर्ण चौधरी। हम सब जानते है कि देश में कांग्रेस का शासनकाल घोटालों से भरा हुआ रहा। एक घोटाला जो कांग्रेस के 70 सालों के शासन में किए गए घोटालों के बराबर नहीं हो सकता क्योंकि यह उससे भी बहुत बड़ा घोटाला है। इस घोटाले का नाम है- भगवा आतंकवाद। सरकार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा का वचन देती है लेकिन कांग्रेस ने देश के नागरिकों के साथ क्या किया?
कांग्रेस के शासनकाल में हुई आतंकवादी घटनाओं को भगवा आतंकवाद या हिंदू आतंकवाद के तौर पर सियासतदानों ने जमकर प्रचारित किया। अब जरा इस दौर पर भी गौर करिए।

8 सितंबर 2006 को मालेगांव मे सीरिज ब्लास्ट हुए, जिनमें 37 लोगों की जान गई। इसके बाद 18 फरवरी 2007 को समझौता एक्सप्रेस धमाके हुए, जिनमें 68 लोगों की जान गई। 18 मई 2007 मक्का मस्जिद मक्का मस्जिद के धमाकों में 13 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 25 अगस्त 2007 हैदराबाद के लुंबिनी पार्क और गोकुल चाट भंडार पर धमाके हुए जिनमें 42 लोगों की जान गई। फिर 11 अक्टूबर 2007 को अजमेर शरीफ की दरगाह पर धमाका हुआ, जिसमें 3 लोगों की मौत हुई। 14 अक्टूबर 2007 को लुधियाना में भी ईद के दिन धमाका हुआ, जिसमें 6 लोगों की मौत हुई। सितंबर 2006 से अक्टूबर 2007 के बीच के इस दौर में कुल 6 आतंकी हमले हुए करीब 169 मासूमों की जानें गईं।
अब जरा गौर कीजिए, इन सभी मामलों को अलग लिखने की वजह तत्कालीन यूपीए सरकार और एनआईए की जांच ने दी। इनमें मालेगांव, समझौता, मक्का मस्जिद और अजमेर शरीफ धमाकों में हिंदू संगठनों का हाथ होने की बात एनआईए की जांच ने बाद में कही। लुधियाना का धमाका पाकिस्तान की मदद से बब्बर खालसा द्वारा किए जाने की बात सामने आई।

29 सितंबर 2008 को मालेगांव में फिर धमाके हुए और इसमें 10 लोग मारे गए। ये भी पाकिस्तान के नापाक आतंकियों के हमलों की फेहरिस्त में एक टाट के पैबंद जैसा दिखाई पड़ता है। इसकी कहानी भी पहले कुछ और थी और बाद में इसमें भी भगवा आतंकवाद की थ्योरी सामने आ गई।
कथित भगवा आतंकवाद के इस दौर में हैदराबाद के धमाकों में शाहिद और बिलाल नाम के दो आतंकी पकड़े गए। जांच में ये बात सामने आई कि हूजी ने इस आतंकी हमले को अंजाम दिया है। पुलिस और एटीएस की जांच ने ये भी साफ कर दिया कि इस मामले के मास्टर माइंड और मक्का मस्जिद के मास्टर माइंड एक ही थे। मालेगांव की जांच में भी सिमी के ही आतंकियों का हाथ होने की बात साफ हो गई थी।

इसी तरह समझौता में अमेरिकी इंटेलीजेंस एजेंसियों ने भी ये साफ कर दिया था कि ये लश्कर का काम है। इस सबके बावजूद मालेगांव, मक्का मस्जिद, अजमेर शरीफ और समझौता धमाकों के इस दौर में एनआईए ने जांच को भगवा संगठनों पर केंद्रित कर दिया, जबकि इससे पहले हुए धमाकों और बाद के धमाकों की मॉडस ऑपरेंडी में भी कोई खास फर्क देखने को नहीं मिलेगा।
हां इधर, एक बात थी कि इन हमलों में मुसलमान ज्यादा मारे गए। इस बात को आधार बनाकर ये घटिया थ्योरी भी सामने रखने की कोशिश की गई कि पाकिस्तान परस्त आतंकी मुस्लिमों के हिमायती हैं और उन्हें नहीं मारेंगे। आतंक का कोई मजहब नहीं होता और इन हमलों में भी मजहब ढूंढना बेमानी है। 26/11 से लेकर देश के हर आतंकी हमले में हर मजहब का हिंदुस्तानी मारा गया।

अब जरा इस महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न को समझिए, जाहिर है इस ज्‍वलंत प्रश्‍न के साथ इस दौर को अलग रखकर समझना इसीलिए जरूरी है क्‍योंकि इस दौर में पाकिस्तान परस्त आतंकी शायद छुट्टी पर चले गए थे। जब कथित भगवा आतंकवाद के हमलों की बात तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिंदबरम रख रहे थे, तब इस्लामिक आतंकी शांत बैठे थे।
ये बहुत ही अजीब लगता है क्‍योंकि इस दौर के पहले और बाद में किस तरह हमले होते रहे और मासूम मरते रहे के आंकड़े मैं शुरू मॆं ही रख चुका हूं। हमले पहले भी हुए और बाद में भी, लेकिन इस दौर में इंडियन मुजाहिदीन और सिमी शांत हो कर बैठ गए। ऐसा लगता है जैसे वो कथित भगवा आतंकियों को सितंबर 2006 से अक्टूबर 2007 का समय दान में देकर खुद छुट्टी पर चले गए। ज्यादा जांच पड़ताल तो दूर की कौड़ी है लेकिन थोड़ा तारीखों पर नजर दौड़ा ली जाए तो बहुत सी बातों पर से परदा उठ जाए।

अगस्त 2010 में दिल्ली में देश भर के पुलिस प्रमुखों की बैठक में चिदंबरम ने अपने भाषण को पूरी तरह देश में पनपने वाले आतंकवाद पर केंद्रित रखा था। ये वो दौर था, जब एनआईए की जांच इस दिशा में जा रही थी। फिर एक-एक कर वो मामले सामने आए जहां मुस्लिम मारे गए और कथित भगवा आतंकी सामने आए।
दुखद बात ये है कि जिस वक्त वो ये चिंता जता रहे थे उसके बाद से अब तक देश में 21 आतंकी हमले हो चुके हैं और सब पाकिस्तान प्रायोजित ही हैं, लेकिन पाकिस्तान उनके उसी बयान को पकड़े हुए कह रहा आतंकी तो आप के देश में ही पनपनते हैं। इस चिंता को जताने के बाद से लेकर आज तक कोई ऐसा मामला सामने नहीं आया जो एनआईए जांच की इस कहानी को दोहराता पाया जाता। पाकिस्तान प्रायोजित आतंकियों की छुट्टी वाला ये दौर भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी शर्मसार करने वाला रहा।

कांग्रेस ने हिन्दू धर्म को बदनाम करने के लिए कई हथकंडे अपनाए। कांग्रेस ने आतंकी हमलों को ‘भगवा आतंकवाद’ का नाम दिया। लेकिन बाद में इन सब का खुलासा हुआ और बड़ा घोटाला बाहर आया। कांग्रेस की इस कुचाल की वजह से कई बेगुनाहों को सजा मिली। सुप्रीम कोर्ट को तुरंत सोनिया गांधी को गिरफ्तार करने का आदेश देना चाहिए और चुनाव आयोग को कांग्रेस पार्टी पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए।
(इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं , एवं saffronswastik.com

नहेरु गांधी के नामसे लोग देश को लूट रहे है और अपनी राज नैतिक रोटियों शेक रहे है
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खोंग्रेस एक ही परिवारका खेल है जो लोग सुक्युलरके नामसे देश को बर्बाद कर रहे है और एक ही परिवार [नहेरु खानदान ] को इर्द गिर्द रहा क्र देश को लूट रहे है और लुटवा रहे है उनको देश की आम जनता की कोई पड़ी नहीं है सिर्फ न सिर्फ नहेरु खानदान के अलावा ,और वो लोग है यही लोग है जो इन खानदान की आदमे अपनी राज नैतिक रोटियां शेक रहे है खोंग्रेसके कई नेता है जो सिर्फ न सिर्फ चापलूसी करनेमे माहिर है जो इनके पास देश क्या अपेक्षा रखे ?
===प्रहलादभाई प्रजापति

फारुख अब्दुल्ला ने खोली कांग्रेस की पोल, कहा- कांग्रेस सरकार देती थी हुर्रियत नेताओं को फंड
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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने ऐसा बयान दिया जिससे कांग्रेस पर सवाल उठने लग गए है। फारूक अब्दुल्ला ने हुर्रियत नेताओं को हिने वाली फंडिंग को लेकर खुलासा किया है।
फारुख अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा, ‘नाम नहीं लूंगा, लेकिन केंद्र सरकार से भी हुर्रियत को फंड मिलता रहा है। इस पर पूर्व रॉ चीफ की किताब पढ़िए। आतंक तब तक नहीं रुकेगा जब तक भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का रास्ता नहीं खुलेगा।‘ आपको बता दे कि केंद्र में जब कांग्रेस की सरकार थी तब कश्मीर के हुर्रियत और अलगाववादियों को फंडिंग देती थी।

फारुख ने कहा, ‘जरूरी नहीं है कि पीएम पाक से बात करें। संसदीय प्रतिनिधिमंडल भेजना चाहिए। मनमोहन सिंह और मुलायम सिंह जैसे लोगों को जाना चाहिए।‘
बता दें कि टेरर फंडिंग केस के मामले में सोमवार (24 जुलाई) को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सात अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार ​किया है। इन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए विदेशों से फंड जुटाने और उन्हें यहां आतंकियों तक पहुंचाने का आरोप है।

जिन अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार किया गया है, उनमें अलताफ शाह, अयाज अकबर, पीर सैफुल्लाह, शाहिद उल इस्लाम, मेहराजुद्दीन कलवल, बिट्टा काराते, नईम खान हैं।

વાગોળાય ધટનાઓ
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ભાષાની ઝોળીમાં ઝખ્મો ભરું પછી
લાગણી મૂલવાય ઘટના જોઈ જોઈ

કહ્યું મેં મને જુઓ માણો તમે દર્દ પછી
ઘટના બધી જ ઉભી તોરણો જોઈ જોઈ

 

ભીષ્મની વેદના લઇ ખૂંપ્યા તીર પછી
મહાભારતે છોડ્યા સબંધો જોઈ જોઈ

 

પાંખો ફૂટી મનેય આકાશ છોડ્યા પછી
વરસ્યાં નહિ તરસની તીખાશ જોઈ જોઈ

 

ડહાપણની દાઢ ફૂટી મન રાંડ્યા પછી
ખબરની ખેરાતે ધૃતરાષ્ટ્ર ઘટના જોઈ જોઈ

 

સાચા સ્ત્રોત સમજ્યાં સમય વીત્યા પછી
સુર્યની કિંમત જણાઇ અંધારા જોઈ જોઈ

 

વાગોળાય ધટનાઓ નિસહાય થયા પછી
નીર વહી ગયાં વંચાય નિશાન જોઈ જોઈ
=== પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 24 /7/2017

खोंग्रेसी और सेक्युलरो आपको आपके कर्मोंको फल भुगतना ही होगा संसद में प्रमोद तिवारीजीकी
स्पीच का जवाब
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क्या नहेरु गांधीने उनकी सोच और उनका मकसद सीधा करनेके लिए देश के लोगोके साथ कितनी साजिसे रची है उसका क्तियास गवाह है ,आप ऐसी दलीले करकर देश के लोगोको उसका हिसाब देनेसे नहीं बच शकते खोंग्रेसियो या सेक्युलरो आप को देश के लोगोको हिसाब देना ही होगा आपके कर्मोका
खोंग्रेसी और सेक्युलरो आपको आपके कर्मोंको फल भुगतना ही होगा और देश को खोंग्रे मुक्त बनाना ही होगा राम राज्य लाना ही होगा देशो ६० सालोसे लुटा है उसके कई साबुत है और इतियास
गवाह है
===प्रहलादभाई प्रजापति

खोंग्रेस मुक्त भारत
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इतियासमें पहली बार भारत मुक्त खोंग्रे हुवा , सभी सांविधानिक टॉप पोस्ट पर कमल बिराजमान हुवा और अटलजिका स्वप्न साकार हुवा , अब सभी है कोर्टो पर और उच्च न्याया ल्यो पर आर आर एस का और कमल का इंसान देखना चाहती है भारत की जनता

देशके पीएम नमो खोंग्रेस मुक्त भारत
देशके राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी खोंग्रेस मुक्त भारत
देशके उप राष्ट्र पति वेंकैया नायदजी खोंग्रेस मुक्त भारत
देशके लोकसभा पति सुमित्रा महाजन जी खोंग्रेस मुक्त भारत

अब देश की जनता इन्तजार क्र रही है सभी राज्योंकी न्याय पालिकाएँ और उच्च न्याय पालिका
के लोग जो भी कमल के चाहने वाले हो जो सही माहिनेमे देश के गरीबोंकी राह नक्की कर शके और बिछड़े गरीब दलित और किसान मजदुर और आम जनताका भला कर शके
===प्रहलादभाई प्रजापति