बड़ा खुलासा: सोनिया गांधी का काला सच आया सामने, सच्चाई जानकर आपके होश उड़ जाएंगे
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अगर सबकुछ सही था तो उसे झूठ बोलने की जरूरत नहीं थी। उसने हर कदम पर झूठ बोला। यहां तक कि जन्मस्थान से लेकर उसके असली नाम तक। हां, ये सोनिया गांधी के बारे में है। बता दे कि सोनिया गांधी की शादी पूर्व पीएम राजीव गांधी से हुई थी। उनका कहना था कि वे दोनों एक ही यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे लेकिन वहां सोनिया नाम की कोई स्टूडेंट थी ही नहीं और यहां तक कि उनके असली नाम की भी कोई स्टूडेंट नहीं थी।
एक रिटायर इंडियन पुलिस सर्विस ऑफिसर मलय कृष्णा धर के द्वारा लिखित किताब ‘ओपन सीक्रेट’ में यह खुलासा किया है। बता दे कि मलय कृष्णा धर ने 29 वर्षों तक इंटेलिजेंस ब्यूरो में सेवा दी है।

उन्होंने कहा है कि, मेरी मेहनत भरी रिसर्च और बुद्धिमत्ता रंग लाई। उन चार मंत्रियों (इंदिरा सरकार के कैबिनेट मंत्री) और दो दर्जन सांसद KGB (रूस की जासूसी एजेंसी) के लिए काम करते थे। KGB इन्हें इसके लिए मोटी रकम देता था।
मलय कृष्ण धर ने उनकी किताब में कुछ जाने माने तथ्य और पब्लिक सिक्रेटों को प्रकाशित किया है। इस किताब में उन्होंने सोनिया गांधी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि सोनिया गांधी एक KGB द्वारा भेजी हुई जासूस है।

वर्ष 1985 में रूसी जासूसी एजेंसी KGB द्वारा 2 बिलियन यूएस डॉलर (94 करोड़ रुपये) राहुल गांधी के स्विस बैंक खाते में जमा किये थे जो कि सोनिया गांधी द्वारा मैनेज किया जाता था। स्विस न्यूज़ मैगजीन में भी यह दर्शाया गया था कि KGB ने सोनिया गांधी जो कि भारतीय राजनेता से विवाहित है उसे इतनी मोटी रकम क्यों दी गई?
अगर सोनिया गांधी भारत की प्रधानमंत्री बन गई होती तो हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा, सेना, वैज्ञानिकता और टेक्नोलॉजी विकास (BARC, ISRO, DRDO, ICAR, ICAR) और हमारी व्यापारिक गतिविधियां रूस, रोम और अन्य मुस्लिम राष्ट्रों के लिए एक तरह से खुली किताब के समान हो जाती। इटालियन माफिया भारतीय इंडस्ट्रीस और व्यापार पर अपना दबदबा कायम कर लेता, जिसका परिणाम बहुत ही खतरनाक होता।

कृष्ण धर द्वारा जुटाए गए कुछ सबूत सोनिया गांधी को रसियन एजेंट साबित करते है।
जवाहर लाल नेहरू के समय इंदिरा गांधी को भी KGB के द्वारा मोटी रकम मिलती थीं। उसके बाद इंदिरा गांधी के चहेते राजीव और सोनिया को पाकिस्तानी बैंकर के द्वारा रकम दी जाती थी। बैंकर आघा हसन अबदी जो कि बैंक ऑफ क्रेडिट एंड कॉमर्स में कार्यरत था। यह बैंक अबु धाबी के शेख जैयद के अवैध धन (नशीली दवाओं से कमाई रकम) को वैध करता था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी मृत्यु रूस पर उंगली उठाती है। 1965 भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद शास्त्रीजी पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान से ताशकेंट में मुलाकात की और ‘No-War समझौते’ पर हस्ताक्षर किए जिसमें लिखा था कि अब कोई युद्ध नहीं होगा। लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि उनकी अगले ही दिन रहस्यमयी मृत्यु हो गई और इससे जुड़े सारे सबूत मिटा दिए गए।
संजय गांधी की मृत्यु से जुड़े सबूत भी सोनिया गांधी को संदेह के घेरे में खड़े करते थे। संजय गांधी को KGB के कहने पर मारा गया था ताकि राजीव गांधी भारत के अगले प्रधानमंत्री हो।

राजीव गांधी की मृत्यु श्रीलंका के आतंकी समूह LTTE (जिसे ईसाई समूह द्वारा वित्तीय सहायता मिलती थी) द्वारा हुई थी। बता दे कि राजीव गांधी को 21 मई, 1991 को तमिलनाडु में 24 वर्षीय धनु नामक रोमन कैथेलिक महिला, जिसका असली नाम क्लैबथि था, के द्वरा आत्मघाती बम द्वारा उड़ा दिया गया था। राजीव गांधी को मार दिया गया तो बाहरी जासूसी एजेंसियों ने सोनिया गांधी को बढ़ावा देने के लिए पर्दे के पीछे से काम किया। सोनिया की लीडरशिप के लिए संभावित खतरों को एक एक कर के शानदार तरीके से दुर्घटनाओं को प्राकृतिक रूप देकर हटा दिया गया, जो कि KGB की विशेषता है।
कैथोलिक्स रविवार को विशेष मानते है और सोनिया गांधी के सभी खतरों को रविवार को ही खत्म कर दिया गया। राजेश पायलट की रोड एक्सीडेंट में रविवार को मौत हो गई। जितेंद्र प्रसाद रविवार को ब्रेन हैमरेज से मारे गए, माधव रविवार के ही दिन प्लेन क्रैश में मारे गए, कमलनाथ जो कि कांग्रेस के बड़े युवा नेता थे वो भी प्लेन क्रैश में बाल बाल बचे थे।

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