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श्रीनगर के बैंकों से आया चोंका-देने वाला DATA,पूरा देश हैरान-परेशान!!!
इस खबर को पूरा पढने के बाद आप ये सोचने पर मजबूर हो जाएँगे
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के काले धन के खिलाफ छिड़े महासंग्राम से सिर्फ भ्रष्ट लोग ही परेशान नहीं हैं! आतंकवादी और उनके आकाओं की नींद भी हराम हो रखी है! नकली करेंसी का मामला कितना गंभीर था, इसका शायद देश एक करोड़ों लोगों और यहाँ तक की पत्रकारों, विशेषज्ञों इत्यादि को भी कोई अंदाजा नहीं था!
अब श्रीनगर के बैंको से मिलने वाले data के बारे में जो कहा जा रहा है, वह हैरान-परेशान कर देना वाला है! बताया जा रहा है कि वहां के बैंको में जमा होने वाली रकम में करीब 43% रकम नकली थी!
ये अपने आप में चौंका देने वाली figure है!इसका मतलब हुआ की पाकिस्तान ने, कश्मीर घाटी की इकॉनमी को लगभग नष्ट कर दिया था! नकली करेंसी का फैलाव इस कदर तक बढ़ गया होगा, किसी ने सोचा तक नहीं होगा
लेकिन चलिए मोदी जी की वजह से इस कार्य पर भी प्रतिबन्ध लग ही गया!एक बात और भी है की नोट बंदी के बाद से देश में एक भी आतंकी गतिविधि या कश्मीर की हिंसा की खबर नहीं आई है! मतलब मोदी निति की वजह से ALL IS WELL हो गया !
अगले पेज पर देखें “और ज्यादा चौंका देने वाले तथ्य” और जाने अब कैसे मोदी नीति ने मचाया श्रीनगर में धमाल और निकल के आया वहां के नेताओं का असली चेहरा
अब चूँकि 500 और 1000 की पुराणी करेंसी बैन हो चुकी है, हम चैन की सांस जरूर ले सकते हैं लेकिन गौर कीजिये की पाकिस्तान अपनी चाल में कहाँ तक कामयाब हो चूका था! गौर करने वाली बात यह भी है कि घाटी में नकली करेंसी न जाने कितने अधिक समय से चल रही थी!
43% तक नकली नोट चला देना, ये काम एक दो साल का नहीं है! ये काम कम से कम एक दशक में हुआ होगा! और इस काम में अलगाववादियों ने भरपूर मदद की होगी, इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता!अब सोचने वाली बात ये भी है की अब जब कश्मीर का 43% पैसा बेकार हो चूका है
वहां के पत्थरबाजों को बांटा हुआ पैसा भी पूरी तरह से बेकार हो गया होगा!मोदी जी ने पहले पेलेट गन चलाई फिर BSF को कश्मीर में खुली छुट दे दी और अब नोट बंदी करके सबको सड़क पर ले आए! मतलब सभी गद्दारों के बूरे दिन एक साथ आ गए हैं!
काले धन का सफाया तो अलग मुद्दा है, उससे होने वाले देश को लाभ को भी एक तरफ कर दें, तो केवल और केवल, कश्मीर में नकली करेंसी को खत्म करने के लिए भी यदि मोदी जी ऐसा कदम उठाते, तो उसे शत-प्रतिशत सही माना जाता!साथ ही साथ इससे देश को जो फायदा होता वो भी बहुत फायेदेमंद होता!
जब से देश में नोटबंदी हुई है तब से औपोजीशन और बाकी पार्टियों के नेताओं के सोशल मीडिया पर बहुत से ट्वीट्स, वीडीयोज़, और बयान सामने आये, जिनका निचोड़ यही निकला कि इन सभी को लगता है कि मोदी के इस फैसले से कुछ नहीं होने वाला है और वो जनता को बेवकूफ बना रहे हैं!
इन सभी की इस बौखलाहट के पीछे दो वजह हैं पहली तो काले धन की समस्या पर विराम लग गया है, और दूसरा चुनाव, जो सर पर हैं! सभी जानते हैं काले धन का चुनाव में बहुत प्रयोग होता पर 500/1000 के नोट बैन होने के बाद ये पैसा महज कागज़ रह गया है l अब ये नेता अपनी वोट की रोटियाँ कैसे सकेंगे, यही चिंता इन्हें सता रही है!
ये सब इतना नहीं समझ पाएं हैं कि इस समस्या से एक नहीं बल्कि अनेक समस्याओं पर काबू पाया जा सकेगा ! और तो और सेना के लिए कुछ करने का मौका….
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ક્ષણે ક્ષણનાં મૂલ વિચારી જો
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મનસુંબે ઉડનારા ઉંચે તું નીચે નજર કરી
પાંખ વિણ ઘરાને નિહાળી ખુદને માપી જો

રણને ઝાંઝ્વાનું જળ મળ્યું વારસામાં અહીં
હે ગરજતા વાદળ વરસી દરિયાને માપી જો

ગયેલ સમયને શું ખબર ? લકીર લીસોટાની
આ સમયના પડઘા સંગ્રિ પોથીએ લાપી જો

ઇન્તજારનાં મૂલ કેવાં અંકાય છે મિલનમાં ?
ન મળ્યાનાં સ્વપ્નો સજાવી જિંદગી જીવી જો

બુદ્ધિની સફળતાથી અજાણ નથી હોતાં સ્વપ્નો
વિપરીત સંજોગે નસીબનુ ઘડતર કરી જીવી જો

ઉછી ઉધારીમાં નહી માનતી અકળ પળ સમજી
એ ક્ષણે ક્ષણનાં ગુણ વિચારી દળદાર જીવી જો
===પ્રહેઅદભાઈ પ્રજાપતિ

अगर हर हिँदू माँ-बाप अपने बच्चों को बताए कि अजमेर दरगाह वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने किस तरह इस्लाम कबूल ना करने पर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को मुस्लिम सैनिकों के बीच बलात्कार करने के लिए निर्वस्त्र करके फेँक दिया था । और फिर किस तरह पृथ्वीराज चौहान की वीर पुत्रियों ने आत्मघाती बनकर मोइनुद्दीन चिश्ती को 72 हूरों के पास भेजा था । तो शायद ही कोई हिँदू उस मुल्ले की कब्र पर माथा पटकने जाए “अजमेर के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को ९० लाख हिंदुओं को इस्लाम में लाने का गौरव प्राप्त है । मोइनुद्दीन चिश्ती ने ही मोहम्मद गोरी को भारत लूटने के लिए उकसाया और आमंत्रित किया था… (सन्दर्भ – उर्दू अखबार “पाक एक्सप्रेस, न्यूयार्क १४ मई २०१२). अधिकांश मुर्दा हिन्दू तो शेयर भी नहीं करेंगे,,धिक्कार है ऐसे हिन्दुओ पर !!

जानिए इस्लाम कैसे पैदा हुआ..

👉असल में इस्लाम कोई धर्म नहीं है .एक मजहब है..
दिनचर्या है..

👉मजहब का मतलब अपने कबीलों के गिरोह को बढ़ाना..

👉यह बात सब जानते है की मोहम्मदी मूलरूप से अरब वासी है ।

👉अरब देशो में सिर्फ रेगिस्तान पाया जाता है.वहां जंगल नहीं है, पेड़ नहीं है. इसीलिए वहां मरने के बाद जलाने
के लिए लकड़ी न होने के कारण ज़मीन में दफ़न कर दिया जाता था.

👉रेगिस्तान में हरीयाली नहीं होती.. ऐसे में रेगिस्तान में हरा चटक रंग देखकर इंसान चला आता की यहाँ जीवन है ओर ये हरा रंग सूचक का काम करता था..

👉अरब देशो में लोग रेगिस्तान में तेज़ धुप में सफ़र करते थे, इसीलिए वहां के लोग सिर को ढकने के लिए
टोपी 💂पहनते थे।
जिससे की लोग बीमार न पड़े.

👉अब रेगिस्तान में खेत तो नहीं थे, न फल, तो खाने के लिए वहा अनाज नहीं होता था. इसीलिए वहा के
लोग 🐑🐃🐄🐐🐖जानवरों को काट कर खाते थे. और अपनी भूख मिटाने के लिए इसे क़ुर्बानी का नाम दिया गया।

👉रेगिस्तान में पानी की बहुत कमी रहती थी,💧 इसीलिए लिंग (मुत्रमार्ग) साफ़ करने में पानी बर्बाद न हो जाये इसीलिए लोग खतना (अगला हिस्सा काट देना ) कराते
थे।

👉सब लोग एक ही कबिले के खानाबदोश होते थे इसलिए
आपस में भाई बहन ही निकाह कर लेते थे।

👉रेगिस्तान में मिट्टी मिलती नहीं थी मुर्ती बनाने को इसलिए मुर्ती पुजा नहीं करते थे| खानाबदोश थे ,

👉 एक जगह से दुसरी जगह
जाना पड़ता था इसलिए कम बर्तन रखते थे और एक थाली नें पांच लोग खाते थे|

👉कबीले की अधिक से अधिक संख्या बढ़े इसलिए हर एक
को चार बीवी रखने की इज़ाजत दी जाती थी
..
🔥अब समझे इस्लाम कोई धर्म नहीं मात्र एक कबीला है..
और इसके नियम असल में इनकी दिनचर्या है ।

नोट : पोस्ट पढ़के इसके बारे में सोचो।

#इस्लाम_की_सच्चाई

अगर हर हिँदू माँ-बाप अपने बच्चों को बताए कि अजमेर दरगाह वाले ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती ने किस तरह इस्लाम कबूल ना करने पर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता को मुस्लिम सैनिकों के बीच बलात्कार करने के लिए निर्वस्त्र करके फेँक दिया था ।

और फिर किस तरह पृथ्वीराज चौहान की वीर पुत्रियों ने आत्मघाती बनकर मोइनुद्दीन चिश्ती को 72 हूरों के पास भेजा था ।
तो शायद ही कोई हिँदू उस मुल्ले की कब्र पर माथा पटकने जाए

“अजमेर के ख्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती को ९० लाख हिंदुओं को इस्लाम में लाने का गौरव प्राप्त है ।
मोइनुद्दीन चिश्ती ने ही मोहम्मद गोरी को भारत लूटने के लिए उकसाया और आमंत्रित किया था…

(सन्दर्भ – उर्दू अखबार “पाक एक्सप्रेस, न्यूयार्क १४ मई २०१२).

अधिकांश मुर्दा हिन्दू तो शेयर भी नहीं करेंगे,,धिक्कार है ऐसे हिन्दुओ पर !!

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વલોપાતના છૂટી ગયા સાથ
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નવરાશને નીરાંત કયો છે ઉઠું જ્યાંરથી
વિચાર થૈ લેણિયાત સતાવે દરરોજ આમ

વિચારે વિચરે મળે નિત્ય ક્રમ નાં મુકામ
પરિણામ હાથ ન લાગે ધરે ધણીને નામ

યંત્રવત સફર સવારથી સાજ સુધી આમ
થૈ છે રોજની પરાયણ આ જિંદગી ખાસ

ખરા ખોટા,સારા નરસા,વિધિવત્ત વિચારે
પિપાસા કરે ઉધરાણી જંપવા ન દે જનાબ

ફરજ સમજુ કે દબાણ પૂછી રહ્યો વારંવાર
જીવવું ને જીવન નદી થૈ બે કાંઠાની કમાન

છૂટીગઈ વલોપાત,બંધ થયે શ્વાસ નાં દ્વાર
કર્મોની વણજાર ન રહે એકેય સાથ નિભાવ
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ

देश की पहली गद्दार फेमिली कौन ?
जिसने देश को लुटा और देश को ६०-७0 सालो तक
अंधेरेमे रखा गद्दारी करते करते और आज जाके पता
चला की ये एक मुस्लिम परस्त दलका अगुवाई करतीहै

नहेरुने  सच्चाई जो देश से छुपाई गयी भारत के आजादी को लेकर…… !!
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सत्ता के भूखे कुत्तों ने।

14 अगस्त 1947 की रात को आजादी नहीं आई बल्कि ट्रान्सफर ऑफ़ पावर का एग्रीमेंट हुआ था…

सत्ता के हस्तांतरण की संधि
( Transfer of Power Agreement ) यानि भारत के आज़ादी की संधि | ये इतनी खतरनाक संधि है की अगर आप अंग्रेजों द्वारा सन 1615 से लेकर 1857 तक किये
गए सभी 565 संधियों या कहें साजिस को जोड़ देंगे तो उस से भी ज्यादा खतरनाक संधि है ये | 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी नहीं आई बल्कि #ट्रान्सफर_ऑफ़_पॉवर_एग्रीमेंट हुआ था पंडित नेहरु और लोर्ड माउन्ट बेटन के बीच में | Transfer of Power और #Independence ये दो अलग चीजे है | स्वतंत्रता और सत्ता का हस्तांतरण ये दो अलग चीजे है | #IndependenceDay

और सत्ता का हस्तांतरण कैसे होता है ?

आप देखते होंगे क़ि एक पार्टी की सरकार है, वो चुनाव में हार जाये, दूसरी पार्टी की सरकार आती है तो दूसरी पार्टी का प्रधानमन्त्री जब शपथ ग्रहण करता है, तो वो शपथ ग्रहण करने के तुरंत बाद एक रजिस्टर पर हस्ताक्षर करता है, आप लोगों में से बहुतों ने देखा होगा, तो जिस रजिस्टर पर आने वाला प्रधानमन्त्री हस्ताक्षर करता है, उसी रजिस्टर को ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर की बुक कहते है और उस पर हस्ताक्षर के बाद पुराना प्रधानमन्त्री नए प्रधानमन्त्री को सत्ता सौंप देता है | और पुराना प्रधानमंत्री निकल कर बाहर चला जाता है |

यही नाटक हुआ था 14 अगस्त 1947 की रात को 12 बजे | लार्ड माउन्ट बेटन ने अपनी सत्ता पंडित नेहरु के हाथ में सौंपी थी, और हमने कह दिया कि स्वराज्य आ गया | कैसा स्वराज्य और काहे का
स्वराज्य ? अंग्रेजो के लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? और हमारे लिए स्वराज्य का मतलब क्या था ? ये भी समझ लीजिये | अंग्रेज कहते थे क़ि हमने
स्वराज्य दिया, माने अंग्रेजों ने अपना राज तुमको सौंपा है ताकि तुम लोग कुछ दिन इसे चला लो जब जरुरत पड़ेगी तो हम दुबारा आ जायेंगे |
ये अंग्रेजो का interpretation (व्याख्या) था | और हिन्दुस्तानी लोगों की व्याख्या क्या थी कि हमने स्वराज्य ले लिया | और इस संधि के अनुसार ही भारत के दो टुकड़े किये गए और भारत और
पाकिस्तान नामक दो #Dominion_States बनाये गए हैं | ये Dominion State का अर्थ हिंदी में होता है एक बड़े राज्य के अधीन एक छोटा राज्य, ये शाब्दिक अर्थ है और भारत के सन्दर्भ में इसका
असल अर्थ भी यही है | अंग्रेजी में इसका एक अर्थ है “One of the self-governing nations in the British Commonwealth” और दूसरा “Dominance or power through legal authority “|
Dominion State और Independent Nation में जमीन आसमान का अंतर होता है | मतलब सीधा है क़ि हम (भारत और पाकिस्तान) आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | दुःख तो ये होता
है की उस समय के सत्ता के लालची लोगों ने बिना सोचे समझे या आप कह सकते हैं क़ि पुरे होशो हवास में इस संधि को मान लिया या कहें जानबूझ कर ये सब स्वीकार कर लिया | और ये जो
तथाकथित आज़ादी आयी, इसका कानून अंग्रेजों के संसद में बनाया गया और इसका नाम रखा गया Indian Independence Act यानि भारत के स्वतंत्रता का कानून | और ऐसे धोखाधड़ी से अगर इस
देश की आजादी आई हो तो वो आजादी, आजादी है कहाँ ? और इसीलिए गाँधी जी (महात्मा गाँधी) 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में नहीं आये थे | वो नोआखाली में थे | और कोंग्रेस के बड़े नेता
गाँधी जी को बुलाने के लिए गए थे कि बापू चलिए आप | गाँधी जी ने मना कर दिया था | क्यों ? गाँधी जी कहते थे कि मै मानता नहीं कि कोई आजादी आ रही है | और गाँधी जी ने स्पस्ट कह दिया
था कि ये आजादी नहीं आ रही है सत्ता के हस्तांतरण का समझौता हो रहा है | और गाँधी जी ने नोआखाली से प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी |
उस प्रेस स्टेटमेंट के पहले ही वाक्य में गाँधी जी ने ये कहा कि मै हिन्दुस्तान के उन करोडो लोगों को ये सन्देश देना चाहता हु कि ये जो तथाकथित आजादी (So Called #Freedom) आ रही है ये मै नहीं
लाया | ये सत्ता के लालची लोग सत्ता के हस्तांतरण के चक्कर में फंस कर लाये है | मै मानता नहीं कि इस देश में कोई आजादी आई है | और 14 अगस्त 1947 की रात को गाँधी जी दिल्ली में नहीं थे
नोआखाली में थे | उस समय के नेता जो खुद को सेकुलर मानते थे वे गांधी को भारत की राजनीति का सबसे बड़ा पुरोधा मानते थे जिसने हिन्दुस्तान की आज़ादी की लड़ाई की नीव रखी हो वो आदमी 14 अगस्त 1947 की रात को दिल्ली में मौजूद नहीं था | क्यों ?
इसका अर्थ है कि गाँधी जी इससे सहमत नहीं थे | (नोआखाली के दंगे तो एक बहाना था असल बात तो ये सत्ता का हस्तांतरण ही था) और 14 अगस्त 1947 की रात को जो कुछ हुआ है वो आजादी
नहीं आई …. ट्रान्सफर ऑफ़ पॉवर का एग्रीमेंट लागू हुआ था पंडित नेहरु और अंग्रेजी सरकार के बीच में | अब शर्तों की बात करता हूँ , सब का जिक्र करना तो संभव नहीं है लेकिन कुछ महत्वपूर्ण
शर्तों की जिक्र जरूर करूंगा जिसे एक आम भारतीय जानता है और उनसे परिचित है
इस संधि की शर्तों के मुताबिक हम आज भी अंग्रेजों के अधीन/मातहत ही हैं | वो एक शब्द आप सब
सुनते हैं न Commonwealth Nations | अभी कुछ दिन पहले दिल्ली में #CommonwealthGame हुए थे आप सब को याद होगा ही और उसी में बहुत बड़ा घोटाला भी हुआ है | ये Commonwealth
का मतलब होता है समान सम्पति | किसकी समान सम्पति ? ब्रिटेन की रानी की समान सम्पति | आप जानते हैं ब्रिटेन की महारानी हमारे भारत की भी महारानी है और वो आज भी भारत की
नागरिक है और हमारे जैसे 71 देशों की महारानी है वो | #Commonwealth में 71 देश है और इन सभी 71 देशों में जाने के लिए ब्रिटेन की महारानी को वीजा की जरूरत नहीं होती है क्योंकि वो अपने
ही देश में जा रही है लेकिन भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ब्रिटेन में जाने के लिए वीजा की जरूरत होती है क्योंकि वो दुसरे देश में जा रहे हैं | मतलब इसका निकाले तो ये हुआ कि या तो
ब्रिटेन की महारानी भारत की नागरिक है या फिर भारत आज भी ब्रिटेन का उपनिवेश है इसलिए ब्रिटेन की रानी को पासपोर्ट और वीजा की जरूरत नहीं होती है अगर दोनों बाते सही है तो 15 अगस्त
1947 को हमारी आज़ादी की बात कही जाती है वो झूठ है | और #CommonwealthNations में हमारी एंट्री जो है वो एक #Dominion_State के रूप में है न क़ि Independent Nation के रूप में| इस
देश में प्रोटोकोल है क़ि जब भी नए राष्ट्रपति बनेंगे तो 21 तोपों की सलामी दी जाएगी उसके अलावा किसी को भी नहीं | लेकिन ब्रिटेन की महारानी आती है तो उनको भी 21 तोपों की सलामी दी जाती
है, इसका क्या मतलब है? और पिछली बार ब्रिटेन की महारानी यहाँ आयी थी तो एक निमंत्रण पत्र छपा था और उस निमंत्रण पत्र में ऊपर जो नाम था वो #ब्रिटेन_की_महारानी का था और उसके नीचे
भारत के राष्ट्रपति का नाम था मतलब हमारे देश का राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक नहीं है | ये है राजनितिक गुलामी, हम कैसे माने क़ि हम एक स्वतंत्र देश में रह रहे हैं | एक शब्द आप सुनते होंगे
High Commission ये अंग्रेजों का एक गुलाम देश दुसरे #गुलाम देश के यहाँ खोलता है लेकिन इसे Embassy नहीं कहा जाता | एक मानसिक गुलामी का उदहारण भी देखिये ……. हमारे यहाँ के
अख़बारों में आप देखते होंगे क़ि कैसे शब्द प्रयोग होते हैं – (ब्रिटेन की महारानी नहीं) महारानी एलिज़ाबेथ, (ब्रिटेन के प्रिन्स चार्ल्स नहीं) प्रिन्स चार्ल्स , (ब्रिटेन की प्रिंसेस नहीं) प्रिंसेस डैना (अब
तो वो हैं नहीं), अब तो एक और प्रिन्स विलियम भी आ गए है |
#भारत का नाम #INDIA रहेगा और सारी दुनिया में भारत का नाम इंडिया प्रचारित किया जायेगा और
सारे सरकारी दस्तावेजों में इसे इंडिया के ही नाम से संबोधित किया जायेगा | हमारे और आपके लिए ये भारत है लेकिन दस्तावेजों में ये इंडिया है | संविधान के प्रस्तावना में ये लिखा गया है
“India that is Bharat ” जब क़ि होना ये चाहिए था “Bharat that was India ” लेकिन दुर्भाग्य इस देश का क़ि ये भारत के जगह इंडिया हो गया | ये इसी संधि के शर्तों में से एक है | अब हम
भारत के लोग जो इंडिया कहते हैं वो कहीं से भी भारत नहीं है | कुछ दिन पहले मैं एक लेख पढ़ रहा था अब किसका था याद नहीं आ रहा है उसमे उस व्यक्ति ने बताया था कि इंडिया का नाम बदल के
भारत कर दिया जाये तो इस देश में आश्चर्यजनक बदलाव आ जायेगा और ये विश्व की बड़ी शक्ति बन जायेगा अब उस शख्स के बात में कितनी सच्चाई है मैं नहीं जानता, लेकिन भारत जब तक
भारत था तब तक तो दुनिया में सबसे आगे था और ये जब से इंडिया हुआ है तब से पीछे, पीछे और पीछे ही होता जा रहा है |
भारत के संसद में वन्दे मातरम नहीं गया जायेगा अगले 50 वर्षों तक यानि 1997 तक | 1997 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने इस मुद्दे को संसद में उठाया तब जाकर पहली बार इस तथाकथित
आजाद देश की संसद में वन्देमातरम गाया गया | 50 वर्षों तक नहीं गाया गया क्योंकि ये भी इसी संधि की शर्तों में से एक है | इसके साथ वन्देमातरम को ले के जेहादियों ने मुसलमानों में जो भ्रम फैलाया गया वो जिन्ना जैसे
अंग्रेजों गुलामों के दिशानिर्देश पर ही हुआ था | इस गीत में कुछ भी ऐसा आपत्तिजनक नहीं है जो मुसलमानों के दिल को ठेस पहुचाये | आपत्तिजनक तो जन,गन,मन में है जिसमे एक शख्स को
भारत भाग्यविधाता यानि भारत के हर व्यक्ति का भगवान बताया गया है या कहें भगवान से भी बढ़कर |
इस संधि की शर्तों के अनुसार सुभाष चन्द्र बोस को जिन्दा या मुर्दा अंग्रेजों के हवाले करना था | यही वजह रही क़ि सुभाष चन्द्र बोस अपने देश के लिए लापता रहे और कहाँ मर खप गए ये आज तक
किसी को मालूम नहीं है | समय समय पर कई अफवाहें फैली लेकिन सुभाष चन्द्र बोस का पता नहीं लगा और न ही किसी ने उनको ढूँढने में रूचि दिखाई | मतलब भारत का एक महान स्वतंत्रता
सेनानी अपने ही देश के लिए बेगाना हो गया | सुभाष चन्द्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई थी ये तो आप सब लोगों को मालूम होगा ही लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है क़ि ये 1942 में बनाया गया था और
उसी समय द्वितीय विश्वयुद्ध चल रहा था और सुभाष चन्द्र बोस ने इस काम में जर्मन और जापानी लोगों से मदद ली थी जो कि अंग्रेजो के दुश्मन थे और इस आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों को
सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया था | और जर्मनी के हिटलर और इंग्लैंड के एटली और चर्चिल के व्यक्तिगत विवादों की वजह से ये द्वितीय विश्वयुद्ध हुआ था और दोनों देश एक दुसरे के कट्टर
दुश्मन थे | एक दुश्मन देश की मदद से सुभाष चन्द्र बोस ने अंग्रेजों के नाकों चने चबवा दिए थे | एक तो अंग्रेज उधर विश्वयुद्ध में लगे थे दूसरी तरफ उन्हें भारत में भी सुभाष चन्द्र बोस की वजह से
परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था | इसलिए वे सुभाष चन्द्र बोस के दुश्मन थे |
इस संधि की शर्तों के अनुसार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाकुल्लाह, रामप्रसाद विस्मिल
जैसे लोग आतंकवादी थे और यही हमारे syllabus में पढाया जाता था बहुत दिनों तक | और अभी एक महीने पहले तक ICSE बोर्ड के किताबों में भगत सिंह को आतंकवादी ही बताया जा रहा था, वो
तो भला हो कुछ लोगों का जिन्होंने अदालत में एक केस किया और अदालत ने इसे हटाने का आदेश दिया है (ये समाचार मैंने इन्टरनेट पर ही अभी कुछ दिन पहले देखा था) |
आप भारत के सभी बड़े रेलवे स्टेशन पर एक किताब की दुकान देखते होंगे “व्हीलर बुक स्टोर” वो इसी संधि की शर्तों के अनुसार है | ये व्हीलर कौन था ? ये व्हीलर सबसे बड़ा अत्याचारी था | इसने
इस देश क़ि हजारों माँ, बहन और बेटियों के साथ बलात्कार किया था | इसने किसानों पर सबसे ज्यादा गोलियां चलवाई थी | 1857 की क्रांति के बाद कानपुर के नजदीक बिठुर में व्हीलर और नील
नामक दो अंग्रजों ने यहाँ के सभी 24 हजार लोगों को जान से मरवा दिया था चाहे वो गोदी का बच्चा हो या मरणासन्न हालत में पड़ा कोई बुड्ढा | इस व्हीलर के नाम से इंग्लैंड में एक एजेंसी शुरू हुई थी
और वही भारत में आ गयी | भारत आजाद हुआ तो ये ख़त्म होना चाहिए था, नहीं तो कम से कम नाम भी बदल देते | लेकिन वो नहीं बदला गया क्योंकि ये इस संधि में है |
इस संधि की शर्तों के अनुसार अंग्रेज देश छोड़ के चले जायेगे लेकिन इस देश में कोई भी कानून चाहे वो किसी क्षेत्र में हो नहीं बदला जायेगा | इसलिए आज भी इस देश में 34735 कानून वैसे के वैसे
चल रहे हैं जैसे अंग्रेजों के समय चलता था | Indian Police Act, Indian Civil Services Act (अब इसका नाम है Indian Civil Administrative Act), Indian Penal Code (Ireland में भी IPC
चलता है और Ireland में जहाँ “I” का मतलब Irish है वही भारत के IPC में “I” का मतलब Indian है बाकि सब के सब कंटेंट एक ही है, कौमा और फुल स्टॉप का भी अंतर नहीं है) Indian
Citizenship Act, Indian Advocates Act, Indian Education Act, Land Acquisition Act, Criminal Procedure Act, Indian Evidence Act, Indian Income Tax Act, Indian Forest
Act, Indian Agricultural Price Commission Act सब के सब आज भी वैसे ही चल रहे हैं बिना फुल स्टॉप और कौमा बदले हुए |
इस संधि के अनुसार अंग्रेजों द्वारा बनाये गए भवन जैसे के तैसे रखे जायेंगे | शहर का नाम, सड़क का नाम सब के सब वैसे ही रखे जायेंगे | आज देश का संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट, राष्ट्रपति
भवन कितने नाम गिनाऊँ सब के सब वैसे ही खड़े हैं और हमें मुंह चिढ़ा रहे हैं | लार्ड डलहौजी के नाम पर डलहौजी शहर है , वास्को डी गामा नामक शहर है (हाला क़ि वो पुर्तगाली था ) रिपन रोड,
कर्जन रोड, मेयो रोड, बेंटिक रोड, (पटना में) फ्रेजर रोड, बेली रोड, ऐसे हजारों भवन और रोड हैं, सब के सब वैसे के वैसे ही हैं | आप भी अपने शहर में देखिएगा वहां भी कोई न कोई भवन, सड़क उन
लोगों के नाम से होंगे | हमारे गुजरात में एक शहर है सूरत, इस सूरत शहर में एक बिल्डिंग है उसका नाम है कूपर विला | अंग्रेजों को जब जहाँगीर ने व्यापार का लाइसेंस दिया था तो सबसे पहले वो
सूरत में आये थे और सूरत में उन्होंने इस बिल्डिंग का निर्माण किया था | ये गुलामी का पहला अध्याय आज तक सूरत शहर में खड़ा है |
हमारे यहाँ शिक्षा व्यवस्था अंग्रेजों की है क्योंकि ये इस संधि में लिखा है और मजे क़ि बात ये है क़ि अंग्रेजों ने हमारे यहाँ एक शिक्षा व्यवस्था दी और अपने यहाँ अलग किस्म क़ि शिक्षा व्यवस्था रखी है
| हमारे यहाँ शिक्षा में डिग्री का महत्व है और उनके यहाँ ठीक उल्टा है | मेरे पास ज्ञान है और मैं कोई
अविष्कार करता हूँ तो भारत में पूछा जायेगा क़ि तुम्हारे पास कौन सी डिग्री है ? अगर नहीं है तो मेरे अविष्कार और ज्ञान का कोई मतलब नहीं है | जबकि उनके यहाँ ऐसा बिलकुल नहीं है आप अगर
कोई अविष्कार करते हैं और आपके पास ज्ञान है लेकिन कोई डिग्री नहीं हैं तो कोई बात नहीं आपको प्रोत्साहित किया जायेगा | नोबेल पुरस्कार पाने के लिए आपको डिग्री की जरूरत नहीं होती है | हमारे
शिक्षा तंत्र को अंग्रेजों ने डिग्री में बांध दिया था जो आज भी वैसे के वैसा ही चल रहा है | ये जो 30 नंबर का पास मार्क्स आप देखते हैं वो उसी शिक्षा व्यवस्था क़ि देन है, मतलब ये है क़ि आप भले ही
70 नंबर में फेल है लेकिन 30 नंबर लाये है तो पास हैं, ऐसा शिक्षा तंत्र से सिर्फ गदहे ही पैदा हो सकते हैं और यही अंग्रेज चाहते थे | आप देखते होंगे क़ि हमारे देश में एक विषय चलता है जिसका
नाम है Anthropology | जानते है इसमें क्या पढाया जाता है ? इसमें गुलाम लोगों क़ि मानसिक अवस्था के बारे में पढाया जाता है | और ये अंग्रेजों ने ही इस देश में शुरू किया था और आज आज़ादी
के 64 साल बाद भी ये इस देश के विश्ववविद्यालयों में पढाया जाता है और यहाँ तक क़ि सिविल सर्विस की परीक्षा में भी ये चलता है |
इस संधि की शर्तों के हिसाब से हमारे देश में आयुर्वेद को कोई सहयोग नहीं दिया जायेगा मतलब हमारे देश की विद्या हमारे ही देश में ख़त्म हो जाये ये साजिस की गयी | आयुर्वेद को अंग्रेजों ने नष्ट
करने का भरसक प्रयास किया था लेकिन ऐसा कर नहीं पाए | दुनिया में जितने भी पैथी हैं उनमे ये होता है क़ि पहले आप बीमार हों तो आपका इलाज होगा लेकिन आयुर्वेद एक ऐसी विद्या है जिसमे
कहा जाता है क़ि आप बीमार ही मत पड़िए | आपको मैं एक सच्ची घटना बताता हूँ -जोर्ज वाशिंगटन जो क़ि अमेरिका का पहला राष्ट्रपति था वो दिसम्बर 1799 में बीमार पड़ा और जब उसका बुखार
ठीक नहीं हो रहा था तो उसके डाक्टरों ने कहा क़ि इनके शरीर का खून गन्दा हो गया है जब इसको निकाला जायेगा तो ये बुखार ठीक होगा और उसके दोनों हाथों क़ि नसें डाक्टरों ने काट दी और खून
निकल जाने की वजह से जोर्ज वाशिंगटन मर गया | ये घटना 1799 की है और 1780 में एक अंग्रेज भारत आया था और यहाँ से प्लास्टिक सर्जरी सीख के गया था | मतलब कहने का ये है क़ि हमारे
देश का चिकित्सा विज्ञान कितना विकसित था उस समय | और ये सब आयुर्वेद की वजह से था और उसी आयुर्वेद को आज हमारे सरकार ने हाशिये पर पंहुचा दिया है |
इस संधि के हिसाब से हमारे देश में गुरुकुल संस्कृति को कोई प्रोत्साहन नहीं दिया जायेगा | हमारे
देश के समृद्धि और यहाँ मौजूद उच्च तकनीक की वजह ये गुरुकुल ही थे | और अंग्रेजों ने सबसे पहले इस देश की गुरुकुल परंपरा को ही तोडा था, मैं यहाँ लार्ड मेकॉले की एक उक्ति को यहाँ बताना
चाहूँगा जो उसने 2 फ़रवरी 1835 को ब्रिटिश संसद में दिया था, उसने कहा था “”I have traveled across the length and breadth of India and have not seen one person who is a
beggar, who is a thief, such wealth I have seen in this country, such high moral values, people of such caliber, that I do not think we would ever conquer this
country, unless we break the very backbone of this nation, which is her spiritual and
cultural heritage, and, therefore, I propose that we replace her old and ancient
education system, her culture, for if the Indians think that all that is foreign and
English is good and greater than their own, they will lose their self esteem, their
native culture and they will become what we want them, a truly dominated nation” |
गुरुकुल का मतलब हम लोग केवल वेद, पुराण,उपनिषद ही समझते हैं जो की हमारी मुर्खता है
अगर आज की भाषा में कहूं तो ये गुरुकुल जो होते थे वो सब के सब Higher Learning Institute
हुआ करते थे |
इस संधि में एक और खास बात है | इसमें कहा गया है क़ि अगर हमारे देश के (भारत के) अदालत में कोई ऐसा मुक़दमा आ जाये जिसके फैसले के लिए कोई कानून न हो इस देश में या उसके फैसले
को लेकर संबिधान में भी कोई जानकारी न हो तो साफ़ साफ़ संधि में लिखा गया है क़ि वो सारे
मुकदमों का फैसला अंग्रेजों के न्याय पद्धति के आदर्शों के आधार पर ही होगा, भारतीय न्याय पद्धति का आदर्श उसमे लागू नहीं होगा | कितनी शर्मनाक स्थिति है ये क़ि हमें अभी भी अंग्रेजों का ही अनुसरण करना होगा |
भारत में आज़ादी की लड़ाई हुई तो वो ईस्ट इंडिया कम्पनी के खिलाफ था और संधि के हिसाब से ईस्ट इंडिया कम्पनी को भारत छोड़ के जाना था और वो चली भी गयी लेकिन इस संधि में ये भी है
क़ि ईस्ट इंडिया कम्पनी तो जाएगी भारत से लेकिन बाकि 126 विदेशी कंपनियां भारत में रहेंगी और भारत सरकार उनको पूरा संरक्षण देगी | और उसी का नतीजा है क़ि ब्रुक बोंड, लिप्टन, बाटा,
हिंदुस्तान लीवर (अब हिंदुस्तान यूनिलीवर) जैसी 126 कंपनियां आज़ादी के बाद इस देश में बची रह गयी और लुटती रही और आज भी वो सिलसिला जारी है |
अंग्रेजी का स्थान अंग्रेजों के जाने के बाद वैसे ही रहेगा भारत में जैसा क़ि अभी (1946 में) है और ये भी इसी संधि का हिस्सा है | आप देखिये क़ि हमारे देश में, संसद में, न्यायपालिका में, कार्यालयों में
हर कहीं अंग्रेजी, अंग्रेजी और अंग्रेजी है जब क़ि इस देश में 99% लोगों को अंग्रेजी नहीं आती है | और उन 1% लोगों क़ि हालत देखिये क़ि उन्हें मालूम ही नहीं रहता है क़ि उनको पढना क्या है और UNO
में जा के भारत के जगह पुर्तगाल का भाषण पढ़ जाते हैं |
आप में से बहुत लोगों को याद होगा क़ि हमारे देश में आजादी के 50 साल बाद तक संसद में वार्षिक
बजट शाम को 5:00 बजे पेश किया जाता था | जानते है क्यों ? क्योंकि जब हमारे देश में शाम के 5:00 बजते हैं तो लन्दन में सुबह के 11:30 बजते हैं और अंग्रेज अपनी सुविधा से उनको सुन सके
और उस बजट की समीक्षा कर सके | इतनी गुलामी में रहा है ये देश | ये भी इसी संधि का हिस्सा है |
1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ तो अंग्रेजों ने भारत में राशन कार्ड का सिस्टम शुरू किया
क्योंकि द्वितीय विश्वयुद्ध में अंग्रेजों को अनाज क़ि जरूरत थी और वे ये अनाज भारत से चाहते थे | इसीलिए उन्होंने यहाँ जनवितरण प्रणाली और राशन कार्ड क़ि शुरुआत क़ि | वो प्रणाली आज भी
लागू है इस देश में क्योंकि वो इस संधि में है | और इस राशन कार्ड को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल उसी समय शुरू किया गया और वो आज भी जारी है | जिनके पास राशन कार्ड होता था
उन्हें ही वोट देने का अधिकार होता था | आज भी देखिये राशन कार्ड ही मुख्य पहचान पत्र है इस देश में |
अंग्रेजों के आने के पहले इस देश में गायों को काटने का कोई कत्लखाना नहीं था | मुगलों के समय तो ये कानून था क़ि कोई अगर गाय को काट दे तो उसका हाथ काट दिया जाता था | अंग्रेज यहाँ आये
तो उन्होंने पहली बार कलकत्ता में गाय काटने का कत्लखाना शुरू किया, पहला शराबखाना शुरू किया, पहला वेश्यालय शुरू किया और इस देश में जहाँ जहाँ अंग्रेजों की छावनी हुआ करती थी वहां
वहां वेश्याघर बनाये गए, वहां वहां शराबखाना खुला, वहां वहां गाय के काटने के लिए कत्लखाना खुला | ऐसे पुरे देश में 355 छावनियां थी उन अंग्रेजों के | अब ये सब क्यों बनाये गए थे ये आप सब
आसानी से समझ सकते हैं | अंग्रेजों के जाने के बाद ये सब ख़त्म हो जाना चाहिए था लेकिन नहीं हुआ क्योंक़ि ये भी इसी संधि में है |
हमारे देश में जो संसदीय लोकतंत्र है वो दरअसल अंग्रेजों का वेस्टमिन्स्टर सिस्टम है | ये अंग्रेजो के
इंग्लैंड क़ि संसदीय प्रणाली है | ये कहीं से भी न संसदीय है और न ही लोकतान्त्रिक है| लेकिन इस देश में वही सिस्टम है क्योंकि वो इस संधि में कहा गया है | और इसी वेस्टमिन्स्टर सिस्टम को
महात्मा गाँधी बाँझ और वेश्या कहते थे (मतलब आप समझ गए होंगे) |
ऐसी हजारों शर्तें हैं | मैंने अभी जितना जरूरी समझा उतना लिखा है | मतलब यही है क़ि इस देश में जो कुछ भी अभी चल रहा है वो सब अंग्रेजों का है हमारा कुछ नहीं है | अब आप के मन में ये सवाल
हो रहा होगा क़ि पहले के राजाओं को तो अंग्रेजी नहीं आती थी तो वो खतरनाक संधियों (साजिस) के जाल में फँस कर अपना राज्य गवां बैठे लेकिन आज़ादी के समय वाले नेताओं को तो अच्छी अंग्रेजी
आती थी फिर वो कैसे इन संधियों के जाल में फँस गए | इसका कारण थोडा भिन्न है क्योंकि आज़ादी के समय वाले नेता अंग्रेजों को अपना आदर्श मानते थे इसलिए उन्होंने जानबूझ कर ये
संधि क़ि थी | वो मानते थे क़ि अंग्रेजों से बढियां कोई नहीं है इस दुनिया में | भारत की आज़ादी के समय के नेताओं के भाषण आप पढेंगे तो आप पाएंगे क़ि वो केवल देखने में ही भारतीय थे लेकिन
मन,कर्म और वचन से अंग्रेज ही थे | वे कहते थे क़ि सारा आदर्श है तो अंग्रेजों में, आदर्श शिक्षा व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श अर्थव्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श चिकित्सा व्यवस्था है तो
अंग्रेजों की, आदर्श कृषि व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श न्याय व्यवस्था है तो अंग्रेजों की, आदर्श कानून व्यवस्था है तो अंग्रेजों की | हमारे आज़ादी के समय के नेताओं को अंग्रेजों से बड़ा आदर्श कोई
दिखता नहीं था और वे ताल ठोक ठोक कर कहते थे क़ि हमें भारत अंग्रेजों जैसा बनाना है | अंग्रेज हमें जिस रस्ते पर चलाएंगे उसी रास्ते पर हम चलेंगे | इसीलिए वे ऐसी मूर्खतापूर्ण संधियों में फंसे |
अगर आप अभी तक उन्हें देशभक्त मान रहे थे तो ये भ्रम दिल से निकाल दीजिये | और आप अगर समझ रहे हैं क़ि वो ABC पार्टी के नेता ख़राब थे या हैं तो XYZ पार्टी के नेता भी दूध के धुले नहीं हैं |
आप किसी को भी अच्छा मत समझिएगा क्योंक़ि आज़ादी के बाद के इन 64 सालों में सब ने चाहे वो राष्ट्रीय पार्टी हो या प्रादेशिक पार्टी, प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता का स्वाद तो
सबो ने चखा ही है | खैर …………… #सत्ता_के_हस्तांतरण_की_संधि (#Transfer_of_Power_Agreement
तो भारत क़ि गुलामी जो अंग्रेजों के ज़माने में थी, अंग्रेजों के जाने के 64 साल बाद आज 2011 में जस क़ि तस है क्योंकि हमने संधि कर रखी है और देश को इन खतरनाक संधियों के मकडजाल में
फंसा रखा है | बहुत दुःख होता है अपने देश के बारे जानकार और सोच कर | मैं ये सब कोई ख़ुशी से नहीं लिखता हूँ ये मेरे दिल का दर्द होता है जो मैं आप लोगों से शेयर करता हूँ |
ये सब बदलना जरूरी है लेकिन हमें सरकार नहीं व्यवस्था बदलनी होगी और आप अगर सोच रहे हैं क़ि कोई मसीहा आएगा और सब बदल देगा तो आप ग़लतफ़हमी में जी रहे हैं | कोई हनुमान जी,
कोई राम जी, या कोई कृष्ण जी नहीं आने वाले | आपको और हमको ही ये सारे अवतार में आना होगा, हमें ही सड़कों पर उतरना होगा और और इस व्यवस्था को जड मूल से समाप्त करना होगा |
भगवान भी उसी की मदद करते हैं जो अपनी मदद स्वयं करता है |
इतने लम्बे पत्रलेख को आपने धैर्यपूर्वक पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद् |
और अच्छा लगा हो तो इसे share कीजिये, और ज्ञान का प्रवाह होते रहने दीजिये

🚩।। ॐ जय श्रीराम ॐ ।।

खोंग्रेस और वामपंथियों का देशसे ग़द्दारी का प्रूफ [ एविडन्स ]
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भाई अरून शुक्ला जी की वाल से
गद्दार कौन ..????
इसरो के वैज्ञानिक नंबी नारायणन की कहानी देश के हर नागरिक को जाननी चाहिए ताकि वो समझ सकें कि कांग्रेस और वामपंथी पार्टियों का गठजोड़ किस तरह से धीरे-धीरे पूरे देश की जड़ें कमजोर करने में जुटा हैं
नंबी नारायणन को 1994 में केरल पुलिस ने जासूसी और भारत की रॉकेट टेक्नोलॉजी दुश्मन देश को बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था
तब ये मामला कई दिन अखबारों की सुर्खियों में रहा था, मीडिया ने बिना जांचे-परखे पुलिस की थ्योरी पर भरोसा करते हुए उन्हें गद्दार मान लिया था
गिरफ्तारी के समय नंबी नारायणन रॉकेट में इस्तेमाल होने वाले स्वदेशी क्रायोजेनिक इंजन बनाने के बेहद करीब पहुंच चुके थे
इस गिरफ्तारी ने देश के पूरे रॉकेट और क्रायोजेनिक प्रोग्राम को कई दशक पीछे धकेल दिया था। उस घटना के करीब 24 साल बाद इस महान वैज्ञानिक को अब जाकर इंसाफ मिला है।
वैसे तो नंबी नारायणन 1996 में ही आरोपमुक्त हो गए थे, लेकिन उन्होंने अपने सम्मान की लड़ाई जारी रखी और अब 24 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ के सारे नेगेटिव रिकॉर्ड को हटाकर उनके सम्मान को दोबारा बहाल करने का आदेश दिया है
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने ने केरल सरकार को आदेश दिया है कि नारायणन को उनकी सारी बकाया रकम, मुआवजा और दूसरे लाभ दिए जाएं
ये रकम केरल सरकार देगी और इसकी रिकवरी उन पुलिस अधिकारियों से की जाएगी जिन्होंने उन्हें जासूसी के झूठे मामले में फंसाया , साथ ही सभी सरकारी दस्तावेजों में नंबी नारायणन के खिलाफ दर्ज प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने का आदेश दिया गया है
कोर्ट ने कहा कि उन्हें हुए नुकसान की भरपाई पैसे से नहीं की जा सकती है, लेकिन नियमों के तहत उन्हें 75 लाख रुपये का भुगतान किया जाए। कोर्ट का आदेश सुनने के लिए 76 साल के नंबी नारायणन खुद कोर्ट में मौजूद थे।
नंबी नारायण के खिलाफ लगे आरोपों की जांच सीबीआई से करवाई गई थी और सीबीआई ने 1996 में उन्हें सारे आरोपों से मुक्त कर दिया था
जांच में यह बात सामने आ गई कि भारत के स्पेस प्रोग्राम को डैमेज करने की नीयत से केरल की तत्कालीन वामपंथी सरकार ने नंबी नारायण को फंसाया था, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था
सीबीआई की जांच में ही इस बात के संकेत मिल गए थे कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के इशारे पर केरल की कम्युनिस्ट सरकार ने नंबी को साजिश का शिकार बनाया
एक इतने सीनियर वैज्ञानिक को न सिर्फ गिरफ्तार करके लॉकअप में बंद किया गया, बल्कि उन्हें टॉर्चर किया गया कि वो बाकी वैज्ञानिकों के खिलाफ गवाही दे सकें
ये सारी कवायद भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को ध्वस्त करने की नीयत से हो रही थी, ये वो दौर था जब भारत जैसे देश अमेरिका से स्पेस टेक्नोलॉजी करोड़ों रुपये किराये पर लिया करते थे
भारत के आत्मनिर्भर होने से अमेरिका को अपना कारोबारी नुकसान होने का डर था। जिसके लिए सीआईए ने वामपंथी पार्टियों को अपना हथियार बनाया
एसआईटी के जिस अधिकारी सीबी मैथ्यूज़ ने नंबी के खिलाफ जांच की थी, उसे कम्युनिस्ट सरकार ने बाद में राज्य का डीजीपी बना दिया , सीबी मैथ्यूज के अलावा तब के एसपी केके जोशुआ और एस विजयन के भी इस साजिश में शामिल होने की बात सामने आ चुकी है
केरल सरकार के अलावा तब केंद्र की कांग्रेस सरकार की भूमिका भी संदिग्ध है, जिसने इतने बड़े वैज्ञानिक के खिलाफ साजिश पर अांखें बंद कर ली थीं। बताया जाता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने इसके लिए ऊपर से नीचे तक नेताओं और अफसरों को मोटी रकम पहुंचाई थी।
अगर नंबी नारायण के खिलाफ साजिश नहीं हुई होती तो भारत को अपना पहला क्रायोजेनिक इंजन 15 साल पहले मिल गया होता और इसरो आज पूरी दुनिया से पंद्रह वर्ष आगे होता
उस दौर में भारत क्रायोजेनिक इंजन को किसी भी हाल में पाना चाहता था। अमेरिका ने इसे देने से साफ इनकार कर दिया। जिसके बाद रूस से समझौता करने की कोशिश हुई, रूस से बातचीत अंतिम चरण में थी, तभी अमेरिका के दबाव में रूस मुकर गया
इसके बाद नंबी नारायणन ने सरकार को भरोसा दिलाया कि वो और उनकी टीम देसी क्रायोजेनिक इंजन बनाकर दिखाएंगे
उनका ये मिशन सही रास्ते पर चल रहा था कि तब तक वो साजिश के शिकार हो गए नंबी नारायण ने अपने साथ हुई साजिश पर ‘रेडी टु फायर’ नाम से एक किताब भी लिखी

ગઝલની વેદના ગઝલ
==========
ચેતનાની જડ જાણે ગઝલ ઘાવ વિના
વેદનાનું રાજ જાણે ગઝલ વિદ્યા વિના

પ્રકાસ અંધકારથી બેખબર મિલન વિના
વાંઝણી ન જાણે દર્દ પીડા પ્રસુતી વિના

કેફ ઘોળી ઘોળી પી જવાના દર્દ એવા
છે ગઝલ એક એવું વસાણું દવા વિના

દર્દનું બાણ ઉતરે હદય સોસરું હોલ વિના
નીચોવી લોહી પીએ દર્દ જબરું પાત્ર વિના

ઉદાસીની વાણી મહેકી હઠતી સ્મેલ વિના
ખોલે દ્વાર ગુમસુદાનાં રણ સમરાંગણ વિના

અંતરિયાળ હદયના ઝંઝાવાત સપાટીએ ઉભરે
પીએ કટોરી મીઠા ઝહરની જાત તપાસ્યા વિના

ઉકેલે અર્થોના રહસ્ય રદીફ કાફિયા શસ્ત્ર વિના
મર્મના પડકાર નિભાવે ગઝલ રણ સંગ્રામ વિના
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ ….

રિવાઇઝ ઓન 15 /7/ 2018

કલમની કરામતે શાહીને સમજતો ગયો
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સમયથી પર રહ્યો છેતરાતો ગયો
મને એ રીતે હું ઓળખતો ગયો

સમજણને થપ્પડોથી ઉટકતો ગયો
ને અંદરના વાસણને માઝતો ગયો

સમયને સમજતાં આવડ્યું ત્યારથી
નિર્દોષ પણું છોડી મને છેતરતો ગયો

જન્મથી મરણ સુધીની સફર મળી
તો હું અહી ઘાટે ઘાટે ઘડાતો ગયો

પહેલેથી ક્યાં ખબર હતી પરખની
સમય સાથે સમયથી પરખાતો ગયો

લેખ લખતો રહ્યો હયાતી અખબારનો
કલમની કરામતે શાહીને સમજતો ગયો
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ

पाकिस्तान के टुकड़े कर अगर इन्दिराने दुसरा एक मुस्लिम राष्ट [बांग्लादेश ] बनाया , अगर वो छाती तो हिन्दू राष्ट्र बना शक्ति थी लेकिन खुद मैमुना बेगम उर्फ़ इंदिरा गाँधी हिन्दू थी ही नहीं इसीलिए उसने एक मुस्लिम राष्ट्र बनाया

मुस्लिम परसनल बोर्ड की स्थापना इंदिरा गाँधी ने की थी
खोंग्रेसकी गर्भित साजिस खुली हो गई है
इस्लाम धर्म ,धर्म ही नहीं बल्कि एक आतंकवादीकी कथा है
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मुस्लिम परसनल लो बोर्ड की स्थापना इंदिरा गाँधी ने की थी उनके सभी कारनामे ऐसे ही थे जो
देश को तोड़नेकी साजिस कही जा शक्ति है और ये खोंग्रेसकी मुस्लिम देश बनानेकी ये गर्भित साजिस है

खोंग्रेसकी गर्भित साजिस खुली हो गई है
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मुस्लिम परसनल लो बोर्ड की स्थापना इंदिरा गाँधी ने की थी उनके सभी कारनामे ऐसे ही थे जो
देश को तोड़नेकी साजिस कही जा शक्ति है और ये खोंग्रेसकी मुस्लिम देश बनानेकी ये गर्भित साजिस है

नहेरु फेमिली यानी नहेरु खानदान एक मुस्लिम खानदान है उसके कई एक्ज़ाम्पल है जो सेक्युलर की आड़मे देश को उल्लू बनाता है
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==नहेरु खानदान अगर हिन्दू होता तो काश्मीर से काश्मीरी पंडितो को भगाया न होता
==नहेरु खानदान अगर हिन्दू होता तो बांग्ला देश मुस्लिम राष्ट्र नाहोता ,इन्दिराने पाकिस्तानके टुकड़े
तो किये लेकिन धरती पर कुस्लीम राष्ट्रका इजाफा किया ,न की हिन्दुराष्ट्र का ,और उसने भारतमे
मिलानेकी कोशिश न की ,
==नहेरु खानदान अगर हिन्दू होता तो पाकिस्तनाके ९३००० सैनिक युद्ध जीतनेके बाद इन्दिराने बिना
शर्त उनको वापिस न कई होते
==नहेरु खानदान अगर हिन्दू होता तो गाय वध का कानून पारित करा दिया होता
==नहेरु खानदान अगर हिन्दू होता तो इंदिरा गाँधी [यानी मैमुना बेगम ] अफगानिस्तानमे जा के बाबर
की मज़ार पे माथा टेकने न जाती
===अगर नहेरु खानदान हिन्दू होता तो देश को सेक्युलरिज़्म का ज़हर न देता
=== अगर नहेरु खानदान हिन्दू होता तो मुस्लिम तुस्टिकरण की नीति न होती इस देश में कई सारी
जातियो अल्प संख्यक है फॉर एक्सआमपल ,पारसी,
सेक्युलरिज़म ये एक स्वीट पोइज़न,है मीठा जहज़र है जो सनातन धर्म यानी हिन्दू संस्कृति को नष्ट करनेकी , यानी इस देश में मुस्लिम देश बनानेकी साजिस यानी सेक्युलरिज़्म
===प्रहलादभाई प्रजापति