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खोंग्रेसीओका किसान के नामसे ऑदोलन
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ये ऑदोलन किशनका नहीं बल्कि खोंग्रेसके लिए खोंग्रेस का है जो बरसोंसे गुंडागिरी करते आये
है और जो देश को बर्बाद करते लुटते आये है कोई किसानोंका ऑदोलन नहीं है जो सत्तामेसे बाहर हो गए है और सत्ता पानेके लिए तड़प रहे है उनके साथ सभी गुंडोकी टोली है और देश द्रोही योकि जमात है जो देश विदेशमे जा के देश को बर्बाद करनेमे लगे है

देशद्रोही नेहरू को पड़ा था इस जनरल से बेहद तेज थप्पड़, वो जमीन पर गिर पड़ा था

जब भारत आजाद होने वाला था बात उस समय की हैं । भारत का संविधान लिखा जा रहा था और भारत की सरकार भारत की रक्षा के लिए योजनायें बना रही थी । सेना प्रमुख का चयन किया जाना था| हर कोई चाहता था कि सबसे काबिल और अनुभवी व्यक्ति ही सेना का प्रमुख बने, परंतु नेहरू का यही स्टाइल था की वो उलटी गंगा बहाता था और बड़ी गलतियां कर खुद को सही साबित करने के लिए और बड़ी गलतिया करता था, आजादी के बाद से ही नेहरु की योजनायें कुछ अलग ही थी

बिना किसी की सलाह के नेहरु ने भारतीय सेना के चीफ कमांडर के रूप में जनरल रोब लॉकहार्ट को नियुक्त कर लिया । जनरल रोब लॉकहार्ट ब्रिटिश का आदमी था ।

सभी लोग नेहरु के इस फैसले से नाराज हो गए क्यूंकि 200 से भी ज्यादा साल के बाद भारत को अंग्रेजो से आजादी मिली थी । भारतीय सेना के मेजर जनरल एए जिक रूद्र इस फैसले से बहुत परेशान हो गए ।

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एक दिन जनरल रोब लॉकहार्ट ने नेहरु ने ख़ास मुलाकात की और नेहरु के सामने कई योजनायें रखी| लॉकहार्ट ने सारी योजनायें एक कागज़ पर लिख कर मेज पर रख दी और फिर नेहरु को अच्छे से समझाया|  लॉकहार्ट कमरे से बहार गया और एए जिक रूद्र को बड़ी हैरानी से देखा ।

जब उनसे पूछा गया कि क्या हुआ : “एए जिक रूद्र ने कहा कि हमे किसी निति की जरुरत नहीं हैं| हमारी निति अहिंसा हैं| इस घटना के एक साल बाद से कश्मीर में संकट बढ़ गया था| जनरल लॉकहार्ट अपनी सारी नीतियां पाकिस्तानी सेना के प्रमुख कमांडर जनरल डगलस ग्रेसी को बताने लगा | लॉकहार्ट जानता था की सीमा पर कई घुसबैठिये थे लेकिन उसने कोई कार्रवाई नहीं की| लेकिन मेजर करियप्पा ने कश्मीर और भारतीय सेना को इस फैसले से बचा लिया| जब इस सबके बारे में सरकार को पता चला तो सरकार ने लॉकहार्ट की इमानदारी पर काफी सवाल उठाये गए| अब नेहरु के पास कोई बहाना नहीं बचा था, और उन्होंने लॉकहार्ट से सवाल किया की वाकई वो कश्मीर के दंगो के बारे में जानता था|

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लॉकहार्ट ने जवाब दिया की आपको कोई हक नहीं हैं मुझसे ये सवाल पूछने का| मैं जानता हूँ की कुछ ही दिनों में मुंबई से एक नाव जाने वाली हैं जिसमे ब्रिटिश अधिकारी हैं और उनके परिवारों को इंग्लैंड छोड़ा जाएगा| मैं भी भारत जल्दी ही छोड़ने वाला हूँ|

अगले ही दिन सेना के नए चीफ का चयन करने के लिए बैठक बिठाई गयी| बैठक में रक्षामंत्री बलदेव सिंह,  मेजर जनरल नाथू सिंह राठौड़, मेजर जनरल करियप्पा और कुछ रक्षा विशेषज्ञ मौजूद थे| हर एक को पता था कि जनरल करियप्पा सबसे योग्य था और उसे सेना का नेतृत्व करना आता हैं|

तब नेहरु ने कहा हमे एक नया आर्मी चीफ नियुक्त करना हैं क्यूंकि लॉकहार्ट ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया हैं| नेहरु ने कहा की मैंने एक ब्रिटिश आदमी को इसलिए चुना था क्यूंकि मुझे लगता था की हमारे अपने देश में ऐसा कोई हैं जो आर्मी चीफ बनने के काबिल हो|


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नेहरु की इस बात से सभी बहुत दुखी हुए और सभी चुप बैठे थे| तुरंत ही मंत्री बलदेव सिंह ने कहा सर ” मैं आपकी बात से सहमत हूँ”, तब वहा खड़े मेजर जनरल नाथू सिंह राठौड़ ने कहा की “हां आपने सही कहा की हमारे देश में इतना काबिल कोई नहीं हैं तो क्या हमे भारत का प्रधानमंत्री भी एक ब्रिटिश आदमी को ही बनाना चाहिए था ?”

ऐसा कहते ही मेजर जनरल नाथू सिंह राठौड़ ने नेहरू को बहुत जोर से 1 थप्पड़ मार दिया, जिस से नेहरू की टोपी उड़ गयी और वो जमीन पर गिर गया, फिर कमरे से सभी सेना के अफसर बाहर चले आये

ऐसा था हमारा पहला प्रधानमंत्री जो सैनिको का उनके मुह पर अपमान करता था

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इस देश का सबसे बड़ा दुश्मन खोंग्रेस, सेक्युलर और वाम पंथी है
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इस डलने देश को बर्बादिके पथ पर लाके रख दिया है ,इसने न कोई गरिबोका भला किया है कोई किसानोंका भला किया है न कोई सेना या सिपाईयोंका भला किया है ,न कोई मजदूरोका भला किया है नकोई दलितोका भला किया है ,नकोई बिछड़े लोगोका भला किया ,उसने सिर्फ न सिर्फ उन पर राज निति करके उसकी अपनी रोटियों शेकी है और देश की संपत्ति लूटी है देश को जाती धर्म में
बात दिया है और हर जगह नफरत की राह निति की है देश में कॉम कॉम के बिच में आगजनी फैलाई है हिन्दू मुसलमानोंके बिच में दरारे पैदा की है जो मॉस के नामसे हिंदुओंका अपमान किया है
अब ये किसानोंके नाम पर खुद ऑदोलन खड़ा किया है जो उनकी सभी पोल खुल गई है
===प्रहलादभाई प्रजापति

 

 

इस देशमे क्या क्या नहीं होता ?
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हिंदुस्तानकी एक बड़ीपार्टी जिसने देश पे लम्बे वक्त तक राज कीया है उसकी मुखिया एक बार डांसर थी ,हिन्दुस्तान में क्या नहीं हो ाहकता जरा देखिए और कौन राज नहीं क्र शक्ति वो भी देखिए बाहरसे आये हुए लोगोने देश की जनता को मुर्ख बासनाय है और लम्बे समय तक देश को लुटा ही है ,कैसे कैसे लोग हुए है एक आईआईटी यान ने देश को हवाला कारोबार से करोड़ो कमाया ,एक नोवी दसवीं फेल मिनिस्टर बन गये आप जरा देखिए इस देश के लोग कितने सहन शील है और कितने भोले है की जो फिरभी अपनी ईमानदारी या इंसानियत नहीं भूलते , जहा एक डांसर ,राज करती है ,जहा एक ऐयासी पीएम बनता है और नाम जाट धर्म छुपाके देश को अंधेरेमे रखता है ६० सालतक ,एक औरत बाबरकी मजार पर मठ्ठा टेक बोलती है की हिन्दुस्तन उनके वंशजोंके कब्जेमें है एक बाजारू औरतका बेटा पीएम का ख़्वाब देखता है और कई नेता लोग गुंडोका और डॉन लोगोका सहारा लेके अब्जो खरबो रूपये बनाते है इस देश में क्या क्या नहीं होता ,कई जर्नालिस्ट जो गद्दारी करके देश को तोड़नेकी बात करते है और ब्लेकमेल करके करोड़ो कमाते है इस देश में क्या क्या नहीं होता इस देशमे लूखा लोग सत्तामे बैठ जाते है और जांवरोका चारा भी खा जाते है इस देश क्या क्या नहीं होता सेवाके नामसे देश की कई जमीनके मालिक ,कई दामद होके देशके कई किसानोंकी जमीं के मालिक हो जाते है इस देश में क्या क्या नहीं होता ,कई लोग सतामे बैठे लोगोके साथ मिलके बेंकोका पैसे लेके भाग जाते है इस देश में क्या क्या नहीं होता कई लोग बिसडे लोग या दलितोके नामकी राज निति करके ाज्बो खरबो के मालिक हो जाते है ,गरीबी और गरीब की सेवा का ढ़ोग रचाके खुद माले तुजार हो जाते है और गरीब और गरीबी वही की वही रह जाती है इस देश में क्या क्या नहीं होता
===प्रहलादभाई प्रजापति

પાયમાલીના પગેરે ….પગ તળેની જમીન જાગી… [ આઝાદી પછીનું ]
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ગતિમાં થઇ પ્રગતિ વારસામાં મળી અધોગતિની આગેવાની
વિશ્વાસના શ્વાસમાં ઘટતો રફતાર ને દુર્ગતિની થઇ દીવાનગી
બાઉન્સ -બેકના સૈદ્ધાન્તીક નિયમેં અવિચારી પણે આગમન
ચક્ર જેમ ફરતા ગોળ ગોળ,ગોળાનું ફરી થયું અહીં પુનરાગમન
વિશ્વ લઈને જન્મ્યું હશે મૃત્યુ નું પ્રમાણ પત્ર છે વાત નીરવીવાદ
નિયમોનું પાલન કરવું ને કરાવવું ખસી કરણનું છે નિયમન તંત્ર
ઝાંખો માનવતાનો પ્રકાશ છે વિચારે ધરમૂળ ફેરફાર નો આધાર
રફતારમાં પગેરાં પાયમાલીનાં છે આસપાસમાં ધરાર અપરંપાર
સેક્યુલારિઝમ ની શોધખોળે જુના ગયા ને નવા આવ્યા વંશજો
નવી બોટલે જેનો વાઈન લૂંટફાટ દૈકૈતી ઈનીએજ વિદેશી વંશજે
માટી એની એજ લુટેરા બદલાય નવા નામે વીદેશી ઈલાજે માત
ગરનાય લૂંટે બહારનાય લૂંટે ભેગા મળી જુઓ ગદારોની જમાત
અટલ  હોય કે મોદી એક શુરવીરોની ધરાએ જન્મ્યા  એકલ વીર
પ્રતાપ શિવાજી લક્ષ્મીબાઈ ને સનાતની ઋષિમુનિએ છે  જાગીર
હજારો વર્ષની પરંપરાએ વેદ ઉપનિષદોએ હયાતીની રખવાળી
સંસ્ક્રીતિની જ્યોત જલતી રાખી દેશી માટી તણી છે મરદાનગી
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પગ તળેની જમીન જાગી
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વર્ષોથી નિરાતે આરોગી સાંઢ સાંઢણીઓ સફાળાં જાગી બોખલાઈ ગયાં
ને કુંભ કરણી નીંદમાંથી નીકળી પડ્યાં છે ગુમાવેલા આરણયની શોધમાં
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
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રીવાઈજ ઓન 6 /6/2017

चैलेंजर ट्रॉफी खेलने वाले हिन्दुस्तानी क्रिक्केटरो के लिए
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मैं आज भगवान्से प्रार्थना करताहु की हमारे देशके क्रिकेटरोको
बाउट बड़ी हार मिले और देश वासियोसे गालियों मेले और उनको देश द्रोही जाहिर करे क्यों की हमारे जवानोंके लहुसे रंगे हुए हाथ वाली ये लोगोने हाथ मिलाया है और जश्न मनाया है जे हामरे देश के दुश्मनोसे हाथ मिलाने वालोको प्रभु सख्त में सख्त सजा दे , हामरे जवानोकी सहादत ,और उनके परिवारोकि उनको श्राप लागे ये ऐसे देश द्रोही क्रिकेटरोसे तो दुश्मन भले जो हमको
हमेशा उनसे सजग रखते है ये लोग हम्मारे होक हमको ही लुटते है और हमें दुखी करते है हमारे उन जावनकी शादातको शर्मिदी करते है बीसीसीआई एक देश द्रोही ऑर्गनाशन है
===प्रहलादभाई प्रजापति

अमरीका
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अगर आतकवाद बंद हुवा तो अमरिकाका हाल बुरा हो जाएगा क्यों की उसके शाश्त्र कौन लेगा
और उस वजहसे उसकी इकोनॉमी पर इफेक्ट होगा और समय बिटनेके बाद अमरीका एक गरीब देश
बन जाएगा ; उसकी इकोनॉमिक बचानेके लिए वो पिछले दरवाजेसे शश्त्रो का व्यापार करता है और दुनियाको मुर्ख बनाता है
===प्रहलादभाई प्रजापति

અવમુલ્યોનાં ભ્રમણે આક્રમણ
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કોઠે પડી ગયું મને  જળો જથાનું  જમણ
હયાતીની સફરે આળસ ઘરાનાનું  દુષણ
જલ્દી માલેતુજાર થવા મોહનું આભૂષણ
ભૂલ્યા  અસલી કુદરતી પ્રક્રિયાનું ભ્રમણ
આશની દિવાલે સ્થાપે વીશ્વાસે અવિશ્વાસ
ભીડના કોલાહલે નિઃશ્વાસે અવધિના શ્વાસ
સુખી નથી સુખી થયાના ડોળે સફરના શ્વાસ
લાગણીઓ કાલની ચીંતાના આભાસે આવાસ
હયાતી પોકારે સફરે ચડી જન જનની સોગાત
જીવતરે કર્યા છે અવમુલ્યોનાં ભ્રમણે આક્રમણ
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ 01 / 06 / 2017

ગરીબી અને ગરીબોના દલાલોને ઓળખો
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દોઢ કરોડની વૈભવી કારમાં યાત્રાએ નીકળેલા અલ્પેશભાઈ ક્યહાં ઓબીસી લોકોનું ભલું કરવા નીકળ્યા છે અરે આ લોકો ઓબીસી કે ગરીબ માણસોનું ભલું કરતા કરતા પોતે કેવા માલદાર થઇ જાયછે ખરેખર આદેશના ગરીબો અને બધી જાતિઓએ સમજવાનો સમય પાકી ગયો છે આવા લોકોને ઓળખવા અને તેમનો સાથ આપનારા લોકોને જાકારો આપવો જોઈએ , ખરા લોકો જે સમાજના હીત  માટે કામ કરતા હતા જેવાકે ગાંધીજી , રવિશંકર મહારાજ , ઇંદુલાલ ,ઇન્દુ ચાચા
અને ઘણા લોકો જે અસલી સેવા ભાવિ છે તેઓને ઓળખતા શીખે ,આવા લોકો જે ગરીબોને પોતાના હાથા તરીકે ઉપયોગ કરીને મળે તુજાર થઇ જાય છે તે આપણી પ્રજાએ સમજવું જરૂરી છે
===પ્રહલાદભાઈ પ્રજાપતિ

શબ્દોની વૈતરણી તરવી
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શબ્દોના મર્ઝની અર્ચના શબ્દોમાં
દવા ઘાવની ઓળખાઈ શબ્દોમાં
ઘર્ષણો શબ્દોનો ઘડાતાં શબ્દોમાં
બની દુષણો યુદ્ધ ખેલાય  જનોમાં
શબ્દો ન વાંઝણા વંશવ વેલો રાખે
સાહિત્ય કલા પ્રસૂતિઓ પ્રસવતા
ઈશારા થકી મૌન તોરણે લટકતા
ભાષાને પરિભાષાએ લઇ મૂલવતાં
દઈ આશરો લક્ષા ગૃહેથી નીકળતા
શબ્દો ઢાલ થઇ મહાભારત મૂલવતાં
ટેક્વી શીર શબ્દ આરે વૈતરણી તરવા
અર્થોની હોડીએ ભાષાને જાઉં પામવા
===પ્રહેલાદભાઈ પ્રજાપતિ
રિવાઇઝ ઓન 29 / 5 /2017